Trending

    Move to Jagran APP
    pixelcheck
    विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

    SC का तमिलनाडु के मंदिरों में पुजारियों की नियुक्ति पर आदेश को रद्द करने से इनकार, मौजूदा स्थिति रहेगी बरकरार

    By Jagran NewsEdited By: Versha Singh
    Updated: Wed, 08 Nov 2023 02:03 PM (IST)

    सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को अपने 25 सितंबर के आदेश को रद्द करने से इनकार कर दिया जिसमें उसने तमिलनाडु सरकार से राज्य में अगैमिक परंपरा द्वारा शासित मंदिरों में अर्चकों या पुजारियों की नियुक्ति पर मौजूदा शर्तों को बनाए रखने के लिए कहा था। वरिष्ठ अधिवक्ता ने कहा “अर्चकों की नियुक्ति एक धर्मनिरपेक्ष कार्य है और राज्य उन्हें नियुक्त करने का हकदार है।”

    Hero Image
    तमिलनाडु के मंदिरों में पुजारियों की नियुक्ति पर मौजूदा स्थिति रहेगी बरकरार

    पीटीआई, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को अपने 25 सितंबर के आदेश को रद्द करने से इनकार कर दिया, जिसमें उसने तमिलनाडु सरकार से राज्य में 'अगैमिक' परंपरा द्वारा शासित मंदिरों में 'अर्चकों' या पुजारियों की नियुक्ति पर मौजूदा शर्तों को बनाए रखने के लिए कहा था।

    विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

    न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना और न्यायमूर्ति एम एम सुंदरेश की पीठ प्रथम दृष्टया तमिलनाडु सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता दुष्यंत दवे की इस दलील से सहमत नहीं हुई कि राज्य 'अर्चकों' की नियुक्ति का हकदार है।

    वरिष्ठ अधिवक्ता ने कहा, “अर्चकों की नियुक्ति एक धर्मनिरपेक्ष कार्य है और राज्य उन्हें नियुक्त करने का हकदार है।”

    पीठ ने कहा, तर्क यह है कि राज्य सरकार एक विशेष संप्रदाय के मंदिरों में 'अर्चकों' की नियुक्ति में 'अगम' परंपराओं के तहत निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन नहीं कर रही है।

    'आगम' हिंदू विद्यालयों के तांत्रिक साहित्य का संग्रह है और ऐसे ग्रंथों की तीन शाखाएँ हैं - 'शैव, वैष्णव और शाक्त'।

    शीर्ष अदालत उन याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी जिसमें आरोप लगाया गया था कि राज्य सरकार तमिलनाडु प्रशाशन द्वारा संचालित स्कूलों में अर्चकों के लिए एक साल का सर्टिफिकेट कोर्स करने के बाद अन्य संप्रदायों के लोगों को अर्चक बनने की अनुमति देकर अगम मंदिरों में अर्चकों की नियुक्ति की वंशानुगत योजना में हस्तक्षेप कर रही है।

    पीठ ने 25 सितंबर को 'अर्चकों' की नियुक्ति के संबंध में यथास्थिति (मौजूदा शर्तों) का आदेश दिया, जिससे राज्य सरकार के अनुसार राज्य भर के मंदिरों में 2405 'अर्चकों' की नियुक्ति रुक जाएगी।

    शीर्ष अदालत ने अब याचिकाओं पर आगे की सुनवाई 25 जनवरी, 2024 को तय की है और कहा है कि वह इस तरह के मुद्दे पर मद्रास उच्च न्यायालय के समक्ष लंबित कार्यवाही पर रोक नहीं लगाएगी।

    पीठ ने कहा, ''आप (वकील) बस उन्हें (उच्च न्यायालय को) बताएं कि उच्चतम न्यायालय ने इस पर कब्जा कर लिया है।''

    राज्य सरकार ने अपनी याचिका में शीर्ष अदालत के आदेश को रद्द करने की मांग की है।

    यह प्रस्तुत किया गया है कि.., चूंकि आगम योग्यता, आयु, चयन का तरीका, सेवानिवृत्ति आदि निर्धारित नहीं करता है, इसलिए तमिलनाडु हिंदू धार्मिक संस्थान कर्मचारी (सेवा की शर्तें) नियम, 2020 के नियम 7 और 9 के तहत निर्धारित प्रक्रियाएं होनी चाहिए। उस सीमा तक पालन किया जाना चाहिए।

    संबंधित मंदिर में पालन किए जाने वाले आगमों का अध्ययन करने वाले और उनसे परिचित व्यक्तियों में से उपयुक्त व्यक्तियों का चयन नियम 7 और 9 के तहत निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन करके किया जाएगा।

    इसमें कहा गया है कि सरकारी आदेश, जिसे चुनौती दी गई है, उन लोगों को मंदिरों में व्यावहारिक प्रशिक्षण के लिए भेजने से संबंधित है, जो उन मंदिरों में काम करने वाले वरिष्ठ 'अर्चकों' के मार्गदर्शन में व्यावहारिक प्रशिक्षण के लिए 'अर्चक प्रशिक्षण स्कूलों' से उत्तीर्ण हुए हैं।

    राज्य सरकार ने कहा, यह प्रस्तुत किया गया है कि यदि 25 सितंबर को जारी यथास्थिति आदेश को प्रभावी किया जाता है, तो न तो आगमिक मंदिरों में अर्चाकशिप के 2,405 रिक्त पद भरे जा सकते हैं और न ही पाठ्यक्रम पूरा करने वाले व्यक्तियों के लिए आवश्यक प्रशिक्षण पर विचार किया जा सकता है। अर्चकस ट्रेनिंग स्कूल से, याचिका के निपटारे तक दिया जा सकता है...और इससे आगमिक मंदिरों में पूजा करने में बड़ी कठिनाई होगी।

    इससे पहले, पीठ ने अर्चकों के संघ 'श्रीरंगम कोइल मिरास कैंकर्यपरागल मट्रम अथनाई सरंथा कोइलगालिन मिरास्कैन-कार्यपरार्गलिन नलसंगम' द्वारा दायर याचिका पर राज्य सरकार और अन्य को नोटिस जारी किया था।

    याचिका में राज्य सरकार के 27 जुलाई के आदेश और उसके बाद के आदेशों को रद्द करने की मांग की गई है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि प्रशासन 'अर्चकों' की नियुक्ति की वंशानुगत योजना में हस्तक्षेप करने का प्रयास कर रहा है।

    यह भी पढ़ें- Nitish Kumar Statement: नीतीश कुमार के बयान पर सियासी तकरार, सोशल मीडिया पर भिड़ीं महिला आयोग की अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद

    यह भी पढ़ें- NIA Raid: मानव तस्करी मामले में NIA की 10 राज्यों में चल रही छापेमारी, कश्मीर से लेकर राजस्थान तक तलाशी अभियान जारी