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    Cauvery dispute: "तमिलनाडु को एक साहसी सीएम की है जरूरत...", कावेरी जल विवाद पर तमिल मनीला कांग्रेस ने कहा

    By AgencyEdited By: Babli Kumari
    Updated: Tue, 29 Aug 2023 11:05 AM (IST)

    दक्षिण भारत के दो राज्यों कर्नाटक और तमिलनाडु में कावेरी जल पर काफी लंबे समय से विवाद चल रहा है। इस विवाद पर तमिल मनीला कांग्रेस के महासचिव एएस मुनव्वर बाशा ने राज्य के सीएम पर सवाल उठाते हुए कहा कि राज्य में यह विवाद काफी लंबे समय से चल रहा है और इस विवाद का सुलझ न पाना यह दिखाता है कि राज्य को साहसी सीएम की जरूरत है।

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    कावेरी जल विवाद पर तमिल मनीला कांग्रेस के महासचिव एएस मुनव्वर बाशा ने टिप्पणी की (फाइल फोटो)

    चेन्नई, एजेंसी। Cauvery Water Dispute: कर्नाटक और तमिलनाडु में कावेरी नदी के जल पर लाखों लोग निर्भर हैं। इस नदी को दक्षिण भारत की गंगा कहा जाता है। दोनों ही राज्यों में कावेरी नदी को लेकर कई सालों से विवाद जारी है। कावेरी नदी पर चल रहे विवाद पर तमिल मनीला कांग्रेस के महासचिव एएस मुनव्वर बाशा ने मंगलवार को कहा कि कावेरी विवाद काफी लंबे समय से चल रहा है। इस नदी पर इस तरह का सालों से दो राज्यों का विवाद होना यह दिखाता है कि राज्य में कोई "साहसी" मुख्यमंत्री नहीं है। एएस मुनव्वर बाशा के इस तंज को एमके स्टालिन पर किए गए प्रहार के रूप में देखा जा रहा है।

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    मनीला कांग्रेस के महासचिव एएस मुनव्वर बाशा की यह प्रतिक्रिया कावेरी जल विनियमन समिति (सीडब्ल्यूआरसी) द्वारा कर्नाटक को दो सितंबर तक अगले 15 दिनों के लिए तमिलनाडु को प्रतिदिन 5,000 क्यूसेक पानी छोड़ने का अंतरिम आदेश पारित करने के एक दिन बाद आई है।

    उन्होंने यह भी कहा कि द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) और कांग्रेस के नेतृत्व वाली कर्नाटक सरकार विपक्षी गुट भारत में गठबंधन भागीदार होने के बावजूद, कावेरी का पानी नहीं छोड़ रही है।

    'तमिलनाडु में हमारे पास एक साहसी मुख्यमंत्री नहीं'

    न्यूज एजेंसी एएनआई से बात करते हुए, बाशा ने कहा कि यह यहां के किसानों की जीत है। लेकिन साथ ही, कर्नाटक सरकार निर्देशों का पालन नहीं करेगी क्योंकि तमिलनाडु में हमारे पास एक साहसी मुख्यमंत्री नहीं है। इसीलिए यह (कावेरी मुद्दा) हुआ। अगर वह (एमके स्टालिन) एक साहसी मुख्यमंत्री होते, तो वह बिना किसी आयोग या अदालत के निर्देश के राज्य के लिए पानी जारी करवा चुके होते।"

    उन्होंने आगे कहा, "वे (डीएमके) विपक्षी गुट इंडिया में सहयोगी हैं, लेकिन कर्नाटक सरकार तमिलनाडु को पानी नहीं दे रही है। तमिलनाडु के लोग इंडिया गठबंधन को कैसे वोट देंगे?"

    कर्नाटक सरकार को करना होगा कड़ा संघर्ष

    कर्नाटक में प्रमुख विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी के नेता बसवराज इंगिन ने कहा कि पैनल का आदेश "किसानों को कर्ज के जाल में धकेलने" के अलावा कुछ नहीं है। इंगिन ने आगे कहा "कर्नाटक सरकार को सीडब्ल्यूआरसी का हालिया आदेश किसानों को कर्ज के जाल में धकेलने के अलावा और कुछ नहीं है... जब कर्नाटक में कावेरी के अलावा पानी नहीं है, तो पानी छोड़ने का सवाल ही नहीं उठना चाहिए था... अब कर्नाटक सरकार को कड़ा संघर्ष करना होगा।"

    सालों पुराना है कावेरी नदी का जल विवाद 

    आपको बता दें कि यह मामला दशकों से कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच एक विवादास्पद मुद्दा रहा है और कावेरी नदी के पानी के बंटवारे को लेकर उनके बीच लड़ाई चल रही है। यह नदी इस क्षेत्र के लाखों लोगों के लिए सिंचाई और पीने के पानी का एक प्रमुख स्रोत है।

    केंद्र ने जल-बंटवारे की क्षमताओं के संबंध में तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक और पुडुचेरी के बीच विवादों का निपटारा करने के लिए 2 जून, 1990 को कावेरी जल विवाद न्यायाधिकरण (सीडब्ल्यूडीटी) का गठन किया।

    कावेरी एक अंतरराज्यीय बेसिन है जो कर्नाटक से निकलती है और बंगाल की खाड़ी में गिरने से पहले तमिलनाडु और पांडिचेरी से होकर गुजरती है।