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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 02, 2023 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Manipur Violence: इंफाल के जिलों में कर्फ्यू में छूट की अवधि बढ़ी, सुरक्षा बलों ने चलाया तलाशी अभियान

By Jagran NewsEdited By: Versha Singh
Published: Wed, 02 Aug 2023 11:25 AM (IST)

Manipur Violence मणिपुर में दो समुदायों मैतेई और कुकी के बीच हिंसा के बीच मणिपुर सरकार ने कानून व्यवस्था की ...और पढ़ें

इंफाल के जिलों में कर्फ्यू में छूट की अवधि हुई एक घंटा
इंफाल के जिलों में कर्फ्यू में छूट की अवधि हुई एक घंटा

इंफाल (मणिपुर), एजेंसी। Manipur Violence: मणिपुर सरकार ने कानून व्यवस्था की स्थिति में सुधार के मद्देनजर इंफाल पूर्व और पश्चिम जिलों में कर्फ्यू में छूट की अवधि एक घंटे बढ़ा दी है। इसकी जानकारी एक आधिकारिक बयान में दी गई है। इंफाल के दोनों जिलों में कर्फ्यू में छूट की अवधि अब सुबह 5 बजे से रात 8 बजे तक थी।

दोनों जिलों के जिला मजिस्ट्रेटों के कार्यालय द्वारा जारी अलग-अलग आदेशों में कहा गया है कि कानून और व्यवस्था में काफी सुधार हुआ है और आम जनता को दवाओं और खाद्य पदार्थों सहित आवश्यक वस्तुओं की खरीद की सुविधा के लिए आंदोलन पर प्रतिबंध में ढील देने की आवश्यकता है।

घाटी के अन्य जिलों थौबल, काकचिंग और बिष्णुपुर में कर्फ्यू में छूट की अवधि सुबह 5 बजे से शाम 5 बजे तक अपरिवर्तित रही।

मणिपुर पुलिस नियंत्रण कक्ष द्वारा जारी एक अलग प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि राज्य में स्थिति अभी भी अस्थिर और तनावपूर्ण लेकिन नियंत्रण में है और सुरक्षा बलों ने राज्य के संवेदनशील और सीमांत क्षेत्रों में तलाशी अभियान चलाया है।

इस बीच, अधिकारियों ने कहा कि कोम यूनियन मणिपुर के अध्यक्ष सर्टो अहाओ कोम (45) को मंगलवार देर रात चुराचांदपुर जिले के चिंगफेई गांव के पास आतंकवादियों द्वारा शारीरिक हमला किए जाने के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

इम्फाल के एक अस्पताल में इलाज करा रहे सर्टो ने संवाददाताओं से कहा कि उग्रवादियों ने उन पर अरामबाई टेंगोल, मैतेई लीपुन और कोकोमी जैसे मैतेई निकायों के साथ संबंध रखने का आरोप लगाया है।

अनुसूचित जनजाति (एसटी) दर्ज के लिए मैतेई समुदाय की मांग के विरोध में पहाड़ी जिलों में 'आदिवासी एकजुटता मार्च' के आयोजन के बाद 3 मई को मणिपुर में जातीय झड़पें हुईं, जिसके बाद से 160 से अधिक लोगों की जान चली गई और कई सैकड़ों घायल हो गए।

मणिपुर की आबादी में मेइतेई लोगों की संख्या लगभग 53 प्रतिशत है और वे ज्यादातर इम्फाल घाटी में रहते हैं। आदिवासी - नागा और कुकी - 40 प्रतिशत से कुछ अधिक हैं और पहाड़ी जिलों में रहते हैं।