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    किसान के वायरल वीडियो से अंतरराष्ट्रीय किडनी रैकेट का पर्दाफाश, भारत से कंबोडिया तक फैला नेटवर्क; दो डॉक्टर पकड़े

    Updated: Fri, 02 Jan 2026 10:50 PM (IST)

    महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले में एक कर्जबोझ किसान के वायरलवीडियो ने पूरे देश में फैले बड़े किडनी तस्करी रैकेट का भंडाफोड़ कर दिया है। इस गिरोह का नेटवर ...और पढ़ें

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    किसान के वायरल वीडियो से भारत से कंबोडिया तक फैले बड़े किडनी रैकेट का पर्दाफाश हुआ

    डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले में एक कर्जबोझ किसान के वायरल वीडियो ने पूरे देश में फैले बड़े किडनी तस्करी रैकेट का भंडाफोड़ कर दिया है। इस गिरोह का नेटवर्क भारत के कई राज्यों से लेकर कंबोडिया तक फैला हुआ था, जहां गरीब और कर्ज में डूबे लोगों को लालच देकर उनकी किडनी निकालकर 50 से 80 लाख रुपये में बेची जाती थी, जबकि दानदाताओं को महज 5 से 8 लाख रुपये दिए जाते थे।

    यह मामला तब सामने आया जब चंद्रपुर के नागभीड़ तहसील के मिंथुर गांव के किसान रोशन कुडे ने पिछले महीने एक वीडियो जारी किया। वीडियो में रोशन ने रोते हुए बताया कि साहूकारों का 1 लाख रुपये का कर्ज ब्याज समेत 74 लाख तक पहुंच गया था।

    मजबूरन उन्होंने सोशल मीडिया पर 'किडनी डोनर कम्युनिटी' पेज से संपर्क किया और कोलकाता होते हुए कंबोडिया जाकर अपनी किडनी 8 लाख रुपये में बेच दी। यह वीडियो वायरल होने के बाद चंद्रपुर पुलिस ने जांच शुरू की, जो अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहुंच चुकी है।

    चंद्रपुर पुलिस अधीक्षक सुदर्शन मुम्मका ने बताया कि जांच में एक जटिल नेटवर्क का पता चला है, जिसमें साहूकार, एजेंट, फर्जी डॉक्टर और नामी चिकित्सक शामिल हैं। गिरोह अवैध प्रत्यारोपण भारत के निजी अस्पतालों के अलावा दक्षिण-पूर्व एशिया, खासकर कंबोडिया के अस्पतालों में करवाता था। अब तक छह साहूकारों समेत कई गिरफ्तारियां हो चुकी हैं।

    जांच में दो प्रमुख डॉक्टरों के नाम सामने आए हैं:

    • दिल्ली के डॉ. रविंदर पाल सिंह, जिन्हें पुलिस ने गिरफ्तार किया था, लेकिन दिल्ली कोर्ट ने अंतरिम जमानत दे दी। उन्हें 2 जनवरी को चंद्रपुर कोर्ट में पेश होने का निर्देश दिया गया है।
    • तमिलनाडु के त्रिची स्थित स्टार किम्स अस्पताल के प्रबंध निदेशक डॉ. राजरत्नम गोविंदास्वामी, जो फरार हैं और उनकी तलाश जारी है।

     पुलिस के अनुसार, डॉ. सिंह को प्रति सर्जरी करीब 10 लाख रुपये मिलते थे, जबकि डॉ. गोविंदास्वामी अस्पताल व्यवस्था के लिए 20 लाख रुपये लेते थे। त्रिची के इस अस्पताल में कई अवैध प्रत्यारोपण हुए थे। इसके अलावा सोलापुर के फर्जी डॉक्टर रामकृष्ण सुंचू (उर्फ कृष्णा) और मोहाली के हिमांशु भारद्वाज जैसे एजेंटों को गिरफ्तार किया गया है। ये खुद पहले किडनी बेच चुके थे और बाद में कमीशन के लिए 10-12 लोगों को कंबोडिया भेजते थे।

     एसपी मुम्मका ने कहा, "मोबाइल रिकॉर्ड और तकनीकी डेटा के विश्लेषण से एजेंटों, दानदाताओं और डॉक्टरों के बीच गहरा संबंध पता चला है। हम बैंक खातों और डिजिटल ट्रांजेक्शन की जांच कर रहे हैं ताकि अन्य अस्पतालों और गिरोह के सदस्यों की पहचान हो सके।" पुलिस ने मानव अंग प्रत्यारोपण अधिनियम की धाराओं के तहत केस दर्ज किया है।

    यह मामला कर्ज के जाल में फंसे गरीब किसानों के शोषण की काली तस्वीर पेश करता है। जांच जारी है और जल्द ही और खुलासे होने की उम्मीद है।