NH से जुड़े मध्यस्थता मामलों की हर 15 दिन में समीक्षा करेगा सड़क परिवहन मंत्रालय, राज्यों को भेजा निर्देश
सड़क परिवहन मंत्रालय ने राष्ट्रीय राजमार्गों से संबंधित मध्यस्थता मामलों की समीक्षा हर 15 दिन में करने का निर्णय लिया है। मंत्रालय ने राज्यों और लोक निर्माण विभागों को आदेश दिया है कि वे मध्यस्थता निर्णयों की जानकारी सात दिनों के भीतर मंत्रालय को दें और अपील दाखिल करने की 120 दिन की समयसीमा का पालन करें। इससे अपीलों में देरी से होने वाले नुकसान को रोका जा सकेगा।

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। राज्यों में राष्ट्रीय राजमार्गों (National Highway) से संबंधित मध्यस्थता के मामलों में विपरीत फैसला आने पर अदालतों में अपील में देरी के कारण हो रहे नुकसान से चिंतित सड़क परिवहन मंत्रालय ने अब इस तरह के सभी प्रकरणों की पाक्षिक आधार पर समीक्षा करने का फैसला किया है।
मंत्रालय ने सभी राज्यों और हाईवे निर्माण में किसी न किसी रूप में शामिल लोक निर्माण विभाग के मुख्य अभियंताओं को भेजी चिट्ठी में कहा है कि ऐसे मामले सामने आ रहे हैं जिसमें आर्बिट्रेशन अवार्ड यानी मध्यस्थता के मामलों के निपटारे के बाद अदालतों में अपील दाखिल करने में समय-सीमा का ध्यान नहीं रखा जा रहा है। इसके चलते अपील को बिना सुनवाई के खारिज कर दिया जा रहा है।
हर 15 दिन में की जाएगी समीक्षा
इसे रोकने के लिए राज्यों और उनके लोक निर्माण विभागों से कहा गया है कि मध्यस्थता वाले निर्णयों की सात दिन के भीतर मंत्रालय को अनिवार्य रूप से सूचना दी जाए। इसके साथ ही सभी मामलों की मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा हर 15 दिन में समीक्षा की जाएगी।
मंत्रालय ने राज्यों से कहा है कि वे अपील दाखिल करने के लिए 120 दिन की समय-सीमा का जरूर पालन करें ताकि मध्यस्थता के मामलों में विपरीत फैसला आने पर निर्धारित अविध में अपील दाखिल की जा सके। मंत्रालय ने ऐसी ही व्यवस्था एनएचएआइ जैसी अपनी एजेंसियों से भी करने के लिए कहा है।
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