जयप्रकाश रंजन, नई दिल्ली। चीन ने अमेरिका को यह धमकी दी है कि वह भारत-चीन के रिश्तों में कोई दखलअंदाजी नहीं करे। असलियत में वर्ष 2020 में गलवन घाटी में चीन के सैनिकों की घुसपैठ और भारतीय सेना के साथ उनकी भिड़ंत भी भारत-अमेरिकी रिश्तों को ध्यान में रखते हुए की गई थी। इस बात का खुलासा अमेरिका के रक्षा मंत्रालय पेंटागन की तरफ से चीन के सैन्य व सुरक्षा गतिविधियों पर जारी रिपोर्ट में की गई है।

चीन नहीं चाहता कि भारत और अमेरिका के रिश्ते प्रगाढ़ हो

बुधवार को सुबह जारी इस रिपोर्ट में हिंद महासागर से लेकर प्रशांत-हिंद क्षेत्र में चीन की सैन्य गतिविधियों के बारे में विस्तार से चर्चा है जो कई तरह से भारत के हितों को भी प्रभावित करती हैं। रिपोर्ट के जरिए बताया गया है कि चीन नहीं चाहता कि भारत और अमेरिका के रिश्ते प्रगाढ़ हो और इसे रोकने के लिए ही वह भारत के साथ अपनी सीमा पर तनाव बढ़ाने का साजिश रच रहा है। परोक्ष तौर पर यह भी कहा गया है कि चीन इस रणनीति पर अभी कायम रहेगा। रिपोर्ट के मुताबिक चीन (पब्लिक रिपब्लिक ऑफ चीन) के अधिकारियों ने अमेरिका के अधिकारियों को धमकी दी है कि वह भारत-चीन के रिश्तों में कोई हस्तक्षेप नहीं करे।

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सीमा पर तनाव बढ़ा कर भारत और अमेरिका को करीब आने से रोक रहा चीन

चीन चाहता है कि सीमा पर तनाव बढ़ा कर भारत और अमेरिका को करीब आने से रोके। रिपोर्ट में पूर्वी लद्धाख स्थित वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) में चीन के सैनिकों की घुसपैठ को लेकर काफी विस्तार से बताया गया है। जून, 2020 में गलवन घाटी में भारत व चीन के सैनिकों के बीच हुई हिंसक भिड़ंत का भी जिक्र है और चीन के हवाले से बताया गया है कि इसमें 20 भारतीय सैनिकों और चार चीनी सैनिकों की मौत हुई थी। यह भी कहा गया है कि इस घटनाक्रम के लिए चीन ने भारत की तरफ से उस इलाके में किये जा रहे ढांचागत विकास को जिम्मेदार ठहराया है जबकि भारत का आरोप है कि चीन लगातार उसके इलाके में आक्रामक घुसपैठ कर रहा है।

हिंद प्रशांत क्षेत्र में वर्चस्व बढ़ाना चाहता है चीन: रिपोर्ट 

भारत और चीन के बारे में इस रिपोर्ट में तो इतना ही है लेकिन चीन की सैन्य तैयारियों और उसकी सैन्य सोच को लेकर में इसमें बहुत कुछ तथ्यामक प्रस्तुति है जो सीधे तौर पर भारत के हितों को भी प्रभावित करेगा। मसलन, चीन जिस तरह से अपनी सेना का आधुनिकीकरण कर रहा है वह भारत के खतरा होगा। रिपोर्ट के मुताबिक चीन ने तीन चरणों में वर्ष 2047 तक अपनी सेना को पूरी तरह से विश्वस्तरीय बना लेगा। इसका पहला चरण वर्ष 2027 तक और दूसरा चरण वर्ष 2035 तक पूरा किया जाएगा। इस तरह से हिंद प्रशांत क्षेत्र के साउथ चाईना सी में चीन की तैयारियों का असर परोक्ष तौर पर भारत पर भी होगा।

इसमें क्वाड संगठन का भी जिक्र है जिसके तहत भारत, अमेरिका, जापान व आस्ट्रेलिया चीन के बढ़ती सैन्य गतिविधियों को लेकर एक साझा रणनीति विकसित करने की कोशिश में हैं ताकि हिंद-प्रशांत क्षेत्र को सभी देशों के लिए एक समान अवसर वाला सुनिश्चित किया जा सके। सनद रहे कि पूर्वी लद्दाख घाटी में चीन के घुसपैठ को खत्म करने के लिए दोनो देशों के बीच कई स्तरों की बातचीत के बाद चीन की तरफ से सैनिकों की वापसी का ऐलान किया गया है। भारत ने भी अपने सैनिकों को पीछे किया गया है। लेकिन भारत की यह मांग की मई, 2020 से पहले की स्थिति बहाल की जाए, इस पर सहमति नहीं बन पाई है।

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Edited By: Piyush Kumar

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