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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 19, 2023 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

SC ने 16-18 साल की उम्र में सहमति से यौन संबंध को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र से मांगा जवाब

By AgencyEdited By: Achyut Kumar
Published: Sat, 19 Aug 2023 03:49 PM (IST)

सुप्रीम कोर्ट ने वैधानिक दुष्कर्म कानूनों को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र को नोटिस जारी किया है जो 16 ...और पढ़ें

SC ने 16-18 साल की उम्र में सहमति से सेक्स को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र से जवाब मांगा
SC ने 16-18 साल की उम्र में सहमति से सेक्स को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र से जवाब मांगा

HighLights

  1. SC ने 16-18 साल की उम्र में सहमति से सेक्स को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र से मांगा जवाब
  2. याचिकाकर्ता ने पहले दिल्ली हाई कोर्ट का खटखटाया था दरवाजा
  3. वकील हर्ष विभोर सिंघल ने दायर की याचिका

नई दिल्ली, एएनआई। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने 16 से 18 साल की उम्र के बीच सहमति से यौन संबंध को अपराध मानने वाले वैधानिक दुष्कर्म कानूनों को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र को नोटिस जारी किया है। भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने केंद्र को नोटिस जारी कर याचिका पर जवाब देने को कहा।

किसने दायर की याचिका?

याचिकाकर्ता हर्ष विभोर सिंघल एक वकील हैं। उन्होंने अपनी जनहित याचिका में वैधानिक दुष्कर्म कानूनों को चुनौती दी है, जो शारीरिक, जैविक, मनोवैज्ञानिक और सामाजिक क्षमता रखने वाले 16 से 18 साल के बच्चों के बीच सहमति से यौन संबंध बनाने को अपराध मानते हैं।

किशोरों के खिलाफ आपराधिक प्रतिबंध अनुचित

याचिका में कहा गया है कि यह याचिकाकर्ता का मानना है कि सहमति से गैर-शोषणकारी यौन गतिविधि के लिए किशोरों के खिलाफ आपराधिक प्रतिबंध अनुचित हैं। 18 वर्ष से कम उम्र के व्यक्तियों से जुड़ा यौन संबंध वास्तव में सहमति से हो सकता है, भले ही कानून में न हो। इसलिए, आपराधिक कानून को लागू करने से ऐसे व्यक्तियों के अधिकारों और क्षमता को प्रतिबिंबित करना चाहिए, ताकि वे सहमति से यौन संबंध बनाने के बारे में निर्णय ले सकें।

दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा- सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएं

याचिकाकर्ता ने कहा कि उन्होंने इस विषय पर दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है, लेकिन हाई कोर्ट ने कहा कि उनके पास सहमति से यौन संबंध के लिए दिशानिर्देश तय करने की शक्ति नहीं है और यह सबसे अच्छा है कि याचिकाकर्ता सुप्रीम कोर्ट जाएं।

शीर्ष अदालत में अपनी याचिका में, याचिकाकर्ता ने विशाखा की तर्ज पर बाध्यकारी दिशानिर्देशों और सिद्धांतों का एक सेट विकसित करने और घोषित करने के लिए निर्देश जारी करने की मांग की। याचिकाकर्ता ने यह निर्देश देने की भी मांग की कि यदि वैधानिक दुष्कर्म के लिए कोई आपराधिक मामला दर्ज किया जाता है, तो पुलिस रिपोर्ट को एक सीलबंद कवर में रखा जाएगा और वैधानिक दुष्कर्म के कानून के तहत कोई भी आगे की कार्यवाही तब तक नहीं की जाएगी, जब तक कि सीएबी 18 साल से कम उम्र के किशोरों की 'वयस्क' या नाबालिग स्थिति के संबंध में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं कर देती।