राज्य ब्यूरो, श्रीनगर। कश्मीर में सुधरते हालात के बीच शनिवार से वादी में मोबाइल सेवा को भी बहाल किया जा सकता है। इसकी शुरुआत पोस्टपेड सेवा की बहाली से होगी। प्रीपेड मोबाइल सेवा और इंटरनेट फिलहाल बंद रहेगा। पूरी वादी में करीब 66 लाख मोबाइल फोन उपभोक्ता हैं। उनमें से लगभग 40 लाख पोस्टपेड ही इस्तेमाल करते हैं।

राज्य प्रशासन ने वादी में अफवाहों को रोकने के लिए चार अगस्त की मध्यरात्रि को सभी मोबाइल, लैंडलाइन और इंटरनेट सेवा को एहतियातन बंद कर दिया था। वादी में लैंडलाइन सेवा की बहाली की प्रक्रिया 17 अगस्त को शुरू की गई थी। गत चार सितंबर को वादी में लैंडलाइन सेवा को पूरी तरह बहाल कर दिया गया। घाटी में करीब 50 हजार लैंडलाइन में से सिर्फ 15-16 हजार ही घरेलू उपभोक्ताओं के लिए हैं।

एक हफ्ते से किया जा रहा था विचार

संबंधित अधिकारियों ने बताया कि वादी में मोबाइल सेवा को बहाल करने के लिए बीते एक सप्ताह से विचार किया जा रहा है। व्यापारिक, सामाजिक, राजनीतिक और अन्य संगठनों के अलावा आम लोगों द्वारा मोबाइल सेवा को बहाल करने की लगातार की जा रही मांग को देखते हुए ही यह कदम उठाया जा रहा है। इसके अलावा हालात भी अब लगभग सामान्य हो चुके हैं।

पोस्टपेड मोबाइल सेवा होगी बहाल

उन्होंने बताया कि संभवत: शनिवार को पोस्टपेड मोबाइल सेवा बहाल हो जाएगी। यह सेवा भी लैंडलाइन की तरह चरणबद्ध तरीके से शुरू होगी। इसके अलावा संबंधित उपभोक्ताओं के सत्यापन की प्रक्रिया को भी अपनाया जाएगा। कुछ दिनों के बाद प्री-पेड मोबाइल सेवा को भी शुरू किया जाएगा। इंटरनेट सेवाओं पर रोक हटाए जाने के संदर्भ में उन्होंने किसी तरह की प्रतिक्रिया से बचते हुए कहा कि इस बारे में अभी कोई जानकारी नहीं है।

पर्यटकों के बढ़ावे के लिए मोबाइल सेवा जरूरी

यहां यह बताना असंगत नहीं होगा कि दो दिन पहले ही राज्य सरकार ने वादी में पर्यटकों के लिए अगस्त में जारी कई गई ट्रैवल एडवाइजरी को वापस लिया है। इस एडवाइजरी को वापस लेने के बाद पर्यटन जगत से जुड़े स्थानीय लोगों ने वादी में पर्यटकों की आमद की उम्मीद जताते हुए मोबाइल सेवाओं को भी बहाल करने की मांग की थी। पर्यटन जगत से जुड़े लोगों के मुताबिक कश्मीर आने वाले पर्यटक अपने परिजनों से संपर्क बनाए रखने के लिए किसी तरह की दिक्कत महसूस न करें। इसलिए मोबाइल सेवा की बहाली जरूरी है।

मौजूदा समय में कश्मीर में बीएसएनएल के 80 हजार पोस्टपेड उपभोक्ता हैं। इनमें से उच्च प्रशासनिक अधिकारियों और सुरक्षाबलों के करीब छह हजार मोबाइल ही फिलहाल चल रहे हैं।

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Posted By: Dhyanendra Singh

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