नई दिल्ली [जागरण स्पेशल]। जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में सीआरपीएफ (CRPF) काफिले पर हुए आतंकी हमले में एक और सनसनीखेज जानकारी सामने आई है। स्थानीय पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों को पता चला है कि सीआरपीएफ काफिले पर कायराना आत्मघाती हमला करने वाला 21 वर्षीय आदिल अहमद डार तीन आतंकी संगठनों से जुड़ा हुआ था। इससे पहले भी वह देश विरोधी गतिविधियों में लिप्त रहा था।

स्थानीय पुलिस के हवाले से मीडिया में चल रही खबरों के अनुसार आदिल अहमद डार का पत्थरबाज के तौर पर पुराना इतिहास रहा है। उसके खिलाफ पहले से कई मामले दर्ज हैं। आदिल अहमद डार, हमले वाली जगह से करीब 10 किलोमीटर की दूरी पर गुंडीबाग (Gundibagh) में रहता था। वह स्कूल ड्रापआउट था, उसने मार्च 2017 में 12वीं की बोर्ड परीक्षा बीच में ही छोड़ दी थी।

इसके बाद वह संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हो गया था। इसके बाद वर्ष 2018 में उसके लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मुहम्मद और हिजबुल मुजाहिदीन के संदिग्ध आतंकियों के साथ देखे जाने की खबरें आयी थीं। आदिल अहमद डार ने 14 फरवरी 2019 की दोपहर पुलवामा में सीआरपीएफ काफिले पर हमला विस्फोटकों से लदी कार से आत्मघाती हमला किया था। इस हमले में सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हो गए हैं, जबकि कई घायल हैं।

हमले के बाद जैश ने जारी किया था आदिल का वीडियो
इस हमले के ठीक बाद जैश-ए-मुहम्मद ने हमले की जिम्मेदारी लेते हुए आदिल अहमद डार का एक वीडियो भी जारी किया था। वीडियो में आदिल ऑटोमैटिक हथियारों और विस्फोटकों के साथ सैनिक वर्दी में दिख रहा है। इस वीडियो में आदिल कह रहा है, ‘मैनें एक साल पहले जैश-ए-मुहम्मद ज्वाइन किया था। एक साल के इंतजार के बाद मुझे वह काम करने का मौका मिला है, जिसके लिए मैं जैश में भर्ती हुआ था। जब तक आप लोगों तक ये वीडियो पहुंचेगा, मैं स्वर्ग पहुंच चुका होउंगा। कश्मीर की जनता के लिए ये मेरा अंतिम संदेश है।’

इन तीन आतंकी संगठनों के संपर्क में था आदिल
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार आदिल ने ये हमला भले ही पाकिस्तान से संचालित होने वाले आतंकी संगठन जैश-ए-मुहम्मद के इशारे पर किया हो, लेकिन लश्कर-ए-तैयबा और हिजबुल मुजाहिदीन जैसे आतंकी संगठनों से भी उसके तार जुड़े रहे हैं। आतंकी संगठन में शामिल होने से पहले भी वह कश्मीर के पत्थरबाजों के गिरोह में शामिल रह चुका था।

आदिल का चचेरा भाई भी था आतंकवादी
आदिल अहम डार के गांव के कुछ लोगों ने मीडिया को बताया है कि आदिल अहमद डार का चचेरा भाई समीर अहमद भी आतंकवादी था। वह भी आतंकी संगठन जैश-ए-मुहम्मद का सक्रिय सदस्य था। समीर ने कश्मीर विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई छोड़कर आतंकवाद की राह अपनाई थी। बताया जाता है कि वह सुरक्षा बलों संग मुठभेड़ में मारा गया। इसके बाद ही आदिल ने आतंकवाद की राह पकड़ ली थी। स्थानीय पुलिस के अनुसार आदिल सी कैटेगरी का आतंकवादी था। वह सबसे पहले जाकिर मूसा (Zakir Musa) के गजवत-उल-हिंद (Gazwat-ul-Hind) में शामिल हुआ था।

गांव में छोटी सी दुकान चलाते हैं पिता
आतंकवादी बनने से पहले वह एक स्थानीय मिल में काम किया करता था। उसके पिता गुलाम हसन डार अपने गांव गुंडीबाग (Gundibagh) में एक छोटी सी दुकान चलाते हैं। बताया जाता है कि जैश-ए-मुहम्मद द्वारा आत्मघाती हमलावर के तौर पर भर्ती किया गया आदिल अहमद डार तीसरा स्थानीय युवक था। उससे पहले भी जैश-ए-मुहम्मद दो स्थानीय युवकों को आत्मघाती हमलावर बना चुका है।

पिता ने कही थी ये बात
समाचार एजेंसी रॉयटर से बातचीत में आदिल के पिता गुलाम हसन डार ने दावा किया था कि वर्ष 2016 में आदिल अपने दोस्त संग स्कूल से वापस लौट रहा था। रास्ते में सुरक्षा बलों ने उन्हें रोक लिया था। सुरक्षा बलों ने पत्थरबाजी के संदेह में आदिल की पिटाई की थी। उनका आरोप है कि इसके बाद से ही आदिल के मन में सुरक्षा बलों के लिए काफी गुस्सा भर गया था। इसके बाद उनका बेटा आतंकी संगठन में शामिल हो गया था। हालांकि, आदिल के माता-पिता का दावा है कि उन्हें इस हमले के बारे में पहले से कोई जानकारी नहीं थी।

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Posted By: Amit Singh

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