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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 27, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

विपक्ष के इस सुझाव को अगर मोदी सरकार ने मान लिया तो शशि थरूर को होगा बड़ा फायदा

Published: Sat, 27 Sep 2025 04:06 PM (IST)

संसदीय स्थायी समितियों का कार्यकाल एक वर्ष से बढ़ाकर दो वर्ष किया जा सकता है। सरकार इस प्रस्ताव पर विचार ...और पढ़ें

कांग्रेस सांसद शशि थरूर को सकता है फायदा।
कांग्रेस सांसद शशि थरूर को सकता है फायदा।

HighLights

  1. विपक्ष ने संसदीय समितियों का कार्यकाल बढ़ाने का दिया है सुझाव
  2. इसी महीने खत्म हो रहा है समितियों का कार्यकाल
  3. सरकार कर रही विपक्ष के सुझाव पर विचार

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। संसदीय स्थायी समितियों का कार्यकाल मौजूदा एक वर्ष से बढ़ाकर दो वर्ष किया जा सकता है। सरकार कार्यकाल बढ़ाने वाले विपक्ष के सुझाव पर विचार कर रही है ताकि विधेयकों और नीतिगत मामलों की गहन और विस्तृत जांच की जा सके।

समितियों का कार्यकाल इसी महीने खत्म हो रहा है और इस समय अध्यक्ष को बदलने की संभावना भी नहीं दिख रही है। सरकार अगर कार्यकाल बढ़ाने वाले सुझाव को मान जाती है तो यह कदम राजनीतिक रूप से बेहद अहम होने वाला है।

कांग्रेस सांसद शशि थरूर हो सकता है फायदा?

दरअसल, इससे कांग्रेस सांसद शशि थरूर को एक बड़ा फायदा हो सकता है। वैसे भी उनकी अपनी पार्टी के साथ मतभेदों की चर्चा आम है, ऐसे में केंद्र अगर समितियों का कार्यकाल बढ़ा देती है तो उनका कार्यकाल भी बढ़ जाएगा क्योंकि थरूर को पिछले साल 26 सितंबर को विदेश मामलों की स्थायी समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया था और कार्यकाल विस्तार से वह दो और वर्षों तक अध्यक्ष पद पर रह सकते हैं।

कितनी हैं संसद समितियां?

वर्तमान में 24 स्थायी समितियां हैं, जिनमें से प्रत्येक में 31 सदस्य होते हैं। इसमें से 21 लोकसभा से और 10 राज्यसभा से हैं। प्रत्येक समिति किसी विशिष्ट मंत्रालय या विभाग की कार्यवाही, बजट और नीतियों की निगरानी करती है।

अध्यक्षों का नामांकन लोकसभा अध्यक्ष और राज्यसभा के सभापति की ओर से किया जाता है, जबकि सदस्यों का चयन राजनीतिक दलों से प्राप्त नामांकन के आधार पर किया जाता है।

स्थायी समितियों का हर साल पुनर्गठन किया जाता है और नए सदस्यों के आने से अक्सर समितियों की निरंतरता बाधित होती है। ऐसी चुनौतियों को देखते हुए, विपक्षी सदस्य विधेयकों, रिपोर्टों और मुद्दों की गहन जांच के लिए समितियों के कार्यकाल में विस्तार की मांग कर रहे हैं।

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