Trending

    Move to Jagran APP
    pixelcheck
    विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

    टैरिफ वॉर से मंडराया मंदी का खतरा, अमेरिका में महंगाई की मार; चीन पर क्‍या होगा असर?

    अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप ने विश्व के 75 देशों को पारस्परिक टैरिफ से 90 दिन की मोहलत दी है। दूसरी ओर चीन पर 125 प्रतिशत टैरिफ लगाया है। ट्रंप के इस फैसले से साफ हो गया है कि अब सिर्फ व्यापार को संतुलित करने का मामला नहीं है। यह विश्व की दो बड़ी आर्थिक महाशक्तियों के बीच वर्चस्व की जंग है जिसमें...

    By Deepti Mishra Edited By: Deepti Mishra Updated: Mon, 14 Apr 2025 05:56 PM (IST)
    Hero Image
    चीन और अमेरिका के बीच व्यापारिक जंग का किस-किस देश पर पड़ेगा असर।

    जागरण टीम, नई दिल्‍ली। विश्व के 75 देशों को पारस्परिक टैरिफ से 90 दिन की मोहलत देने और चीन पर 125 प्रतिशत टैरिफ लगाने के डोनाल्ड ट्रंप के कदम से यह साफ हो गया है कि यह सिर्फ व्यापार को संतुलित करने का मामला नहीं है। यह विश्व की दो बड़ी आर्थिक महाशक्तियों के बीच वर्चस्व की जंग है। इसमें टैरिफ सिर्फ एक टूल है।

    विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

    पिछले करीब तीन दशकों में चीन निर्यात के दम पर करीब 19 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बन गया है। करीब 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था वाला अमेरिका चीन की बढ़ती सामरिक ताकत पर अंकुश लगाना चाहता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि चीन की सामरिक ताकत पर अंकुश लगाने का कारगर तरीका व्यापार की दुनिया में उसके दबदबे को कमजोर करना है। डोनाल्ड ट्रंप की अगुवाई में अमेरिका टैरिफ के जरिये यही करने का प्रयास कर रहा है।

    दुनिया की दो बड़ी महाशक्तियों के बीच वर्चस्व की इस जंग का असर पूरे विश्व पर पड़ेगा। कुछ विशेषज्ञ इसे सप्लाई चेन में बड़े बदलाव के साथ मंदी की आशंका भी जता रहे हैं। चीन अमेरिका के बीच व्यापारिक युद्ध विश्व को कैसे प्रभावित करेगा इसकी पड़ताल अहम मुद्दा है?

    भारत पर पड़ेगा मिला- जुला असर

    1. महंगे हो सकते हैं स्मार्टफोन, लैपटॉप और उपकरण

    भारत का मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर चीनी कंपोनेंट पर निर्भर है। विशेष रूप से इलेक्ट्रॉनिक्स में यह निर्भरता अधिक है। बैटरी से लेकर सेमीकंडक्टर और डिस्प्ले पैनल तक सबकुछ चीन से आता है। इसका मतलब है कि आने वाले हफ्तों में स्मार्टफोन लैपटॉप और उपकरण महंगे हो सकते हैं।

    2. फार्मा उत्पादों की बढ़ सकती है लागत

    भारत दवा उत्पादन में अग्रणी देश है। लेकिन दवा बनाने के लिए लगभग 70 प्रतिशत कच्चा माल चीन से आता है। अगर कच्चे माल की आपूर्ति में किसी तरह की बाधा आती है तो इससे न सिर्फ उत्पादन लागत बढ़ेगी बल्कि निर्यात के लिए भेजी जाने वाली खेप पहुंचाने में देरी होगी। वैश्विक जेनरिक दवा बाजार पर इसका बुरा असर पड़ेगा।

    3. स्टील उत्पादकों पर बढ़ेगा दबाव

    स्टील की बात करें तो अमेरिका और यूरोप के बाजारों में निर्यात की गुंजाइश कम हो रही है। ऐसे में चीन के स्टील उत्पादक स्टील भारत जैसे वैकल्पिक बाजारों में डंप करने का प्रयास कर सकते हैं। इससे स्थानीय स्तर पर स्टील की कीमतों में गिरावट आएगी। इससे भारत में स्टील उत्पादकों को नुकसान हो सकता है क्योंकि वह पहले ही मार्जिन के दबाव से जूझ रहे हैं।

    4. आईटी और टेक सर्विस इंडस्ट्री को होगा फायदा

    भारत की आईटी और टेक सर्विस इंडस्ट्री को ट्रेड वार से फायदा हो सकता है। ट्रंप के पहले कार्यकाल में जब चीन और अमेरिका के बीच व्यापार को लेकर तनाव बढ़ा था, उस समय भी ऐसा हुआ था। चीन बढ़ती लागत और अस्थिरता से चिंतित अमेरिकी कंपनियां भारत से आउटसोर्सिंग बढ़ा सकते हैं। खास कर बैकएंड आपरेशंस, सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट और एआई सपोर्ट के लिए।

    5. कृषि उत्पादों के लिए है मौका

    अगर चीन अमेरिका के बाजार में अपने उत्पाद नहीं बेच पाता है तो भारत के लिए मौका बन सकता है। सोयाबीन और कॉटन के बाजार में ऐसा हो सकता है।

    चीन में एडवांस्ड माइक्रोचिप्स की हो सकती है किल्लत

    अमेरिका चीन पर टेक्नोलॉजिकल ब्लाकेड को और कड़ा कर सकता है, जिसकी शुरुआत जो बाइडन प्रशासन ने की थी। इससे चीन को एडवांस्ड माइक्रोचिप्स आयात करने में और कठिनाई हो सकती है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे एप्लिकेशंस के लिए यह बहुत ज़रूरी है। चीन अभी भी इसे खुद नहीं बना सका है।

    किन देशों पर दबाव डाल सकता है अमेरिका?

    अमेरिका चीन को अलग-थलग करने के लिए कंबोडिया, मैक्सिको और वियतनाम समेत अन्य देशों पर ये दबाव डाल सकता है कि अगर वे अमेरिका के साथ व्यापार करना चाहते हैं तो वे चीन से व्यापार न करें।  

    ट्रेड वार का दुनिया पर क्‍या होगा असर?

    अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष यानी आईएमएफ के अनुसार, इस वर्ष कुल वैश्विक अर्थव्यवस्था में अमेरिका और चीन की अर्थव्यवस्था की हिस्सेदारी करीब 43 प्रतिशत है।

    अगर इन दोनों देशों के बीच व्यापक ट्रेड वार छिड़ जाता है तो यह दोनों की विकास दर को धीमा करेगा या यहां तक कि उन्हें मंदी में भी खींच सकता है और इससे पैदा हुई सुस्त वैश्विक विकास दर से अन्य देशों की अर्थव्यवस्थाओं को भी नुकसान पहुंचेगा।

    यह भी पढ़ें- 'आइए और देखिए क्या हाल हो गया हमारा...', पुतिन के हमले से परेशान जेलेंस्की ने ट्रंप को यूक्रेन आने का दिया न्योता

    वैश्विक निवेश पर कैसा पड़ेगा असर?

    वैश्विक निवेश पर भी नकारात्मक असर पड़ेगा। हालांकि और भी संभावित खतरे हैं। चीन दुनिया का सबसे बड़ा मैन्युफैक्चरिंग देश है और वह घरेलू स्तर पर पैदा होने वाली मांग की तुलना में बहुत अधिक उत्पादन करता है। वह रियायतें देकर वस्तुओं के उत्पादन को सस्ता रखता है। स्टील इसका एक उदाहरण है।

    किन देशों में बढ़ेगी बेरोजगारी?

    अमेरिका में ऊंचे टैरिफ की वजह से चीन अपने उत्पाद दूसरे देशों में डंप कर सकता हैं। हालांकि, यह उपभोक्ताओं के लिए फायदेमंद हो सकता है, लेकिन उन देशों के उद्योगों पर इस डंपिंग का बुरा असर पड़ेगा। वहां नौकरियां जाएंगी और बेरोजगारी बढ़ेगी।

    क्‍या अमेरिका पर भी पड़ेगा असर?

    पहले कार्यकाल में ट्रंप ने चीन पर 20 प्रतिशत टैरिफ लगाया था तो अमेरिका में  कीमतें अच्छी खासी बढ़ गई थीं। चीन पर 125 टैरिफ कीमतों को कई गुना बढ़ा सकता है।

    क्‍या टैरिफ वॉर बढ़ा देगा चीन में महंगाई?

    अमेरिका पर जवाबी टैरिफ लगाने से चीन में भी कीमतें बढ़ेंगी और चीन के उपभोक्ताओं पर इसका बोझ पड़ेगा।

    यह भी पढ़ें- टैरिफ पर ट्रंप ने लिया यू-टर्न; चीन बोला- बाघ के गर्दन में लगी घंटी... वही खोल सकता, जिसने बांधा है

    जरूरी धातुओं की सप्लाई बंद कर सकता है चीन

    उद्योगों के लिए जरूरी तांबे से लेकर लिथियम जैसी धातुओं को रिफाइन करने में चीन की मुख्य भूमिका है।

    बीजिंग इन धातुओं को अमेरिका तक पहुंचने में बाधाएं खड़ी कर सकता है। चीन ने जर्मेनियम और गैलियम जैसी दो धातुओं के बारे में ऐसा कर भी दिया है।

    यह भी पढ़ें- Trump ने फिर मारा यू-टर्न; स्मार्टफोन, कंप्यूटर पर अलग से टैरिफ लगाने की तैयारी में ट्रंप प्रशासन