नई दिल्ली, जेएनएन। यमुना प्रदूषण मामले में सुप्रीम कोर्ट में एक नई अर्जी दाखिल हुई है, जिसमें दिल्ली में पुराने रेलवे पुल से लेकर वजीराबाद पुल तक यमुना घाट पर प्रदूषण और अवैध निर्माण का मुद्दा उठाया गया है। अर्जी में यमुना घाट पर झुग्गी बस्तियों को दूसरी जगह स्थानांतरित करने और अवैध निर्माण हटाने की मांग की गई है। सुप्रीम कोर्ट में यह अर्जी वकील जीतेंद्र सिंह ने दाखिल की है। अर्जी में कोर्ट से यमुना नदी प्रदूषण मामले में उन्हें भी याचिकाकर्ता पक्षकार की तरह जोड़ने का आग्रह किया गया है।

याचिका में कहा गया है कि अभी हाल में वे निगमबोध श्मशान घाट से जुड़े यमुना के घाटों पर गए थे। इस दौरान उन्होंने देखा कि विशेष रूप से पुराने रेलवे पुल से लेकर वजीराबाद पुल के बीच पूरे यमुना घाट पर झुग्गी बस्तियों का अवैध कब्जा है। इन झुग्गी बस्तियों में रहने वालों ने वहां अवैध निर्माण कर लिया है। अर्जीकर्ता को यह भी पता चला है कि वहां यमुना नदी के किनारे शवों का अंतिम संस्कार भी होता है। वहां अवैध कब्जा कर रहने वाले लोगों की इस गैरकानूनी गतिविधि पर किसी तरह की रोकटोक नहीं दिखती।

सीधे कचरा और अपशिष्ट जाने से यमुना प्रदूषित हो रही है। अर्जी में कहा गया है कि इंप्रूवमेंट एंड क्लियरेंस एक्ट 1956 की धारा 2 के तहत स्लम क्लियरेंस को परिभाषित किया गया है। इसका मतलब है कि स्लम एरिया की बि¨ल्डग को ढहा कर या हटा कर साफ किया जाएगा। ऐसे में यमुना घाट से झुग्गियों को तत्काल हटाए जाने की जरूरत है। अवैध कब्जेदारों के साथ रियायत करने की जरूरत नहीं है, क्योंकि इससे अवैध कब्जेदारों का मनोबल बढ़ेगा।

चूंकि स्लम एरिया एक्ट में अवैध कब्जा साफ करने की व्यवस्था दी गई है तो ऐसे में संबंधित अथारिटी को यमुना घाट पर बनी अवैध झुग्गियों को स्थानांतरित करने का निर्देश दिया जाए। मालूम हो कि सुप्रीम कोर्ट ने नदियों के प्रदूषण पर स्वत: संज्ञान लेकर सुनवाई शुरू की है। इस क्रम में कोर्ट सबसे पहले यमुना नदी के प्रदूषण पर सुनवाई कर रहा है। कोर्ट ने यमुना प्रदूषण पर केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से रिपोर्ट भी मांगी है। यमुना प्रदूषण मामले में पांच फरवरी को सुनवाई होनी है। 

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