चीन की धरती से पाकिस्तान को संदेश... पीएम मोदी ने चिनफिंग के सामने उठाया ये मुद्दा, ड्रैगन ने कहा- 'हम तैयार'
चीन के तियानजिन में SCO सम्मेलन के दौरान पीएम मोदी और शी चिनफिंग की मुलाकात हुई। पिछले एक साल में यह उनकी दूसरी बैठक है। पीएम मोदी ने शी चिनफिंग को 2026 में भारत में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए आमंत्रित किया जिस पर चिनफिंग ने समर्थन का भरोसा दिया। दोनों नेताओं ने आपसी सहयोग और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा की।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। चीन के तियानजिन में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग की मुलाकात हुई। यह दोनों नेताओं की पिछले एक साल में दूसरी बैठक है। पिछली बार अक्टूबर 2024 में कजान में मुलाकात हुई थी।
भारतीय विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने बताया कि बैठक में पीएम मोदी ने शी चिनफिंग को 2026 में भारत में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए आमंत्रित किया। इस पर चिनफिंग ने धन्यवाद देते हुए भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता को पूरा समर्थन देने का भरोसा दिया।
किन-किन मुद्दों पर हुई बात?
बैठक में वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर भी बात हुई। पीएम मोदी ने चीन की मौजूदा SCO अध्यक्षता का समर्थन किया और तियानजिन सम्मेलन के लिए शुभकामनाएं दीं। दोनों नेताओं ने माना कि भारत और चीन की अर्थव्यवस्था वैश्विक व्यापार को स्थिर करने में अहम भूमिका निभा सकती है।
इस दौरान आपसी व्यापार घाटा कम करने, निवेश को बढ़ाने और नीतियों में पारदर्शिता लाने पर सहमति बनी। दोनों नेताओं के बीच सीमा मुद्दे पर भी चर्चा हुई। पीएम मोदी ने कहा कि सीमा पर शांति और स्थिरता जरूरी है ताकि रिश्ते सहज रूप से आगे बढ़ सकें।
आतंकवाद के खिलाफ भारत-चीन साथ
दोनों नेताओं ने पिछले साल हुए सफल डिसएंगेजमेंट की सराहना की और तय किया कि आगे भी बातचीत और मौजूद तंत्र से शांति बनाए रखी जाएगी। इसके अलावा, दोनों ने आतंकवाद से लड़ने, सीमा पार पर सहयोग और लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने जैसे मुद्दों पर भी चर्चा की।
शी चिनफिंग ने रिश्ते मजबूत करने के लिए चार सुझाव दिए
- रणनीतिक संवाद बढ़ाना और आपसी भरोसा गहरा करना।
- सहयोग और संपर्क बढ़ाना।
- दोनों देशों के लिए विन-विन नतीजे सुनिश्चित करना।
- बहुपक्षीय मंचों पर मिलकर काम करना।
पीएम मोदी ने किया स्वागत
पीएम मोदी ने इन सुझावों का स्वागत किया और कहा कि भारत-चीन प्रतिस्पर्धी नहीं बल्की साझेदार हैं। दोनों नेताओं ने सहमति जताई कि उनके साझा हित मतभेदों से कहीं बड़े हैं और मतभेदों को विवाद में नहीं बदलना चाहिए।
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