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    आपको यह पता लगाने में 23 साल लग गए कि आपकी जमीन पर कब्जा हो गया- सुप्रीम कोर्ट

    Updated: Mon, 05 Jan 2026 11:36 PM (IST)

    सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड सरकार को हजारों हेक्टेयर वन भूमि पर अवैध कब्जे के खिलाफ कार्रवाई न करने पर फटकार लगाई। कोर्ट ने 2000 से 23 साल तक निष्क्रिय ...और पढ़ें

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    सुप्रीम कोर्ट। (फाइल) 

    डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को उत्तराखंड सरकार से पूछा कि उसने हजारों हेक्टेयर वन भूमि पर कब्जा करने वालों के खिलाफ क्या कार्रवाई की है और अधिकारियों के मूक दर्शक बने रहने पर उनकी आलोचना की।

    चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जोयमाल्या बागची की पीठ ने कहा, ''जो बात हमें चौंकाने वाली लगती है, वह यह है कि उत्तराखंड सरकार और उसके अधिकारी अपनी आंखों के सामने वन भूमि पर व्यवस्थित तरीके से कब्जा होते देख रहे हैं और चुपचाप बैठे हैं।''

    चीफ जस्टिस ने सरकारी वकील से सवाल किया कि 'वर्ष 2000 से आपको यह पता लगाने में 23 साल लग गए कि आपकी जमीन पर कब्जा हो गया है।''

    पीठ सरकार और अधिकारियों के खिलाफ अनीता कांडपाल की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इसने राज्य सरकार से दो हफ्ते के अंदर एक विस्तृत जवाबी हलफनामा दाखिल करने को कहा जिसमें साइट प्लान भी शामिल हो, और राज्य में वन भूमि पर हुए अवैध निर्माणों की अनुमानित जानकारी दी जाए ताकि यह तय किया जा सके कि क्या आगे और गहन जांच जरूरी है।

    चीफ जस्टिस ने कहा, ''राज्य में एग्जीक्यूटिव पद पर बैठे हर व्यक्ति लगातार एवं स्पष्ट दिख रही लापरवाही के लिए जवाबदेह है।'' पहाड़ी जिलों में संरक्षित जमीन पर अवैध कब्जे का मामला पीठ के सामने तब आया जब उसने वन भूमि पर अवैध कब्जे का खुद संज्ञान लिया। सुनवाई के दौरान राज्य की ओर से पेश वकील ने कहा कि एक अंतरिम रिपोर्ट फाइल की गई है, और चूंकि 1950 के डाक्यूमेंटेशन की जरूरत थी, इसलिए सरकार ने कुछ दस्तावेज देने के लिए उत्तर प्रदेश को भी पत्र लिखा है।

    पीठ ने कहा, ''पहले, आप अपने बर्ताव के बारे में बताएं। आपका गठन 2000 में हुआ था (उत्तराखंड को साल 2000 में उत्तर प्रदेश के उत्तर-पश्चिमी हिस्से से अलग करके बनाया गया था)। उसके बाद आपने क्या किया? नहीं तो, हम आप में से हर एक से जवाबदेही पूछेंगे। आप लोगों को उनके घर बनाने देते हैं, आप उनकी पीढि़यों को वहां रहने देते हैं और फिर अचानक सिर्फ कोर्ट के आदेश की वजह से आप उसकी आड़ में छिपना चाहते हैं..जब कोर्ट सवाल कर रहा है।''

    इस पर वकील ने कहा कि राज्य ने कथित कब्जा करने वालों को बेदखली के नोटिस जारी किए हैं। चीफ जस्टिस ने जवाब दिया, ''तो वर्ष 2000 से आपको यह पता लगाने में 23 साल लग गए कि आपकी जमीन पर कब्जा हो गया है।''

    पीठ ने आगे कहा, ''हम आपके हर अधिकारी को जवाबदेह ठहराएंगे। भगवान जानता है कि कब्जा करने वाले कौन हैं, वे किस राजनेता या किस प्राधिकारी या कौन से प्रभावशाली लोगों के साथ मिले हुए हैं।''

    गौरतलब है कि 22 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट ने अधिकारियों को ''मूक दर्शक'' बने रहने के लिए फटकार लगाई थी, जबकि उनकी आंखों के सामने प्राइवेट संस्थाओं द्वारा बड़े पैमाने पर अतिक्रमण और वन भूमि पर अवैध कब्जा किया जा रहा था।

    कोर्ट ने उत्तराखंड में वन भूमि पर अतिक्रमण और अवैध कब्जे के मामले में खुद ही संज्ञान लेते हुए एक मामला शुरू किया था और मुख्य सचिव तथा प्रधान मुख्य वन संरक्षक को एक जांच समिति बनाने और रिपोर्ट जमा करने का निर्देश दिया था।

    (समाचार एजेंसी एएनआई के इनपुट के साथ)