वाशिंगटन, पीटीआइ। चीन लगातार अपनी सैन्‍य शक्ति बढ़ा रहा है। भारत समेत दुनियाभर के लिए चिंता का विषय यह है कि चीन लगातार अपने परमाणु हथियारों की क्षमता में इजाफा करने में जुटा हुआ है, जो खतरे की घंटी है। पेंटागन ने बताया कि चीन के पास 2035 तक लगभग 1,500 वॉरहेड्स (Warheads) यानि मिसाइल, राकेट या टारपीडो से किसी जगह पर गिराये जाने वाले विस्फोटक का भंडार होने की संभावना है। चीन के पास मौजूद समय में 400 के आसपाल वॉरहैड्स हैं।

परमाणु हथियारों की क्षमता तेजी से बढ़ाने में जुटा चीन

चीन के महत्वाकांक्षी सैन्य निर्माण पर कांग्रेस को अपनी वार्षिक रिपोर्ट में पेंटागन ने कहा कि राष्‍ट्रपति शी चिनफिंग के नेतृत्‍व में मौजूदा हथियारों की क्षमता को बढ़ाने में तेजी से काम हो रहा है। अगले दशक में बीजिंग का लक्ष्य अपने परमाणु बलों का आधुनिकीकरण, विविधता और विस्तार करना है। चीन का मौजूदा परमाणु आधुनिकीकरण अभ्यास पैमाने और जटिलता दोनों में पिछले आधुनिकीकरण के प्रयासों से अधिक है।

चीन 2021 से कर रहा इस रणनीति पर काम

पेंटागन ने रिपोर्ट में कहा कि चीन अपने भूमि, समुद्र और वायु आधारित परमाणु वितरण प्लेटफार्मों में निवेश और विस्तार कर रहा है और अपने परमाणु बलों के इस बड़े विस्तार का समर्थन करने के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचे का निर्माण कर रहा है। चीन फास्ट ब्रीडर रिएक्टरों और पुनर्संसाधन सुविधाओं का निर्माण करके प्लूटोनियम का उत्पादन करने और उसे अलग करने की अपनी क्षमता बढ़ाने पर भी काम कर रहा है। चीन ने संभवतः 2021 से अपने परमाणु विस्तार को तेज कर दिया था।

2035 तक चीन के पास होंगे 1500 वॉरहेड्स

पेंटागन ने कहा कि उसका अनुमान है कि चीन के परिचालन परमाणु हथियारों का भंडार 400 से अधिक हो गया है। पीएलए की 2035 तक अपनी राष्ट्रीय रक्षा और सशस्त्र बलों के 'मूल रूप से पूर्ण आधुनिकीकरण' करने की योजना है, रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर चीन अपने परमाणु विस्तार की गति को जारी रखता है, तो वह 2035 की समयसीमा तक लगभग 1500 वॉरहेड्स का भंडार जमा कर लेगा।

चीन क्‍यों तेजी से बढ़ा रहा अपनी सैन्‍य शक्ति?

पेंटागन के अधिकारी ने बताया कि चीन के राष्‍ट्रपति शी चिनफिंग की रणनीति अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के कम से कम पहलुओं को अपनी राजनीतिक प्रणाली और राष्ट्रीय हितों के अनुकूल बनाना चाहता है। इसलिए चीन अपनी राष्ट्रीय शक्ति को बढ़ाने और विस्तारित करने के लिए तेजी से काम कर रहा है। बता दें कि चीन का भारत, ताइवान समेत कई देशों के साथ सीमा विवाद चल रहा है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चीन का उद्देश्य घरेलू और विदेश नीति दोनों पहलुओं के माध्यम से अपनी राष्ट्रीय शक्ति का विस्तार करना है। इसलिए, शी जिनपिंग ने जिस वैश्विक सुरक्षा पहल की शुरुआत की... उनमें से एक है जिसमें पीआरसी खुद को वैश्विक सार्वजनिक वस्तुओं के प्रदाता के रूप में चित्रित करना चाहता है।

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पेंटागन के अधिकारियों ने बताया कि हाल ही में इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अधिक कठोर और आक्रामक कार्रवाइयां हुई हैं, जिनमें से कुछ को खतरनाक गतिविधियों के रूप में अमेरिका उजागर करेगा। PLA जहाजों और विमानों ने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में असुरक्षित और अव्यवसायिक व्यवहार में वृद्धि का प्रदर्शन किया है। लगातार युद्धाभ्यास कर चीन इस क्षेत्र को खतरनाक बना रहा है। ये सभी चीन की रणनीति का हिस्‍सा है।

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पेंटागन की रिपोर्ट में अन्य बातों के अलावा, ताइवान के खिलाफ तीव्र चीनी राजनयिक, आर्थिक, राजनीतिक और सैन्य दबाव की ओर भी ध्‍यान आकर्षित करती है। रिपोर्ट में 2021 तक बढ़ते सैन्य दबाव और 2022 में इसकी वृद्धि पर प्रकाश डाला गया है, विशेष रूप से स्पीकर नैन्सी पेलोसी की ताइवान यात्रा के बाद। साथ ही पेंटागन की रिपोर्ट चीनी सेना युद्ध के भविष्य को कैसे देखती है, ये भी बताती है।

Edited By: Tilakraj

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