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    एनपीएस में बड़ा बदलाव: बैंकों को पेंशन फंड स्थापित करने की छूट, नए नियम में और क्या-क्या?

    Updated: Thu, 01 Jan 2026 08:22 PM (IST)

    पीएफआरडीए ने एनपीएस में बड़े सुधारों की घोषणा की है, जिससे अब अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक स्वतंत्र रूप से पेंशन फंड स्थापित कर परिसंपत्तियों का प्रबंधन कर ...और पढ़ें

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    एनपीएस में बड़ा बदलाव

    जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) को अधिक प्रतिस्पर्धी, पारदर्शी और इस पर भरोसा करने वाले ग्राहकों के हितों को सुरक्षित बनाने की दिशा में पेंशन फंड नियामक व विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए) ने नए साल की शुरुआत में बड़े नीतिगत सुधारों की घोषणा की है।

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    इन सुधारों से अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों (एससीबी) को अब स्वतंत्र रूप से पेंशन फंड स्थापित कर पेंशन परिसंपत्तियों को स्वतंत्र तरीके से प्रबंधन करने की छूट दे दी है। वित्त मंत्रालय का कहना है कि इससे पेंशन सेक्टर में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और नये तरह की सोच आने से ग्राहकों को भी फायदा होगा।

    नये सुधारों से ग्राहकों को बेहतर रिटर्न मिलने की संभावना बढ़ने का दावा किया गया है। सरकार की तरफ से दी गई सूचना के मुताबिक मौजूदा नियामकीय बाधाओं को दूर करने वाले इस फ्रेमवर्क को पीएफआरडीए बोर्ड ने सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है।

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    बैंकों को स्वतंत्र पेंशन फंड स्थापित करने की छूट मिली

    नए नियमों के तहत नेट वर्थ, बाजार पूंजीकरण और आरबीआई के प्रूडेंशियल मानकों पर आधारित पात्रता मानदंडों को पूरा करने पर ही पेंशन फंड स्पॉन्सर बनने की अनुमति बैंकों को दी जाएगी। इससे केवल वित्तीय रूप से मजबूत और आधारभूत तौर पर सुरक्षित बैंक ही इस क्षेत्र में प्रवेश कर पाएंगे। इसके साथ ही एनपीएस ट्रस्ट बोर्ड में नई नियुक्तियां भी की गई हैं।

    एसबीआई के पूर्व चेयरमैन दिनेश कुमार खारा को चेयरपर्सन बनाया गया है जबकि यूटीआई एएमसी की पूर्व अधिशासी वाइस प्रेसिडेंट स्वाति अनिल कुलकर्णी और डॉ. अरविंद गुप्ता, सह-संस्थापक एवं प्रमुख (डिजिटल इंडिया फाउंडेशन) सामान्य ट्रस्टी होंगे।

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    एसबीआइ के पूर्व चेयरमैन खारा की नियुक्ति को पूरे पेंशन सिस्टम में गवर्नेंस की स्थिति को बेहतर बनाने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    इसके साथ ही पीएफआरडीए ने 1 अप्रैल 2026 से निवेश प्रबंधन शुल्क (आईएमएफ) की नई स्लैब-आधारित व्यवस्था लागू करने का फैसला किया है। सरकारी क्षेत्र के कुछ स्कीमों में शुल्क अपरिवर्तित रहेगा लेकिन गैर-सरकारी क्षेत्रों (एनजीएस) के सब्सक्राइबर्स के लिए दरें काफी कम हो जाएंगी।

    निवेश प्रबंधन शुल्क की नई स्लैब-आधारित व्यवस्था लागू होगी

    यह कदम बाजार की जरूरत को देखते हुए किया गया है और इससे एनपीएस को कारपोरेट सेक्टर, रिटेल व गिग इकोनमी में विस्तार देने में मदद मिलेगी।

    अनौपचारिक सेक्टर और युवाओं के बीच भी एनपीएस को लोकप्रिय बनाने में मदद मिलेगी। पीएफआरडीए का कहना है कि ये सुधार एनपीएस को अधिक प्रतिस्पर्धी, सुशासित और लचीला बनाएंगे, जिससे सब्सक्राइबर्स को बेहतर रिटायरमेंट परिणाम और वृद्धावस्था में मजबूत आय सुरक्षा मिलेगी।

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    यहां बताते चलें कि एनपीएस में कोई स्थाई रिटर्न का इंतजाम नहीं होता बल्कि यह ग्राहकों की तरफ से पसंद किये गये विकल्पों के आधार पर तय होता है। शेयरों में निवेश का विकल्प चुनने पर ग्राहकों को ज्यादा रिटर्न मिलने की संभावना है लेकिन यहां जोखिम भी होता है।

    पीएफआरडीए ने अब 100 फीसद तक फंड की राशि को इक्विटी में निवेश की अनुमति दे रखी है। इसके अलावा सरकारी बांड्स, कारपोरेट बांड्स आदि कम जोखिम वाले भी विकल्प हैं।