EC का नया प्लान, साल में केवल दो बार होंगे उपचुनाव; जानें देश को क्या होगा फायदा
एक राष्ट्र-एक चुनाव पर संसदीय समिति ने उपचुनावों को लेकर महत्वपूर्ण सिफारिश की है। राज्यों के सुझाव के बाद समिति ने साल में केवल दो बार उपचुनाव कराने का प्रस्ताव रखा है जिससे हर छह महीने में एक बार ही उपचुनाव होंगे। इस सुझाव से चुनाव आयोग राज्य सरकार और राजनीतिक दलों को विकास कार्यों पर ध्यान केंद्रित करने का अधिक समय मिलेगा।

अरविंद पांडेय, जागरण, नई दिल्ली। बार- बार होने वाले आम चुनावों के साथ ही देश को अब लगभग हर महीने होने वाले उपचुनावों से भी छुट्टी मिल सकती है। एक राष्ट्र- एक चुनाव पर गठित संसदीय समिति ने राज्यों से मिले सुझाव के बाद उपचुनावों को भी अब साल में सिर्फ दो बार कराने की सिफारिश को शामिल कर लिया है।
इस दौरान प्रत्येक छह महीने में एक बार ही उपचुनाव होंगे। अच्छी बात यह है कि एक देश एक चुनाव पर अलग मत रखने वाले राज्य भी इससे सहमत होते दिख रहे हैं। लोक प्रतिनिधित्व कानून के तहत लोकसभा, विधानसभा व विधान परिषद की खाली हुई सीटों को छह महीने से अधिक अवधि तक रिक्त नहीं रखा जा सकता है।
उपचुनाव के लिए बनेगा कार्यक्रम
ऐसे में उपचुनाव का कार्यक्रम भी कुछ इस तरह बनाया जाएगा कि साल में दो बार ही इसकी जरूरत पड़े। समिति से जुड़े सदस्यों के मुताबिक इस मुद्दे को सबसे पहले हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री ने रखा और कहा कि जब समिति देश भर में सभी चुनावों को एक साथ कराने की बात कर रही है, तो उसे उपचुनाव को भी इसके दायरे में लाना चाहिए।
इसके बाद तो यह सुझाव कई और राज्यों और विधि विशेषज्ञों की ओर से भी दिए गए। समिति से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक एक राष्ट्र-एक चुनाव में अब इस बिंदु को प्रमुखता से शामिल किया गया है। साथ ही समिति इसे लेकर अपनी सिफारिश भी देगी।
क्या है रिपोर्ट में
समिति यह बताएगी कि मौजूदा समय में उपचुनाव की क्या स्थिति है। एक रिपोर्ट के मुताबिक अकेले वर्ष 2024 में ही करीब 28 उपचुनाव हुए थे। इनमें लोकसभा व विधानसभा के अतिरिक्त विधानसभा परिषद के भी चुनाव शामिल थे।
इस लिहाज से देश में हर महीने में लगभग दो उपचुनाव हुए थे। वहीं वर्ष 2025 में भी अब तक पांच उपचुनाव हो चुके है। इनमें जनवरी में तमिलनाडु व उत्तर प्रदेश में, फरवरी में तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में, मार्च में महाराष्ट्र में विधान परिषद का, अप्रैल में आंध्र प्रदेश में व मई में गुजरात, केरल, पंजाब व पश्चिम बंगाल में उपचुनाव हुए है।
इस पहल से यह मिलेगा लाभ
इस पहल का सबसे बड़ा लाभ यह मिलेगा कि देश हर समय चुनाव के मोड में नहीं रहेगा। अभी हर महीने होने वाले इन उपचुनाव के चलते चुनाव आयोग, राज्य सरकार और राजनीतिक दल चुनाव में ही फंसे रहते है।
बेहतर करने का मिलेगा मौका
इससे उन्हें खुद को सशक्त बनाने या फिर विकास कार्यों को गति देने के लिए समय नहीं मिल पाता है। ऐसे में प्रत्येक छह महीने में एक बार ही उपचुनावों के होने अब उन्हें चुनाव के इतर कुछ बेहतर करने का समय मिलेगा।
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