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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 09, 2019 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

भारत के सुप्रीम कोर्ट ने रच दिया है इतिहास, अयोध्‍या पर सामने आया ऐतिहासिक फैसला

By Kamal VermaEdited By:
Published: Sat, 09 Nov 2019 12:36 PM (IST)Updated: Sat, 09 Nov 2019 12:46 PM (IST)

भारत की सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्‍या मामले पर अपना ऐतिहासिक फैसला सुना दिया है। इसके साथ ही वर्षों पुराना मामले का पटाक्षेप हो गया है।

भारत के सुप्रीम कोर्ट ने रच दिया है इतिहास, अयोध्‍या पर सामने आया ऐतिहासिक फैसला
भारत के सुप्रीम कोर्ट ने रच दिया है इतिहास, अयोध्‍या पर सामने आया ऐतिहासिक फैसला

नई दिल्‍ली [जागरण स्‍पेशल]। 9/11 का जिक्र जहन में आते ही अमेरिका में हुए सबसे बड़े आतंकी हमले का जिक्र शुरू हो जाता है। इस दिन को अमेरिकी इतिहास का सबसे बुरा दिन कहा जाता है। लेकिन भारत के लिए 9/11 का एक सुखद अहसास के साथ भारत के इतिहास में दर्ज हो गया है। वर्षों पुराने अयोध्‍या मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने अपना ऐतिहासिक फैसला सुना दिया है। फैसले के साथ ही अब इस विवाद का भी पटाक्षेप हो गया है। यह पूरा फैसला 1045 पेज का है। 

फैसले में ये रहा खास 

अपने इस फैसले में कोर्ट ने रामलला विराजमान को इस जमीन का मालिक घोषित करते हुए कहा कि एक ट्रस्‍ट का गठन कर मंदिर बनाने की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है। इसके अलावा कोर्ट ने सुन्‍नी वक्‍फ बोर्ड को 5 एकड़ जमीन मुहैया करवाने का भी आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि यह जमीन कहां दी जाएगी इसको उत्‍तर प्रदेश की सरकार तय करेगी। आपको बता दें कि यह पूरा मामला 2.77 एकड़ की विवादित जमीन का था। जबकि कोर्ट ने दूसरे पक्ष की भावनाओं का सम्‍मान करते हुए उन्‍हें इससे कहीं अधिक बड़ी भूमि मुहैया करवाने का आदेश दिया है। 

निर्मोही अखाड़ा और शिया बोर्ड की याचिका खारिज 

अपने इस ऐतिहासिक फैसले में कोर्ट ने निर्मोही अखाड़ा और शिया बोर्ड की याचिका खारिज कर दिया। निर्मोही अखाड़े ने अपनी याचिका में विवादित जमीन का कब्‍जा और प्रबंधन का अधिकार मांगा था। हालांकि कोर्ट ने मंदिर के निर्माण के लिए बनने वाले न्‍यास में उन्‍हें शामिल किया गया है। वहीं शिया बोर्ड ने अपनी याचिका में कहा था कि यहां पर स्थित मस्जिद शिया समुदाय ने बनाई थी लिहाजा इसको सुन्‍नी बोर्ड को नहीं दिया जा सकता है।सुप्रीम कोर्ट का फैसला इस लिहाज से भी बेहद खास है क्‍योंकि 2010 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने निर्मोही अखाड़ा को एक तिहाई जमीन का मालिक बनाया था। 

कोर्ट ने मानी ये बातें

सुप्रीम कोर्ट ने माना कि बाबर के समय में उसके करीबी मीर बाकी ने ही मस्जिद बनवाई थी। इसमें 22-23 दिसंबर 1949 की रात को मूर्तियां रखी गईं। सुप्रीम कोर्ट ने माना कि बाबरी मस्जिद का निर्माण खाली जमीन पर न होकर मंदिर था। कोर्ट ने एएसआई की रिपोर्ट को सही माना है। कोर्ट ने एएसआई की रिपोर्ट को बड़ा सुबूत माना है। सुप्रीम कोर्ट ने यह माना है कि इसमें कोई विवाद नहीं है कि भगवान राम का जन्‍म अयोध्‍या में हुआ था। अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने विवादित ढांचे को गिराए जाने की घटना को गलत बताया। 

ऐतिहासिक फैसला

कोर्ट का यह फैसला इसलिए भी ऐतिहासिक रहा क्‍योंकि यह एकमत से लिया गया। पांच जजों की पीठ में शामिल किसी भी जज का फैसला अलग नहीं था। कोर्ट ने बेहद स्‍पष्‍टतौर पर कहा कि विवादित जमीन केवल आस्‍था की वजह से किसी को नहीं सौंपी है बल्कि इसके ठोस सुबूत हैं। कोर्ट ने यह भी माना कि मुस्लिम पक्ष विवादित जमीन पर एकाधिकार का दावा साबित करने में  नाकाम रहा है। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा कि दस्तावेजों के आधार पर कहा कि 1885 से पहले हिंदू विवादित ढांचे के बाहरी अहाते में स्थित राम चबूतरा और सीता रसोई में पूजा करते थे। 

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