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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Apr 04, 2023 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के सजा घटाने के फैसले को किया रद, कहा- अनुचित सहानुभूति ठीक नहीं

By Jagran NewsEdited By: Piyush Kumar
Published: Tue, 04 Apr 2023 06:38 PM (GMT+05:30)

शीर्ष अदालत ने पाया कि हाई कोर्ट ने यह बिल्कुल नहीं माना था कि भारतीय दंड संहिता (आइपीसी) प्रकृति में ...और पढ़ें

सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के एक फैसले को रद किया।
सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के एक फैसले को रद किया।

नई दिल्ली, पीटीआइ। सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के उस फैसले को रद कर दिया है, जिसमें एक व्यक्ति को उतावलेपन और लापरवाही से गाड़ी चलाकर लोगों की मौत का जिम्मेदार बनने के लिए दी गई सजा को कम कर दिया गया था। सर्वोच्च अदालत का कहना है कि अभियुक्त के लिए 'अनुचित सहानुभूति' दिखाना अस्थिर है।

हाई कोर्ट के फैसले पर शीर्ष अदालत ने उठाए सवाल

शीर्ष अदालत ने पाया कि हाई कोर्ट ने यह बिल्कुल नहीं माना था कि भारतीय दंड संहिता (आइपीसी) प्रकृति में दंडात्मक और निवारक है और मुख्य उद्देश्य और उद्देश्य संहिता के तहत किए गए अपराधों के लिए अपराधियों को दंडित करना है। पीठ ने सजा कम करने के उच्च न्यायालय के फैसले को रद्द कर दिया और निचली अदालत द्वारा लगाई गई सजा को बहाल कर दिया।

हाई कोर्ट ने सजा किया था कम

अपील की अनुमति देते हुए उसने अभियुक्त को शेष सजा काटने के लिए आत्मसमर्पण करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया। शीर्ष अदालत ने पंजाब राज्य द्वारा हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर अपील पर अपना फैसला सुनाया, जिसमें आइपीसी की धारा 304-ए (उतावलेपन और लापरवाही से मौत का कारण) के तहत अपराध के लिए एक आरोपित की सजा को बरकरार रखते हुए उसे कम कर दिया गया था।

हाई कोर्ट ने अपराध की गंभीरता पर नहीं किया विचार

हाई कोर्ट ने दो साल की सजा को घटाकर आठ महीने कर दिया था। मृतक के परिवार को भुगतान किए जाने वाले मुआवजे के लिए 25 हजार रुपये की पूर्व जमा राशि भी इसमें शामिल है।जस्टिस एमआर शाह और सीटी रविकुमार की पीठ ने 28 मार्च के अपने फैसले में कहा कि उच्च न्यायालय ने सजा को कम करते समय अपराध की गंभीरता पर विचार नहीं किया था और जिस तरह से अभियुक्त ने जल्दबाजी और लापरवाही से एसयूवी चलाकर इसे अंजाम दिया था।

साल 2012 की है घटना

जिससे एक व्यक्ति की मौत हो गई और एंबुलेंस में सवार दो अन्य घायल हो गए। सड़क दुर्घटना जनवरी 2012 में हुई थी जब आरोपित द्वारा चलायी जा रही एक एसयूवी ने चंडीगढ़ से मोहाली की ओर आ रही एक एंबुलेंस को टक्कर मार दी थी।

शीर्ष अदालत के एक पिछले फैसले का उल्लेख करते हुए, पीठ ने कहा कि यह देखा गया था कि शीर्ष अदालत ने बार-बार मोटर वाहन दुर्घटनाओं के लिए जिम्मेदार अपराधियों को सख्ती से दंडित करने की आवश्यकता पर जोर दिया है।

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