नई दिल्ली। लाल किले की प्राचीर से पीएम मोदी ने बलूचिस्तान का नाम लेकर पाकिस्तान को संदेश दे दिया कि पहले आप अपने नागरिकों की स्वतंत्रता सुनिश्चित करें। पीएम के इस भाषण का असर भी हुआ। बौखलाए पाकिस्तान ने बलूच नेताओं को बातचीत के लिए बुलाया। अब चीन के रुख में भी बड़ा बदलाव नजर आता दिख रहा है।

सरकार द्वारा संचालित मीडिया ग्लोबल टाइम्स अब तक पाक अधिकृत कश्मीर को पाक प्रशासित कश्मीर के नाम से जिक्र करता था। लेकिन ग्लोबल टाइम्स ने दो बार पाक अधिकृत कश्मीर का जिक्र किया है। जिसे जानकार चीन की नीति में एक अहम परिवर्तन मान रहे हैं। पेपर में लिखा गया है कि कश्मीर के मुद्दे पर इस बात की संभावना बेहद ही कम है कि चीन भारत या पाकिस्तान का पक्ष लेगा।

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हाल ही में सरकार द्वारा संचालित पीपल डेली ने पाक अधिकृत कश्मीर में चीनी और पाकिस्तानी आर्मी के जवानों की गश्ती दल का एक फोटो छापा था, और कहा था कि दोनों देशों के जवान चीन-पाक सीमा पर अभ्यास कर रहे थे। लेकिन विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के बयान के चीन-पाकिस्तान इकॉनिमक कॉरिडोर(सीपीइसी) पर ऐतराज के बाद ग्लोबल टाइम्स का कहना है कि इस बात की संभावना बेहद ही कम है कि भारत के विरोध के बाद चीन सीपीइसी पर काम करना बंद कर देगा।

चीन इसके विपरीत भारत और पाकिस्तान से आर्थिक क्षेत्रों में ज्यादा सहयोग चाहता है। इन हालात में चीन निश्चित तौर पर भारत और पाकिस्तान के पक्ष में नहीं जाएगा। बल्कि वो तटस्थ भूमिका में रह सकता है। पेपर के हवाले से कहा गया है कि चीन का मत है कि पीओके में किसी तीसरे देश की व्यापारिक प्रवेश को रोकने के लिए भारत को भी आगे आना चाहिए। सीपीइसी के मुद्दे पर भारत को पूर्वाग्रह रहित होकर खुले दिमाग से सोचने की जरूरत है। कश्मीर से सटे पाक सीमा के पास भारत आधारभूत संरचना के द्वारा वो सीपीइसी तक पहुंच बना सकता है। और सीपीइसी के जरिए भारत सेंट्रल एशिया तक पहुंच बना सकता है।

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गिलगित-बाल्टिस्तान में पाकिस्तान का विरोध कर रह अवामी एक्शन कमेटी के कार्यकर्ताओं ने सीपीइसी को बंद करने को कहा है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि उन्हें पाकिस्तान सरकार से अधिकार चाहिए ऐसा न होने पर वो किसी भी कीमत पर सीपीइसी का निर्माण नहीं होने देंगे।

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Posted By: Lalit Rai