SC का NCTE से सवाल, पूछा- क्या स्पेशल एजूकेटर के लिए भी TET है जरूरी? नियुक्ति पर लगाई रोक
सुप्रीम कोर्ट ने एनसीटीई से पूछा है कि क्या स्पेशल एजुकेटर की नियुक्ति के लिए टीईटी अनिवार्य है। कोर्ट ने यह भी आदेश दिया है कि टीईटी के बिना किसी भी स्पेशल एजुकेटर की नियुक्ति नहीं की जाएगी। कोर्ट ने एनसीटीई को स्थिति स्पष्ट करने का निर्देश दिया है और सभी राज्यों से टीईटी के बिना शुरू की गई चयन प्रक्रिया के नोटिफिकेशन पेश करने को कहा है। दिल्ली सरकार ने दो सप्ताह में मेरिट लिस्ट प्रकाशित करने का आश्वासन दिया है।
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SC का NCTE से सवाल पूछा- क्या स्पेशल एजूकेटर के लिए भी TET है जरूरी (फाइल फोटो)
जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में अब स्पेशल एजूकेटर (विशेष जरूरत वाले बच्चों को पढ़ाने वाले शिक्षक) की नियुक्ति में भी टीईटी (शिक्षक पात्रता परीक्षा) का पेच दिखता नजर आ रहा है। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल काउंसिल फार टीचर एजूकेशन (एनसीटीई) से इस पर स्पष्टता मांगी है।
कोर्ट ने एनसीटीई से पूछा है कि क्या स्पेशल एजूकेटर के लिए भी टीईटी जरूरी है। एनसीटीई से इस बारे में कानूनी स्थिति स्पष्ट करने को कहा है। इसके साथ ही कोर्ट ने आदेश दिया है कि किसी भी स्पेशल एजूकेटर्स की नियुक्ति टीईटी के के बगैर नहीं की जाएगी। कोर्ट इस मामले में दो दिसंबर को फिर सुनवाई करेगा।
कौन-सी योग्यता है जरूरी?
न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और जस्टिस आगस्टिन जार्ज मसीह की पीठ ने रजनीश कुमार पांडेय बनाम केंद्र सरकार के मामले में सुनवाई करते हुए हाल ही में ये आदेश दिये। यह मामला स्पेशल एजूकेटर की भर्ती से संबंधित था जिसमें कोर्ट अपने पूर्व के आदेश के अनुपालन पर विचार कर रहा था।
सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश वकील ने कोर्ट को बताया कि नियम के मुताबिक प्राथमिक शिक्षक के लिए टीईटी तो न्यूनतम योग्यता है। पीठ ने कहा कि उसे तो अभी तक यही लगता था कि सुप्रीम कोर्ट का जो सात मार्च 2025 का एक अन्य पीठ का फैसला है जिसके अनुपालन पर विचार हो रहा है, उसके मुताबिक स्पेशल एजूकेटर की नियुक्ति के लिए रिहेबिलिटेशन काउंसिल आफ इंडिया (आरसीआइ) की योग्यता ही जरूरी है।
सुनवाई के दौरान न्यायमित्र रिषि मल्होत्रा ने कोर्ट का ध्यान 21 जुलाई 2022 के आदेश की ओर खींचा जिसमें शिक्षा मंत्रालय के 10 जून 2022 के सर्कुलर पर चर्चा की गई थी जिसमें सीटीईटी या टीईटी या एनटीए स्कोर के साथ साथ क्लासरूम डिमोंस्ट्रेशन और इंटरव्यू को प्रोसेस का हिस्सा माना गया था।
कोर्ट ने क्या कहा?
इन दलीलों पर पीठ ने कहा कि कई राज्यों ने स्पेशल एजूकेटर्स की भर्ती की प्रक्रिया यह मानकर आगे बढ़ाई है कि आरसीआइ ही स्पेशल एजूकेटर के लिए एकमात्र जरूरी योग्यता है और उन राज्यों ने टीईट को जरूरी योग्यता का मानक नहीं बताया है।
कोर्ट ने कहा कि इस संबंध में एनसीटीई को स्थिति स्पष्ट करने की जरूरत है। एनसीटीई को ये स्पष्ट करना होगा कि इस संबंध में आज की तारीख में क्या विधायी नियम कानून हैं। कोर्ट ने पूछा कि क्या स्पेशल एजूकेटर के लिए टीईटी करना जरूरी है। यदि हां तो क्या इस आवश्यकता के बारे में व्यापक प्रचार किया गया या नहीं।
कोर्ट ने स्थिति स्पष्ट करने के लिए एनसीटीई को पक्षकार बनाने के लिए नोटिस जारी किया और मामले को दो दिसंबर को फिर सुनवाई पर लगाने का आदेश दिया है। इसके साथ ही कोर्ट ने न्यायमित्र से कहा है कि वे उन सभी राज्यों के नोटिफिकेशन इकट्ठा करके पेश करें जिनमें टीईटी के बिना चयन प्रक्रिया शुरू की गई है।
दिल्ली सरकार ने क्या भरोसा दिलाया?
शीर्ष अदालत ने इसके साथ ही अंतरिम आदेश दिया जिसमें कहा कि किसी भी अभ्यर्थी को स्पेशल एजूकेटर के तौर पर तब तक नहीं नियुक्ति किया जाएगा जबतक कि उसके पास टीईटी योग्यता न हो। पीठ के समक्ष यह मुद्दा भी उठा कि दिल्ली सरकार ने जुलाई 2022 और जुलाई 2023 में जारी भर्ती विज्ञापन चयन प्रक्रिया का रिजल्ट अभी तक प्रकाशित नहीं किया है।
दिल्ली सरकार ने कोर्ट को भरोसा दिलाया कि दो सप्ताह में मेरिट लिस्ट पब्लिश कर दी जाएगी। पीठ ने अगली सुनवाई पर लिस्ट पेश करने का आदेश देते हुए मामले को दो दिसंबर को फिर लगाने का आदेश दिया।
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