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    'बाबर सैन्य रणनीतिकार, अकबर सहिष्णु और औरंगजेब कठोर शासक', NCERT की किताब में कई बड़े बदलाव

    Updated: Wed, 16 Jul 2025 06:05 PM (IST)

    शैक्षणिक वर्ष 2025-26 से स्कूलों में आठवीं कक्षा की सामाजिक विज्ञान की किताब में मुगल काल की समीक्षा की गई है। पुस्तक में अकबर को क्रूर होते हुए भी सहिष्णु बताया गया है जबकि औरंगजेब एक कठोर शासक था। एनसीईआरटी के अनुसार ऐतिहासिक घटनाओं के लिए आज किसी को जिम्मेदार ठहराना गलत होगा। पुस्तक में मुगलों के उदय दिल्ली सल्तनत और विजयनगर साम्राज्य पर प्रकाश डाला गया है।

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    NCERT ने कक्षा 8 की किताब में कर डाले यह बड़े बदलाव

    एएनआई, नई दिल्ली। शैक्षणिक वर्ष 2025-26 से स्कूलों में शुरू की जाने वाली आठवीं कक्षा की सामाजिक विज्ञान की किताब में मुगल काल की नए सिरे से समीक्षा की गई है। इसमें यह बताया गया है कि अकबर क्रूर होते हुए भी सहिष्णु था, जबकि औरंगजेब एक कठोर शासक था।

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    अकबर का शासनकाल 'क्रूरता और सहिष्णुता का मिश्रण' था, जबकि औरंगजेब एक सैन्य शासक था जिसने 'गैर-इस्लामी' प्रथाओं पर प्रतिबंध लगाया और गैर-मुसलमानों पर फिर से कर लगाए।

    प्रमुख मुगल सम्राटों के चित्रण में यह पुस्तक एक बदलाव का प्रतीक है जिसमें विजय, धार्मिक निर्णयों, सांस्कृतिक योगदान और क्रूरता का विस्तृत विवरण दिया गया है।

    किसी को नहीं जिम्मेदार ठहराना गलत

    एनसीईआरटी ने पाठ्यपुस्तक में इस तरह के विवरणों को शामिल किए जाने पर कहा, 'इन घटनाओं को न तो मिटाया जा सकता है और न ही नकारा जा सकता है, लेकिन आज किसी को भी इनके लिए जिम्मेदार ठहराना गलत होगा। क्रूर हिंसा, अपमानजनक कुशासन या सत्ता की गलत महत्वाकांक्षाओं के ऐतिहासिक मूल को समझना, अतीत को सुधारने और एक ऐसे भविष्य का निर्माण करने का सबसे अच्छा तरीका है जहां संभवत: इनका कोई स्थान नहीं होगा।'

    पुस्तक में मुगलों के उदय का वर्णन

    पुस्तक में 'भारत के राजनीतिक मानचित्र का पुनर्निर्माण' शीर्षक वाले अध्याय में 13वीं से 17वीं शताब्दी तक के भारतीय इतिहास पर चर्चा की गई है। यह पुस्तक दिल्ली सल्तनत के उत्थान और पतन, विजयनगर साम्राज्य, मुगलों और उनके प्रतिरोध, और सिखों के उत्थान पर भी प्रकाश डालती है। इसमें मुगलों के उदय का वर्णन किया गया है, जिसकी शुरुआत बाबर से होती है। उसे 'एक तुर्क मंगोल शासक और सैन्य रणनीतिकार' बताया गया है।

    हुमायूं ने साम्राज्य को बचाया

    बाबर ने 1526 में पानीपत में इब्राहिम लोदी को हराया था, जिससे दिल्ली सल्तनत का अंत हो गया। बाबर के बेटे हुमायूं ने साम्राज्य को बचाए रखने के लिए संघर्ष तो किया, मगर शेरशाह सूरी के हाथों इसे गंवाना पड़ा। पुस्तक में बताया गया है कि कैसे सूरी शासन के दौरान एक हिंदू सेनापति हेमू ने कुछ समय के लिए हेमचंद्र विक्रमादित्य की उपाधि से दिल्ली पर शासन किया था।

    हालांकि, पानीपत के दूसरे युद्ध के बाद उन्हें अकबर की सेना द्वारा बंदी बना लिया गया और उनका सिर कलम कर दिया गया। हुमायूं की आकस्मिक मृत्यु के बाद 13 वर्ष की आयु में सम्राट घोषित किए गए, अकबर ने पूरे उपमहाद्वीप में अपने साम्राज्य को सुदृढ़ बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया।

    महिलाओं और बच्चों को गुलाम बनाने का आदेश

    पुस्तक में उनके शासन को 'क्रूरता और सहिष्णुता का मिश्रण, महत्वाकांक्षा और रणनीति से प्रेरित' बताया गया है। 1568 में चित्तौड़गढ़ की घेराबंदी के दौरान अकबर ने लगभग 30,000 लोगों के नरसंहार और जीवित महिलाओं और बच्चों को गुलाम बनाने का आदेश दिया। इसमें उनके अपने विजय संदेश का उद्धरण दिया गया है कि हमने काफिरों के कई किलों और कस्बों पर कब्जा कर लिया है और वहां इस्लाम की स्थापना की है... अपनी रक्तपिपासु तलवार की मदद से हमने उनके मन से कुफ्र के निशान मिटा दिए हैं और उन जगहों पर और पूरे हिंदुस्तान में मंदिरों को नष्ट कर दिया है।

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