अभी जेल में रहेंगे उमर खालिद और शरजील इमाम, जमानत देने से सुप्रीम कोर्ट का इन्कार
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली दंगों की साजिश मामले में उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत देने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि उनके खिलाफ यूएपीए के तहत प ...और पढ़ें

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। दिल्ली दंगों की साजिश में आरोपित उमर खालिद और शरजील इमाम फिलहाल जेल में रहेगा। सुप्रीम कोर्ट ने दोनों को जमानत देने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि उमर खालिद और शरजील इमाम के खिलाफ पहली निगाह में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम के तहत मामला बनता है।
हालांकि कोर्ट ने पांच अन्य आरोपितों गुलफिशां फातिमा, मीरान हैदर, शिफा उर रहमान, मोहम्मद सलीम खान और शादाब अहमद को सशर्त जमानत दे दी है। कोर्ट ने कहा है कि खालिद और इमाम संरक्षित गवाहों के बयान होने के बाद या एक वर्ष होने पर नये सिरे से जमानत के लिए आवेदन कर सकते हैं। सभी अभियुक्त पांच वर्ष से जेल में है।
शीर्ष अदालत की अहम टिप्पणी
शीर्ष अदालत ने फैसले में महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि मुकदमे में देरी को ट्रंप कार्ड के रूप में नहीं इस्तेमाल किया जा सकता जो विधायी सुरक्षा उपायों को स्वत: निरस्त कर दे। कहा दोष के आधार पर सभी अभियुक्त समान नहीं हैं। उमर खालिद और शरजील इमाम की स्थिति गुणात्मक रूप से अन्य अभियुक्तों से अलग है। फरवरी 2020 में उत्तर पूर्वी दिल्ली में दंगे हुए थे जिसमें 53 लोग मारे गए थे जबकि 700 से अधिक लोग घायल हुए थे।
ये फैसला न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और एनवी अंजारिया की पीठ ने दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली अभियुक्तों की याचिकाओं पर दिया। दिल्ली हाई कोर्ट ने सातो अभियुक्तों को जमानत देने से इन्कार कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने सभी याचिकाओं पर बहस सुनकर गत 10 दिसंबर को फैसला सुरक्षित रख लिया था। कोर्ट ने कहा कि रिकार्ड पर मौजूद सामग्री को देखते हुए उमर खालिद और शरजील इमाम के खिलाफ प्रथमदृष्टया मामला बनता है।
कोर्ट ने कुल 12 शर्तें लगाई हैं
अभियोजन पक्ष द्वारा पेश सामग्री से आरोप साबित होते हैं। उनमें केंद्रीय और निर्णायक भूमिका, साजिश, रणनीतिक स्तर पर संलिप्तता का खुलासा होता है। कोर्ट ने कहा कि अभियुक्तों की अपराध में भागीदारी और भूमिका को देखते हुए प्रत्येक के जमानत आवेदन पर व्यक्तिगत रूप से जांच करने की आवश्यकता है। हालांकि बाकी पांच अभियुक्तों को कोर्ट ने कड़ी शर्तों के साथ जमानत दे दी है। कोर्ट ने कुल 12 शर्तें लगाई हैं और कहा है कि इनके उल्लंघन पर अभियुक्तों की जमानत खारिज हो सकती है।
कोर्ट ने फैसले में व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार देने वाले संविधान के अनुच्छेद 21 की चर्चा करते हुए कहा कि अभियोजन को ट्रायल से पहले लंबी हिरासत के औचित्य को साबित करना आवश्यक है। यद्यपि यूएपीए (गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम)अधिनियम) के तहत नियमित रूप से जमानत नहीं दी जा सकती, लेकिन कानून जमानत न देने का प्रविधान नहीं करता है। यह जमानत देने के कोर्ट के अधिकार क्षेत्र को भी समाप्त नहीं करता।
इस मामले में सभी सात आरोपियों पर यूएपीए की आतंकवाद विरोधी धाराओं और आइपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप हैं। उन पर दंगों का मुख्य साजिशकर्ता होने का आरोप है। सभी के खिलाफ अदालत में आरोपपत्र दाखिल हो चुका है। शरजील इमाम को सीएए विरोधी प्रदर्शनों के दौरान दिए गए भाषणों के लिए 28 जनवरी 2020 को गिरफ्तार किया गया था। बाद में अगस्त 2020 में उसे बड़ी साजिश के मामले में गिरफ्तार किया गया।
उमर खालिद को 13 सितंबर 2020 को गिरफ्तार किया गया था। इस मामले में दिल्ली पुलिस की ओर से सालिसिटर जनरल तुषार मेहता, अतिरिक्त सालिसिटर जनरल एसवी राजू ने बहस की थी जबकि अभियुक्तों की ओर से कपिल सिब्बल, अभिषेक मनु सिंघवी, सिद्धार्थ दवे, सलमान खुर्शीद और सिद्दार्थ लूथरा ने पक्ष रखा था।
दिल्ली पुलिस ने अभियुक्तों की जमानत का विरोध करते हुए कहा था कि दिल्ली में दंगे अचानक नहीं हुए थे बल्कि भारत की संप्रभुता पर एक सुनियोजित और योजनाबद्ध हमला था। एसवी राजू ने कहा था कि साजिश में शामिल सभी अभियुक्त एक दूसरे के कृत्यों के लिए उत्तरदायी हैं। जबकि अभियुक्तों के वकीलों ने पांच साल की लंबी हिरासत और ट्रायल न होने को आधार बनाया था।

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