Cloud Burst: पहाड़ों में बादल फटने का कहर है जारी, जानें आकाश से क्यों आती है ये आपदा
Cloud Burst पहाड़ों में बादल फटने की घटनाएं आम होती हैं। इसे फ़्लैश फ्लड (flash flood) कहकर भी बुलाया जाता है। बादलों के फटने से जान-माल को काफी नुकसा ...और पढ़ें

नई दिल्ली, जागरण डिजिटल डेस्क। हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) और उत्तराखंड (Uttarakhand) में बादल फटने (Cloud Burst) के कारण प्राकृतिक आपदा आ गई है।भारी बारिश होने की वजह से तबाही का मंजर है। मंडी जिला में मूसलाधार वर्षा, भूस्खलन व बादल फटने से एक बच्ची की मौत हो गई है और करीब 15 लोग लापता हैं।
ऐसा ही कुछ हाल आपदा की दृष्टि से संवेदनशील उत्तराखंड का भी है। शुक्रवार को देर रात बादलों ने उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में जमकर कहर बरपाया। देर रात देहरादून (Dehradun) के मालदेवता में बादल फटने से सात घरों के बह जाने की सूचना है। वहीं सरखेत से 40 लोगों का रेस्क्यू किया गया है।
बादल फटना क्या होता है
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि यदि किसी स्थान पर एक घंटे के दौरान 10 सेमी यानी 100 मिमी से अधिक बारिश होती है तो इसे बादल फटना कहते हैं। आसान शब्दों में कहे तो एक जगह पर एक साथ अचानक बहुत बारिश हो जाना बादल फटना कहलाता है। इसे फ़्लैश फ्लड (flash flood) कहकर भी बुलाया जाता है।
बादल फटने की घटना तब होती है जब पानी से भरे बादल पहाड़ों के बीच आकर फंस जाते हैं क्योंकि पहाड़ों की ऊंचाई की वजह से ये आगे बढ़ नहीं पाते हैं। पानी की बूंदे एक साथ आपस में जमती जाती हैं।
ये सभी बादल नमीं वाले होते हैं। इनका घनत्व काफी ज्यादा होता है। जब ऐसे बादल फटते हैं तो इस स्थिति में कई लाख लीटर पानी बरसात के रूप में धरती पर गिरता है। इस दौरान लगभग 100 मिलीमीटर प्रति घंटा की दर से बारिश होती है।
बादल फटने के कारण
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि मॉनसून के समय में नमीं वाले बादल उत्तर दिशा की ओर बढ़ते जाते हैं और हिमालय पर्वत इनके रास्ते पड़ जाता है और ये आगे बढ़ नहीं पाते हैं और एक ही जगह जमा होने लगते हैं। इसलिए मॉनसून के समय में और पहाड़ों में बादल फटने की घटनाएं अकसर सुनने में आती हैं।
इसके अलावा, इनके फटने की एक और वजह है और वह ये कि ये बादल गर्मी बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं कर पाते हैं। ऐसे में अगर गर्म हवाएं इन्हें छू भी ले तो इनके फटने की आशंकाएं और भी तेज हो जाती हैं।

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