छात्रों की खुदकुशी के मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने लिया बड़ा एक्शन, बना दी नेशनल टास्क फोर्स; पढ़ें कैसे काम करेगा NTF?
शैक्षणिक संस्थानों और कोचिंग हॉस्टल में बढ़ते स्टूडेंट्स की खुदकुशी के मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जाहिर की। IIT दिल्ली में दो छात्रों की मौत के मामले पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज की अगुवाई में एक टास्क फोर्स गठित कर दी है। टास्क फोर्स एक व्यापक रिपोर्ट तैयार करेगा जिसमें छात्रों द्वारा आत्महत्या करने के प्रमुख कारणों की पहचान की जाएगी।

एएनआई, नई दिल्ली। देश के बड़े-बड़े शैक्षणिक संस्थानों और कोचिंग हॉस्टल में बढ़ते स्टूडेंट्स की खुदकुशी के मामले (Suicide Cases In India) पर सर्वोच्च न्यायालय ने चिंता जाहिर की। कोर्ट ने कैंपस में छात्रों की सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज की अगुवाई में एक नेशनल टास्क फोर्स (National Task Force) गठित कर दी है।
जस्टिस जेबी पारदीवाला की बेंच ने कहा कि पिछले दो महीने में कॉलेज के हॉस्टल में यौन शोषण और अन्य मामलों की वजह से छात्र खुदकुशी कर चुके हैं। 19 मार्च को गुजरात के लॉ यूनिवर्सिटी में स्टूडेंट की खुदकुशी के मामले का भी जिक्र किया। बेंच में शामिल जस्टिस आर महादेवन ने कहा,"हमें सुसाइड के पैटर्न पर चर्चा करनी चाहिए। हमें इस बात की चिंता है कि बहुत सारे छात्र भेदभाव, रैगिंग और यौन शोषण की वजह से जान दे देते हैं।"
आत्महत्या के कारणों की पहचान करेगा टास्क फोर्स: कोर्ट
कोर्ट के आदेश में कहा गया है कि पूर्व सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति एस रवींद्र भट टास्क फोर्स के अध्यक्ष होंगे, जबकि महिला और बाल विकास मंत्रालय के अलावा किसी राज्य के उच्च शिक्षा विभाग, सामाजिक न्याय और अधिकारिता तथा कानूनी मामलों के सचिव इसके सदस्य होंगे।
पीठ ने कहा कि टास्क फोर्स एक व्यापक रिपोर्ट तैयार करेगा, जिसमें छात्रों द्वारा आत्महत्या करने के प्रमुख कारणों की पहचान, मौजूदा नियमों का विश्लेषण और सुरक्षा को मजबूत करने के लिए सिफारिशें शामिल होंगी।
टास्क फोर्स को अदालत ने दी विशेष ताकत
अदालत ने कहा कि अपनी रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया में टास्क फोर्स के पास किसी भी उच्च शिक्षण संस्थान का औचक निरीक्षण करने का अधिकार होगा। चार महीने के भीतर टास्क फोर्स एक अंतरिम रिपोर्ट पेश करेगा, जबकि अंतिम रिपोर्ट अधिमानतः आठ महीने के भीतर दायर की जाएगी।
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने अनुसूचित जाति वर्ग से संबंधित दो छात्रों के माता-पिता द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश सुनाया है। इन छात्रों की मौत IIT दिल्ली मे हुई थी। छात्रों के माता-पिता ने अपनी याचिका में एफआईआर दर्ज करने और एक केंद्रीय एजेंसी से इन मौतों की जांच की मांग की है। इस याचिका को दिल्ली हाईकोर्ट ने 2024 में खारिज कर दिया था।
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