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'फेल' फॉर्मूले को मिली NGT की मंजूरी, दिल्ली में पांच दिन चलेगा ऑड-ईवन

Publish Date:Thu, 09 Nov 2017 06:20 PM (IST) | Updated Date:Sat, 11 Nov 2017 01:29 PM (IST)
'फेल' फॉर्मूले को मिली NGT की मंजूरी, दिल्ली में पांच दिन चलेगा ऑड-ईवन'फेल' फॉर्मूले को मिली NGT की मंजूरी, दिल्ली में पांच दिन चलेगा ऑड-ईवन
दिल्ली में ऑड-ईवन फॉर्मूले की वापसी से आप कुछ हद तक खुश हो सकते हैं, क्योंकि इस दौरान आपको सड़कों पर ट्रैफिक कुछ कम मिलेगा।

नई दिल्ली, [स्पेशल डेस्क]। दिल्ली सरकार ने दिल्ली में स्मॉग से निपटने के लिए 13 से 17 नवंबर तक ऑड-ईवन स्कीम चालू करने का निर्णय लिया। एनजीटी ने शुक्रवार को इसे लेकर दिल्ली सरकार से सवाल-जवाब जरूर किया, लेकिन शनिवार को हुई सुनवाई में ऑड-ईवन पर रोक भी नहीं लगाई। इस बार ऑड-ईवन में दोपहिया वाहन भी शामिल रहेंगे। इसके अलावा किसी भी वाहन को इससे छूट भी नहीं दी जाएगी।

 

इस बार सिर्फ 5 दिन यानि 13 से 17 नवंबर तक ही ऑड-ईवन फॉर्मूला चालू रहेगा। वैसे बता दें कि ऑड-ईवन से प्रदूषण कम नहीं होता, ये हम नहीं कह रहे। टेरी (द एनर्जी एंड रिसोर्स इंस्टीट्यूट) के एसोसिएट डायरेक्टर सुमित शर्मा ने यह बात कही है। यही नहीं खुद केजरीवाल भी इस फॉर्मूले को फेल करार दे चुके हैं। सुमित शर्मा कहते हैं, ऑड-इवेन से प्रदूषण कम नहीं होगा। अप्रैल 2016 में जब पंद्रह दिन के लिए ऑड-इवेन लागू हुआ था, तो इसकी समीक्षा की थी। पता चला कि ऑड-इवेन की प्रदूषण कम करने की क्षमता ही नहीं है। इसीलिए उन 15 दिनों में भी सामान्य दिनों की तुलना में महज 4 से 7 फीसद प्रदूषण ही कम हुआ था। 

 

फेल फॉर्मूले पर केजरीवाल का दांव

जी नहीं, हम ऑड-ईवन फॉर्मूले को फेल नहीं बता रहे हैं। यह बात तो खुद दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने हाल ही में मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में एक कार्यक्रम में कही थी। केजरीवाल ने स्वीकार किया कि दिल्ली में वायु प्रदूषण कम करने के लिए लागू किया गया ऑड-ईवन फॉर्मूला फेल हो गया। वह रविवार 5 नवंबर को भोपाल के गांधी भवन में भोपाल के नागरिकों के साथ संवाद कार्यक्रम में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि वायु प्रदूषण बहुत कठिन मुद्दा बन गया है। इस पर काम बहुत सारे लोग कर रहे हैं, लेकिन समझ नहीं आ रहा है कि इससे कैसे निपटें। ऑड-ईवन फॉर्मूला भी सफल नहीं रहा।

 

 

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दो बार लगा ऑड-ईवन और रहा फेल

राजधानी दिल्ली में केजरीवाल सरकार बनने के बाद अब तक दो बार ऑड-ईवन फॉर्मूला लग चुका है। पहली बार 1 जनवरी से 15 जनवरी 2016 तक दिल्ली में इस फॉर्मूले का इस्तेमाल हुआ। इसके बाद 15 से 30 अप्रैल के बीच भी दिल्ली में ऑड-ईवन फॉर्मूला लगाया गया। लेकिन दोनों ही बार यह अपने मकसद में उस तरह से सफल नहीं रहा, जैसा इससे उम्मीदें लगाई जा रही थीं।

 

इंडियन पॉल्यूशन कंट्रोल एसोसिएशन की उप निदेशक डॉ. राधा गोयल ने बताया कि ऑड-इवेन यातायात व्यवस्था को सुचारू बना सकता है, लेकिन वायु प्रदूषण कम नहीं कर सकता। वैसे भी दिल्ली में प्रदूषण की एक वजह नहीं है। अगर सार्वजनिक व्यवस्था बेहतर हो तो लोग स्वयं निजी वाहन छोड़ेंगे। विदेश में ऐसा ही होता है।

 

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तो ऑड-ईवन लागू करने की क्या थी मजबूरी

इस बारे में दैनिक जागरण ने पूर्व मंत्री और आम आदमी पार्टी के बागी नेता कपिल मिश्रा से बात की। कपिल ने ऑड-ईवन फॉर्मूले को लागू करने को लेकर कहा कि यह केजरीवाल सरकार की ध्यान भटकाने की कोशिश है। उन्होंने कहा, जब तमाम एजेंसियां कह चुकी हैं कि 12 नवंबर तक दिल्ली से स्मॉग हट जाएगा, तो 13 नवंबर से ऑड-ईवन लागू करने की क्या जरूरत है। इसे पहले किया जाना चाहिए था।

 

 

ऑड-ईवन से होगा यह फायदा

दिल्ली में ऑड-ईवन फॉर्मूले की वापसी से आप कुछ हद तक खुश हो सकते हैं, क्योंकि इस दौरान आपको सड़कों पर ट्रैफिक कुछ कम मिलेगा। लेकिन इस बार इस खुशी की उम्र भी सिर्फ 5 दिन ही होगी। पिछले दोनों बार जब 15-15 दिन के लिए ऑड-ईवन लागू किया गया था तो दिल्ली की सड़कें खाली-खाली नजर आने लगी थीं। ट्रैफिक जाम की समस्या से भी लोगों को निजात मिली थी। इस बार भी ऐसा ही नजारा देखने को मिल सकता है, लेकिन सिर्फ 5 दिन के लिए। रही बात प्रदूषण पर इसके सकारात्मक असर की तो जब मुख्यमंत्री खुद ही इसे असफल बता चुके हैं तो फिर इस पर बहस की कोई गुंजाइश ही नहीं बचती है।

 

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4 दिन में केजरीवाल ने मारी पलटी

5 नवंबर को केजरीवाल ने भोपाल में कहा कि ऑड-ईवन फॉर्मूला भी प्रदूषण को रोक पाने में फेल रहा। और 4 दिन बार 9 नवंबर को उनकी दिल्ली सरकार राजधानी में एक बार फिर ऑड ईवन लागू करने की घोषणा करती है। ऐसे में सवाल यह है कि आखिर केजरीवाल सरकार एक फेल फॉर्मूले पर एक बार फिर क्यों दांव खेल रही है। इस बारे में दैनिक जागरण ने पर्यावरणविद् विमलेंदू झा से बात की। हालांकि विमलेंदू का कहना है कि ऐसे और भी कदम उठाए जाने की जरूरत है। वे मानते हैं कि ऑड-ईवन फॉर्मूले से फर्क तो पड़ेगा, लेकिन यह देर से उठाया गया कदम है। उन्होंने कहा, सरकारों को प्रदूषण रोकने के लिए ऐसे ही और कई कदम उठाने चाहिए।

 

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Web Title:Jagran Special on why Kejriwal Govt back with Odd Even Formula(Hindi news from Dainik Jagran, newsnational Desk)

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