नवोदय विद्यालय खोलने पर राजनीतिक रार... केंद्र और तमिलनाडु के बीच होगी बैठक, क्या है विवाद?
केंद्र और तमिलनाडु सरकार जवाहर नवोदय विद्यालयों को खोलने के 39 साल पुराने विवाद को सुलझाने के लिए जल्द मिलेंगे। सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद केंद ...और पढ़ें

शिक्षा मंत्रालय और तमिलनाडु राज्य सरकार के बीच यह बैठक अगले हफ्ते सकती है (प्रतीकात्मक तस्वीर)
जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। जवाहर नवोदय विद्यालयों को खोलने के 39 साल पुराने विवाद को सुलझाने के लिए केंद्र और तमिलनाडु राज्य सरकार जल्द ही आमने-सामने बैठेगी। सुप्रीम कोर्ट की दखल के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने तमिलनाडु राज्य सरकार को औपचारिक रूप से पत्र लिखकर प्रत्येक जिलों में खोले जाने वाले नवोदय विद्यालय का प्रस्ताव लेकर आने को कहा है।
माना जा रहा है कि शिक्षा मंत्रालय और तमिलनाडु राज्य सरकार के बीच यह बैठक अगले हफ्ते सकती है। वैसे भी सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में दो हफ्तों के भीतर ही स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई के दौरान तमिलनाडु सरकार को जवाहर नवोदय विद्यालयों को खोलने के लिए जमीन मुहैया न कराने के मुद्दे पर जमकर फटकारा था और कहा कि वह माय स्टेट-माय स्टेट जैसे रवैया न अपनाए।
प्रत्येक जिलों में एक-एक स्कूल खोले जाने है
जवाहर नवोदय खोलने के मुद्दे को भाषा विवाद न बनाएं। देश में जवाहर नवोदय विद्यालयों को खोलने की शुरूआत 1986-87 में की गई थी। इसके तहत प्रत्येक जिलों में एक-एक स्कूल खोले जाने है। इसके लिए राज्य को प्रत्येक जिले में 30 एकड़ भूमि मुहैया करानी थी। ये विद्यालय पूरी तरह से आवासीय विद्यालय थे। गौरतलब है कि पहले नवोदय विद्यालय में त्रिभाषा फार्मूले में हिंदी भी अनिवार्य थी। जबकि तमिलनाडु में कानूनी रूप से दो-भाषा नीति लागू है।
हालांकि शिक्षा मंत्रालय की माने तो वह राज्य पर कोई भाषा थोप नहीं रहे है बल्कि त्रिभाषा फार्मूले के तहत किसी भी दो भारतीय भाषा पढ़ाने की बात कह रहे है। इनमें कन्नड, तेलगू या फिर कोई और भारतीय भाषा हो सकती है। मंत्रालय से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक तमिलनाडु ने पीएम-श्री स्कूलों की तरह उस समय भी त्रिभाषा फार्मूले के मुद्दे पर जवाहर नवोदय विद्यालयों को खोलने की विरोध किया था।
हालांकि बाद में यह मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै पीठ के पास पहुंचा, जहां हाईकोर्ट ने तमिलनाडु सरकार की आपत्तियों को खारिज कर दिया। बाद में इसके खिलाफ तमिलनाडु सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। सुप्रीम कोर्ट ने पिछले दिनों सुनवाई करते हुए इस मुद्दे को भाषा विवाद की जगह ग्रामीण छात्रों को मिलने वाली बेहतर शिक्षा से जोड़कर देखना चाहिए। कोई विवाद है तो आपस में बैठकर दोनों सुलझाए। कोई रास्ता निकाले।

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