जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। सरकार अगले चार वर्षो में सारी चौकीदार वाली रेलवे क्रासिंगें भी खत्म कर देगी। इसके लिए 50 हजार करोड़ रुपये की योजना तैयार की गई है। रेलवे बोर्ड के चेयरमैन विनोद कुमार यादव ने इस बात की जानकारी दी।

रेलवे बोर्ड अध्यक्ष ने रेलवे के भविष्य के विजन पर विस्तारपूर्वक प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि चौकीदार रहित क्रासिंगें खत्म करने के परिणामस्वरूप ट्रेन हादसों और मौतों पर अंकुश लगाने में बड़ी कामयाबी मिली है। इस वर्ष अब तक किसी ट्रेन दुर्घटना में कोई मौत नहीं हुई है। इससे उत्साहित होकर अब हमने चौकीदार सहित क्रासिंगों को भी खत्म करने की योजना तैयार की है। इसके तहत अगले चार वर्षो में स्वर्णिम चतुर्भुज तथा उसके तिर्यक रूटों पर स्थित सभी 2565 चौकीदार सहित क्रासिंगों को अंडरपास और ओवरब्रिज बनाकर खत्म कर दिया जाएगा। इस पर 50 हजार करोड़ रुपये की रकम खर्च की जाएगी। चालू वित्तीय वर्ष में 1795 ऐसी क्रासिंगें खत्म करने का लक्ष्य है जिसमें अब तक 534 खत्म की जा चुकी हैं।

हादसों के साथ मौतों पर अंकुश लगाने के लिए रोलिंग स्टॉक के आधुनिकीकरण पर जोर दिया जा रहा है। इसके तहत अब आइसीएफ कोच का उत्पादन पूरी तरह बंद कर केवल एलएचबी कोच का उत्पादन किया जाएगा। हादसे की स्थिति में एलएचबी कोच एक-दूसरे के ऊपर नहीं चढ़ती हैं जिससे बहुत कम लोग हताहत होते हैं।

समय पालन 

ट्रैक व सिगनल प्रणाली के बेहतर रखरखाव पर अधिक ध्यान दिए जाने के परिणामस्वरूप पिछले वर्ष ट्रेनों के समय पालन का स्तर 71 फीसद से घटकर 66 फीसद पर आ गया था। ज्यादातर ट्रेनो में डेटा लॉगर लगाया जा चुका है। जिससे ट्रेन की लोकेशन की रियल टाइम रिपोर्टिग हो रही है। इससे समय पालन का स्तर 73 फीसद पर पहुंच गया है। लेट ट्रेनों में भी 10.5 फीसद ट्रेने एक घंटे से कम लेट हो रही हैं। जबकि चार घंटे से अधिक लेट होने वाली ट्रेनो का प्रतिशत केवल 3.3 प्रतिशत है।

फ्रेट कारीडोर 

यादव ने कहा कि दिसंबर के अंत तक दिल्ली-मुंबई और दिल्ली-कोलकाता फ्रेट कारीडोर के 3000 किलोमीटर हिस्सों पर मालगाडि़यों का संचालन प्रारंभ हो जाएगा। इसकी शुरुआत दो अक्टूबर से पूर्वी कारीडोर के कुछ हिस्से पर मालगाड़ी के संचालन से होगी।

पैसेंजर कारीडोर

इस बीच दिल्ली-मुंबई और दिल्ली-हावड़ा पैसेंजर रूटों पर ट्रेनों की रफ्तार 160 किलोमीटर करने की योजना पर भी काम शुरू हो गया है। हाल ही में कैबिनेट ने इसकी मंजूरी दे दी है। इसके लिए अगले पांच वर्षो में एंबैंकमेंट, पुल, सिगनल प्रणाली तथा ओवरहेड इलेक्टि्रक लाइन को दुरुस्त किया जाएगा। 160 की स्पीड इसलिए चुनी गई है क्योंकि हमारे मौजूदा ट्रैक इतनी रफ्तार के लिए उपयुक्त हैं। इससे ज्यादा रफ्तार के लिए एकदम नया ट्रैक बिछाने पड़ेंगे जिसमें बहुत ज्यादा खर्च आएगा।

दिल्ली-लखनऊ तेजस

दिल्ली से लखनऊ के बीच आइआरसीटीसी द्वारा निजी क्षेत्र के सहयोग से चलाई जाने वाली तेजस एक्सप्रेस का संचालन 15 अक्टूबर से पहले शुरू होगा। इसके बाद अहमदाबाद-मुंबई के बीच भी आइआरसीटीसी द्वारा दूसरी तेजस चलाई जाएगी।

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Posted By: Sanjeev Tiwari

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