करुणा और सेवा की साकार प्रतिमूर्ति थीं मदर टेरेसा
ममता, करुणा, दया और सेवाभाव की प्रतिमूर्ति मदर टेरेसा का जन्म आज के ही दिन 26 अगस्त, 1910 में अल्बीनिया में हुआ था। उनका नाम अग्नेसे गोंकशे बोजिशयु था। बचपन से ही उनका झुकाव समाज सेवा की ओर था, इसके लिए उन्होंने रोमन कैथोलिक नन बनने का रास्ता अपनाया। 18
नई दिल्ली। ममता, करुणा, दया और सेवाभाव की प्रतिमूर्ति मदर टेरेसा का जन्म आज के ही दिन 26 अगस्त, 1910 में अल्बीनिया में हुआ था। उनका नाम अग्नेसे गोंकशे बोजिशयु था। बचपन से ही उनका झुकाव समाज सेवा की ओर था, इसके लिए उन्होंने रोमन कैथोलिक नन बनने का रास्ता अपनाया। 18 साल की उम्र में उन्होंने सिस्टर आफ लोरेटो को ज्वाइन कर लिया।
मदर टेरेसा ने 1950 में कोलकाता में मिशनरीज अॅाफ चैरिटी की स्थापना की। इसके जरिये उन्होंने गरीबों, बीमार व अनाथ लोगों की मदद की। उन्होंने उन कुष्ठ रोगियों को गले लगाया, जिन्हें समाज ठुकरा चुका था। साथ ही, टीबी के मरीजों की भी सेवा की। सामाजिक कार्यों की वजह से उन्हें 1979 में नोबल शांति पुरस्कार मिला। हार्ट अटैक की वजह से पांच सितंबर, 1997 को उनका निधन हो गया।
ईसाई धर्म के मुताबिक, पोप जॉन पॉल ईसाई धर्मगुरुओं को संत घोषित करते हैं। इसी क्रम में मदर टेरेसा को धन्य घोषित किया गया। उन्होंने आजीवन दीन-दुखियों की सेवा की।
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