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    'आम आदमी माई फुट'... गिग वर्कर्स के शोषण के आरोप पर निवेशक बिखचंदानी का राघव चड्ढा पर तंज

    Updated: Sat, 03 Jan 2026 07:00 AM (IST)

    जाने-माने निवेशक और नौकरी.काम के संस्थापक संजीव बिखचंदानी ने गिग वर्कर्स पर चल रही बहस में हिस्सा लेते हुए जोमैटो के संस्थापक दीपेंद्र गोयल की गिग वर् ...और पढ़ें

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    गिग वर्कर्स के शोषण के आरोप पर निवेशक बिखचंदानी का राघव चड्ढा पर तंज (फोटो- एक्स)

    एएनआई, मुंबई। जाने-माने निवेशक और नौकरी.काम के संस्थापक संजीव बिखचंदानी ने गिग वर्कर्स पर चल रही बहस में हिस्सा लेते हुए जोमैटो के संस्थापक दीपेंद्र गोयल की गिग वर्कर्स की एक दिन की हड़ताल (बुधवार को) पर की गई टिप्पणियों की तारीफ की। साथ ही गिग वर्कर्स के शोषण का आरोप लगाने वाले आप सांसद राघव चड्ढा पर तंज कसते हुए कहा, 'आम आदमी माई फुट।

    'दीपेंद्र गोयल की एक्स पर पोस्ट के जवाब में बिखचंदानी ने लिखा, ''बहुत अच्छा लिखा दीपेंद्र गोयल। हर शब्द सच है। यह मानना मुश्किल है कि एक शैंपेन सोशलिस्ट (धनी व विलासितापूर्ण जिंदगी जीने वाला समाजवादी विचारक) जिसने एक फिल्म स्टार से शादी की, उदयपुर में डिजायनर शादी की और मालदीव में शादी की पहली सालगिरह मनाई, उसमें इतनी हिम्मत है कि वह गिग वर्कर्स के कथित शोषण पर घड़ियाली आंसू बहाए। आम आदमी माई फुट।''

    इससे पहले, गोयल ने गिग इकोनमी का बचाव करते हुए कहा था कि इसने मजदूरों के लिए सदियों की अनदेखी को खत्म कर दिया है। पहली बार वर्कर्स, डिलीवरी पार्टनर, राइडर्स और अन्य लोग बड़े पैमाने पर सीधे उपभोक्ताओं से बातचीत करते हैं। उन्होंने बताया कि इससे असमानता व्यक्तिगत हो जाती है, यही वजह है कि गिग इकोनमी के कारण बेचैनी और गरमागरम बहस होती है।

    उन्होंने कहा कि गिग वर्कर्स से पूर्व के दौर में अमीर लोग बिना किसी अपराधबोध के सुख-सुविधाओं का आनंद लेते थे क्योंकि मजदूर उनकी नजरों से दूर थे। आज हर डिलीवरी व्यवस्थागत असमानता को उजागर करती है। कुछ लोग सिस्टम का बचाव करते हैं क्योंकि ''वे इसे चुनते हैं'', जबकि अन्य लोग इसे शोषण बताते हुए बदलाव की मांग करते हैं। हालांकि, मुख्य मुद्दा भावनात्मक हिसाब-किताब है, न कि सिर्फ पालिसी।

    गौरतलब है कि आप के राज्यसभा सदस्य राघव चड्ढा ने 10-मिनट डिलीवरी एप्स पर बैन लगाने की मांग दोहराई थी। उन्होंने दावा किया कि यही कंपनियां गिग वर्कर्स पर अत्याचार कर रही हैं और उनके दम पर अपना मूल्यांकन बढ़ा रही हैं, जिससे सिर्फ कंपनियों को ही फायदा हो रहा है।