Trending

    Move to Jagran APP
    pixelcheck
    विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

    बारिश-लैंडस्लाइड से हिमाचल, J&K और उत्तराखंड में क्यों मचा है हाहाकार? आंकड़ों ने चौंकाया

    Updated: Fri, 29 Aug 2025 09:12 PM (IST)

    उत्तर भारत के जम्मू-कश्मीर हिमाचल और उत्तराखंड में आपदाओं से जान-माल का भारी नुकसान हुआ है। भारी वर्षा से नदियां उफान पर हैं और बादल फटने भूस्खलन व बाढ़ से लोगों की जानें गई हैं। हिमाचल प्रदेश में पिछले तीन वर्षों में बादल फटने और भूस्खलन की घटनाएं दोगुनी से ज्यादा हुई हैं। जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड के हालात भी खराब हैं।

    Hero Image
    पहाड़ों में कुदरत के कहर ने बढ़ाई चिंता।

    टीम जागरण, नई दिल्ली। उत्तर भारत के तीन पर्वतीय राज्यों जम्मू-कश्मीर, हिमाचल और उत्तराखंड में पिछले कुछ समय से आई आपदाओं ने जान और माल दोनों को ही काफी नुकसान पहुंचाया है। भारी वर्षा जारी रहने के कारण अभी भी इन तीनों राज्यों में नदियां उफान पर हैं। बादल फटने, भूस्खलन और बाढ़ आने से लोगों की जानें गई हैं।

    विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

    सबसे ज्यादा खराब हालात हिमाचल प्रदेश के हैं। बीते तीन वर्षों के आंकड़े भी इसकी गवाही दे रहे हैं। जिनके अनुसार बादल फटने, बाढ़ आने और भूस्खलन की घटनाएं बीते वर्ष के मुकाबले दो गुना से ज्यादा बढ़ी हैं। जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड के हालात भी बेहद खराब हैं।

    हिमाचल में मचा हाहाकार

    हिमाचल में पिछले तीन वर्ष में बादल फटने एवं भूस्खलन की घटनाएं बढ़ी हैं। जिससे राज्य के बुनियादी ढांचे को काफी नुकसान पहुंचा है और लोगों की जानें भी गई हैं। प्रदेश में इस वर्ष मानसून सीजन में अब तक 42 बार बादल फटे और 86 स्थानों पर भूस्खलन हुआ है। लाहुल स्पीति में सबसे ज्यादा 52 बार बाढ़ आई है। कुल्लू में 15, शिमला में 14 और मंडी में 12 स्थानों में भूस्खलन हुआ। वहीं मंडी जिले में 18 बार बादल फटे हैं।

    जलवायु परिवर्तन के कारण पर्वतीय क्षेत्रों में बादल फटने की घटनाएं बढ़ रही हैं। प्रदेश की भौगोलिक स्थिति भी बादल फटने और भूस्खलन के लिए जिम्मेदार है क्योंकि यह क्षेत्र पहाड़ी है और भारी वर्षा के कारण जमीन धंसने और मलबा गिरने की आशंका बढ़ जाती है।

    प्रदेश में बादल फटने, बाढ़ व भूस्खलन की घटनाएं

    बादल फटे- 2023 में 27 बार, 2024 में 12 बार और 2025 में 42 बार।

    बाढ़- 2023 में 83 बार, 2024 में 39 बार और 2025 में 90 बार।

    भूस्खलन- 2023 में 5502 बार, 2024 में 46 बार और 2025 में 86 बार।

    (नोट-सभी आंकड़े राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार।)

    जम्मू-कश्मीर में वर्षा से ध्वस्त हो गए तमाम रिकॉर्ड

    जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में रविवार रात से बुधवार शाम तक हुई वर्षा ने तमाम रिकार्ड ध्वस्त कर दिए और इस वजह से प्रदेश में ऐसी तबाही बरसी कि प्रदेश का आधारभूत ढांचा चरमरा गया। राजमार्ग समेत दर्जनों सड़कें और पुल बह गए और और रेल यातायात भी ध्वस्त होता नजर आया।

    खासतौर पर जम्मू और ऊधमपुर में इंद्रदेव अधिक कुपित नजर आए और मंगलवार 26 अगस्त को सुबह 8.30 बजे से बुधवार सुबह 8.30 तक पूरे पश्चिमी हिमालयी क्षेत्रों में वर्षा के सर्वकालिक रिकार्ड ध्वस्त हो गए।

    ऊधमपुर में इस दौरान 630 एमएम और जम्मू में 300 एमएम वर्षा रिकार्ड की गई। इससे चिनाब, तवी और झेलम जैसी प्रमुख नदियां और नाले तीन दिन दिन तक लगातार खतरे के निशान से ऊपर रहे और लगभग 45 लोगों को जान गंवानी पड़ी। इससे पूर्व किश्तवाड़ के चशोती में मचैल माता यात्रा मार्ग पर बादल फटने से आई तबाही के कारण 70 लोगों की मौत हो गई और दर्जनों शव अभी बरामद नहीं हो पाए हैं।

    उत्तराखंड में पिछले वर्ष के मुकाबले दो गुना से ज्यादा भूस्खलन की घटनाएं

    उत्तराखंड इस वर्षाकाल में जगह-जगह भूस्खलन का दंश झेल रहा है। राज्य के 11 जिलों देहरादून, रुदप्रयाग, पिथौरागढ़, चमोली, चंपावत, उत्तरकाशी, बागेश्वर, पौड़ी, नैनीताल, अल्मोड़ा व हरिद्वार में चार मई से अब तक बड़े भूस्खलनों की 63 घटनाएं हो चुकी हैं।

    उत्तराखंड आपदा प्रबंधन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार बड़े भूस्खलनों में जान-माल का काफी नुकसान हुआ है। उत्तरकाशी के धराली और चमोली के थराली में आई आपदा इसमें प्रमुख है।

    हालांकि राज्य के सभी जिलों में छोटे-छोटे भूस्खलन की संख्या ढाई हजार से अधिक है। पिछले वर्ष राज्य में मई से अगस्त तक बड़े भूस्खलनों की 40 घटनाएं हुई थीं, जबकि छोटे-छोटे भूस्खलन की संख्या 1800 से 2000 के बीच थी।

    यह भी पढ़ें- बारिश व भूस्खलन से ट्रैक को हुआ कई जगह नुकसान, ट्रेनों के पहिए थमे, चार दिन से जम्मू फंसे लोग