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    इनएक्टिव बैंक अकाउंट पर RBI ने कसा शिकंजा, बैंक नहीं दिखा सकते ढिलाई; धोखाधड़ी रोकने के लिए बनाए ये नियम

    Updated: Sun, 25 May 2025 07:45 PM (IST)

    RBI New Rules भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) निष्क्रिय बैंक खातों में धोखाधड़ी की बढ़ती घटनाओं को लेकर चिंतित है। RBI ने निष्क्रिय खातों के इस्तेमाल को लेकर बैंकों के लिए नए नियमों का मसौदा जारी किया है। जिसके तहत बैंकों को इन खातों की निगरानी बढ़ानी होगी और ग्राहकों से संपर्क करना होगा। दो साल तक लेनदेन न होने पर खाता निष्क्रिय होगा।

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    पिछले हफ्ते RBI ने नये नियमों के लिए मसौदा जारी किया और आम जनता से इस पर राय मांगी है।

    जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। पिछले एक-दो वर्षों के भीतर देश के कई हिस्सों से यह सूचनाएं सामने आई हैं कि कैसे फ्रॉड करने वालों ने बैंकों में निष्क्रिय पड़े बैंक खातों का इस्तेमाल किया है और इनमें बैंकिंग फ्रॉड के शिकार ग्राहकों के खातों से राशि ट्रांसफर की है।

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    संभव है कि केंद्रीय बैंक ने इन सूचनाओं को काफी गंभीरता से लिया है और बैंकों के निष्क्रिया बैंक खातों और इनकी जमा राशि के इस्तेमाल को लेकर नये नियमों को तैयार करने का फैसला किया है। पिछले हफ्ते इन नये नियमों को मसौदा जारी किया है और आम जनता से इस पर राय मांगी है।

    इस चीज को समस्या के तौर पर देख रहा RBI

    लोगों के सुझाव हासिल होने के बाद अगले छह महीनों के दौरान नये नियम लागू होने की संभावना है जो निष्क्रिय बैंक खातों की निगरानी को लेकर बैंकों की मुस्तैदी और बढ़ा देगी। नये नियम का लब्बोलुआब यहीं है कि बैंक इन निष्क्रिय बैंक खातों की निगरानी को लेकर कोई ढिलाई नहीं दिखा सकते। अब उन्हें इन खातों की लगातार निगरानी करनी होगी और हर वर्ष इनकी समीक्षा करनी होगी। दो वर्षों तक बैंक ग्राहकों की तरफ से कोई लेन-देन नहीं होने पर ही बैंक खाते को निष्क्रिय घोषित किया जाएगा।

    नवंबर, 2024 के आंकड़ों के मुताबिक सिर्फ प्रधानमंत्री जन धन योजना (पीएमजेडीवाइ) के तहत निष्क्रिय खातों की संख्या 11.30 करोड़ है। दूसरे शब्दों में कहें तो पीएमजेडीवाइ के तहत जितने बैंक खाते खोले जाते हैं उनमें से हर पांच-छह बैंक खातों में एक निष्क्रिय हो जाता है। आरबीआइ इसे एक समस्या के तौर पर देख रहा है।

    बैंकों ने वेबसाइट पर खातों का ब्योरा डालना किया शुरू

    पिछले साल जनवरी और नवंबर में भी आरबीआइ ने बैंकों से विशेष तौर पर आग्रह किया था कि वह निष्क्रिय बैंक खातों की संख्या घटाने के लिए, इन बैंक खातों के ग्राहकों तक पहुंचने के लिए या इन खातों के नामित व्यक्तियों तक पहुंचने के लिए विशेष अभियान चलाये। बैंकों के स्तर पर कुछ काम भी हुआ। कुछ बैंकों ने अपने वेबसाइट पर इन खातों का ब्यौरा डालना शुरू हुआ है लेकिन निष्क्रिय खातों की संख्या में कोई खास कमी नहीं आई है। दूसरी तरफ आन लाइन फ्रॉड करने वाले गिरोहों की नजर इन बैंक खातों पर है।

    आरबीआइ ने कहा है कि निष्क्रिय बैंक खातों पर अलग से नजर रखना जरूरी है और उन्हें सामान्य बैंक खातों से भी अलग रखना चाहिए ताकि फ्रॉड की किसी संभावना को दूर किया जा सके। अगर निष्क्रिय बैंक खाते को फिर से सक्रिय किया गया है तब भी बैंकों को कहा गया है कि वह चुपचाप कम से कम छह महीने इन खातों के लेन-देन पर नजर रखें। इन खाते में जमा राशि का अलग से आडि¨टग की बात भी कही गई है। आरबीआइ के नये नियम में बैंकों की जिम्मेदारी बढ़ाई जा रही है।

    हर विकल्प को आजमाने का निर्देश

    बैंकों को कहा गया है कि उन सभी बैंक खातों की सालाना निगरानी की जाए जिनमें एक साल या इससे ज्यादा समय से कोई लेन-देन नहीं हुआ है। इसके बाद बैंक की तरफ से हर मुमकिन कोशिश हो कि बैंक ग्राहक से संपर्क हो। इसके लिए पत्र लिखने से लेकर ई-मेल करने जैसे हर विकल्प को आजमाने का निर्देश दिया जाएगा। ग्राहकों को बैंक बताएंगे कि अगर निश्चित अवधि के दौरान उन्होंने लेन-देन नहीं किया या बैंक को सूचना नहीं दी उनके खाते निष्क्रिय घोषित हो जाएंगे।

    अगर पत्र वापस आ जाता है या बैंक ग्राहक की तरफ से कोई सूचना नहीं मिलती तो बैंक की तरफ से उस खाताधारक की पहचान करने के लिए अलग से जांच बिठाई जाएगी या अगर ग्राहक की मौत हो चुकी है तो उसके नामित व्यक्ति की पहचान करने की प्रक्रिया शुरू होगी। अगर खाताधारक खाते को संचालित नहीं करने की सूचना दे देता है तो उनसे निष्क्रिय खाता नहीं घोषित किया जाएगा। लेकिन बैंक को सूचना देने के बावजूद एक वर्ष और संचालित नहीं करता है तो फिर एक वर्ष बाद वह निष्क्रिय घोषित कर दिया जाएगा।

    अकाउंट डिएक्टिवेट होने पर भी होगा ब्याज का भुगतान

    इस नियम के साथ ही आरबीआइ ने यह भी स्पष्ट किया है कि बैंक खाता निष्क्रिय हो या ना हो उसके लिए ब्याज का भुगतान होता रहेगा। उसमें न्यूनतम राशि नहीं होने की स्थिति में अतिरिक्त चार्ज लगाने का नियम यहां लागू नहीं होगा साथ ही निष्क्रिय खाते को फिर से सक्रिय करने के लिए कोई भी अतिरिक्त शुल्क ग्राहक से नहीं लिया जाएगा।

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