नई दिल्ली [जागरण स्पेशल]। समय के साथ स्पाइन सर्जरी में महत्वपूर्ण बदलाव हुए हैं। हाल के वर्षों में यह सर्जरी काफी सुरक्षित हो गई है और इसके परिणाम भी बेहतर हैं। इसके बावजूद आज भी तमाम लोग स्पाइन सर्जरी को लेकर भयभीत हो जाते हैं और वहीं वे इसे लेकर गलतफहमियों से भी ग्रस्त हैं। इसका एक प्रमुख कारण है कि लोगों को स्पाइन सर्जरी के संदर्भ में जागरुक नहीं किया गया है। दूसरा कारण, देश में स्पेशलाइज्ड स्पाइनल सर्जरी सेंटर्स की कमी है।

मिथ 1: सर्जरी के बाद भी कमर दर्द ठीक नहीं होता।
फैक्ट: कमर दर्द का सही कारण पता लगाना महत्वपूर्ण है। अधिकतर मामलों में कमर दर्द की समस्या सही डायग्नोसिस और उपयुक्त सर्जरी से ठीक हो जाती है। स्पाइन सर्जरी की सफलता सर्जरी का उपयुक्त समय और नवीनतम तकनीकों के उचित इस्तेमाल पर निर्भर करती है।

मिथ 2: स्पाइन सर्जरी के परिणाम अच्छे नहीं मिलते हैं या सर्जरी से पीड़ित व्यक्ति की समस्या और बढ़ जाती है।
फैक्ट: अधिकतर मरीज जो स्पाइन सर्जरी करा चुके हैं, उनके अनुभव सकारात्मक होते हैं। दुर्भाग्य से जिन लोगों को सर्जरी के बाद कुछ समस्याएं होती हैं, उनकी इतनी अधिक चर्चा होती है कि अधिकतर मामलों में जो सकारात्मक परिणाम मिलते हैं, वे भी दब जाते हैं। स्पाइन सर्जरी अब बहुत सुरक्षित है और इसके परिणाम तुलनात्मक रूप से उतने ही बेहतर आते हैं जितने दूसरी सर्जरियों के। अन्य सर्जरियों की तरह स्पाइन सर्जरी की सफलता दर लगभग 95 प्रतिशत से अधिक है।

मिथ 3: स्पाइन सर्जरी के बाद स्वास्थ्य लाभ होने में काफी समय लगता है।
फैक्ट: पिछले कुछ वर्षों में मिनिमली इनवेसिव प्रोसीजर्स (कम से कम चीरफाड़ वाली प्रक्रियाएं) में काफी सुधार हुआ है। इसलिए अब आमतौर पर पारंपरिक ओपन सर्जरियों की तुलना में मिनिमली इनवेसिव सर्जरी को प्राथमिकता दी जा रही है। मिनिमली इनवेसिव प्रोसीजर्स में बहुत छोटे चीरे लगाए जाते हैं, इससे रिकवर होने में भी कम समय लगता है। अधिकतर मरीज, स्पाइन सर्जरी के बाद कुछ ही घंटों में चलना शुरू कर सकते हैं। यहां तक कि कुछ मरीज तो ऑपरेशन वाले दिन ही वापस घर लौट सकते हैं। मिनिमली इनवेसिव प्रक्रियाओं में अधिक दिनों तक अस्पताल में रुकने की आवश्यकता नहीं होती है और संक्रमण की चपेट में आने का खतरा भी कम होता है। ऐसी प्रक्रियाओं में निशान भी ज्यादा नहीं पड़ते हैं, रक्तस्राव भी कम होता है और टिश्यूज को अधिक नुकसान भी नहीं पहुंचता है।

मिथ 4: अगर मैं एक सर्जरी करा लूं तो दूसरी सर्जरी की भी आवश्यकता पड़ सकती है।
फैक्ट: अधिकतर मरीज एक सर्जरी के बाद ही पूरी तरह ठीक हो जाते हैं और उन्हें दूसरी सर्जरी की आवश्यकता नहीं पड़ती है। केवल बहुत जटिल मामलों में एक से अधिक बार सर्जरी की जरूरत पड़ती है।

मिथ 5: लंबे समय तक बेड रेस्ट करना कमर दर्द का बेहतरीन इलाज है।
फैक्ट: कमर दर्द में बहुत ही कम बेड रेस्ट की सलाह दी जाती है। कई अध्ययनों से यह बात सामने आई है कि लंबे समय तक बेड रेस्ट करना स्पाइन की मांसपेशियों को कमजोर बना देता है, जिससे कमर दर्द और अधिक बढ़ सकता है। जितनी जल्दी संभव हो सके, दैनिक गतिविधियों में सक्रिय हो जाएं और कमर की मांसपेशियों को शक्तिशाली बनाने के लिए नियमित रूप से हल्की-फुल्की एक्सरसाइज करना शुरू कर दें।

मिथ6: स्पाइन फ्रैक्चर से संबंधित ऑस्टियोपोरोसिस का इलाज है।
फैक्ट: ऑस्टियोपोरोसिस से संबंधित स्पाइन फ्रैक्चर्स भी मिनिमली इनवेसिव सर्जरियों जैसे वर्टिब्रोप्लास्टी और काइफोप्लास्टी की तकनीकों से ठीक हो जाते हैं। ऐसे फ्रैक्चर में इन तकनीकों के जरिए हड्डियों में बोन सीमेंट इंजेक्ट किए जाते हैं। इस तकनीक में बेड रेस्ट की आवश्यकता नहीं पड़ती है और आमतौर पर कमर दर्द से शीघ्र राहत मिल जाती है।

रीढ़ की हड्डी और गर्दन को स्वस्थ रखने के टिप्स
रीढ़ की हड्डी हमारे शरीर का महत्वपूर्ण अंग है। इसमें किसी प्रकार की समस्या होने से हम सहज महसूस नहीं करते हैं। रीढ़ की हड्डी और गर्दन में होने वाली समस्या के कई कारण हो सकते हैं। बढ़ता वजन या फिर मोटापा होने से रीढ़ की हड्डी पर काफी असर डालता है। यही नहीं जो लोग धूम्रपान करते हैं या फिर पीठ के सहारे भारी चीज उठाते हैं, उन्हें भी रीढ़ की हड्डी में समस्या होती है।

गर्म पट्टी प्रयोग करें
जकड़न को दूर करने के लिए गर्दन और पीठ पर गर्म पट्टी प्रयोग करें गर्दन और पीठ पर गर्म पट्टी प्रयोग करने से कसी हुई मांसपेशियाँ ढीली होंगी और जकड़न से छुटकारा मिलेगा।

पानी में सेंधा नमक मिलाकर नहाएं
पूरे दिन काम करने के बाद गर्म पानी में 1-2 कप सेंधा नमक मिलाकर स्नान करने से ना केवल तनाव दूर होता है बल्कि यह जकड़न भी दूर करता है। यह तनाव और जकड़न को कम करने में मदद करता है जो कि दोनों ही पीठ दर्द के मुख्य कारण हैं।

सही मुद्रा में उठे-बैठें
शरीर को सही मुद्रा में बनाये रखने से पीठ दर्द को कम करने में मदद मिलती है और यह भविष्य में होने वाले पीठ दर्द को भी रोकता है। इसके आलावा शरीर का सही हाव भाव और मुद्रा आपको अच्छा और कॉंफिडेंट दिखाने में भी मदद करता है। अपने हाव भाव का ध्यान रखना एक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण की भांति है जो कि आपके हाव भाव को सही रखता है और आपको सजग रखता है।

काम के बीच में ब्रेक लें
यदि आपका ऑफिस जॉब है जहाँ आपको कंप्यूटर के सामने कई घंटों तक बैठना पड़ता है तो यह जरूरी है कि आप नियमित अन्तराल से ब्रेक लें इससे शरीर के लगातार बैठने पर अभ्यास पर ब्रेक लगेगा। यह सलाह दी जाती है कि आप काफी मात्रा में पानी पियें जिससे आपको बार - बार बाथरूम जाना पड़ेगा जो कि अच्छा है, इसके आलावा खाने के बाद एक छोटी वाक पर जाएँ , और ऑफिस में दूसरी तरफ बैठे अपने दोस्त के पास एक चक्कर लगा आयें।

Posted By: Sanjay Pokhriyal

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