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    Indian Railway News Update: रेलवे इलेक्ट्रिक फॉल्ट की सटीक जानकारी देगा ‘स्काडा’

    By Sanjay PokhriyalEdited By:
    Updated: Mon, 05 Oct 2020 03:48 PM (IST)

    Indian Railway News Update स्काडा को तैयार करने में तीन मोडम और तीन सिमकार्ड ही मुख्य रूप से खरीदने की जरूरत हुई। मोडम खरीदने में 49 हजार रुपये खर्च हुए। हर मोडम को वाई-फाई से जोड़ा गया है।

    रेलवे के तीन युवा इंजीनियरों ने कम खर्च में तैयार किया सिस्टम।

    प्रदीप चौरसिया, मुरादाबाद। Indian Railway News Update रेलवे के तीन युवा इंजीनियरों ने इलेक्ट्रिक ट्रेन संचालन में खामियों का पता लगाने के लिए एक अनोखा सिस्टम तैयार किया है। बहुत ही कम खर्च में तैयार स्काडा (सुपरवाइजरी कंट्रोल एंडा डाटा एक्विजिशन) सिस्टम ट्रेन संचालन में बिजली आपूर्ति की खामियों की सटीक और त्वरित जानकारी देगा। मुरादाबाद रेल मंडल में नजीबाबाद और कोटद्वार (उत्तराखंड) के बीच इसका ट्रायल चल रहा है, जिसके प्रारंभिक नतीजे सफल रहे हैं।

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    रेलवे में आपातस्थिति में इलेक्ट्रिक इंजन नियंत्रण के लिए अभी भूमिगत आप्टिकल फाइबर केबल बिछाई जाती है। चिह्नित रेलवे स्टेशन पर लगे नियंत्रण सिस्टम को इसके जरिये जोड़ा जाता है। ओवरहेड इलेक्ट्रिक लाइन के क्षतिग्रस्त होने या दुर्घटना की स्थिति में यह तुरंत कंट्रोल रूम को सिग्नल भेजकर बिजली आपूर्ति को रोक देता है। रेलवे को एक किमी भूमिगत केबल बिछाने में तीन लाख रुपये खर्च करने पड़ते हैं। साथ ही इसके रखरखाव पर भी एक बड़ा खर्च हर माह आता है।

    इस खर्च को कम करने के लिए मुरादाबाद रेल मंडल में तैनात इंजीनियर प्रवर मंडल संकेत कुमार, दूरसंचार अभियंता नितिन कुमार और प्रवर मंडल विद्युत अभियंता (टीआरडी) जितेंद्र कुमार ने नया प्रयोग किया। उन्होंने मोडम और मोबाइल में लगने वाले सिम कार्ड को जोड़कर स्काडा सिस्टम तैयार किया। नजीबाबाद से कोटद्वार के बीच के तीन स्टेशनों पर स्काडा को ट्रैक्शन पावर कंट्रोल सिस्टम में लगाकर ट्रायल शुरू किया। प्रारंभिक नतीजे उत्साह बढ़ाने वाले हैं। अभी यह ट्रायल कुछ दिन और चलेगा। इसके बाद परीक्षण के लिए इसे रिसर्च डिजाइन एंड स्टैंडर्ड ऑर्गनाइजेशन (आरडीएसओ) भेजा जाएगा।

    ऐसे करता है काम : मोडम में सिम कार्ड लगाया गया है। इसके माध्यम से इंटरनेट नेटवर्क को इलेक्ट्रिक ट्रेन संचालित करने वाले ट्रैक्शन पावर कंट्रोल सिस्टम से जोड़ दिया जाता है। मंडल कंट्रोल रूम में बैठे नियंत्रक इसके सिग्नल के आधार पर इंजन को सीधे नियंत्रित कर सकते हैं। बिजली आपूर्ति बंद कर ट्रेन कहीं भी रोक सकते हैं। तार टूटने पर सिस्टम पलक झपकते ही बिजली आपूर्ति बंद कर देगा। साथ ही एक सब स्टेशन से बिजली गुल होने पर दूसरे स्थान से बिजली की आपूर्ति चालू कर देगा।

    49 हजार के खर्च में तैयार हुआ सिस्टम: स्काडा को तैयार करने में तीन मोडम और तीन सिमकार्ड ही मुख्य रूप से खरीदने की जरूरत हुई। मोडम खरीदने में 49 हजार रुपये खर्च हुए। हर मोडम को वाई-फाई से जोड़ा गया है। इसके रखरखाव के लिए एक व्यक्ति तैनात किया है, जबकि भूमिगत केबल की निगरानी के लिए 10 कर्मचारी तैनात हैं।

    मुरादाबाद के मंडल रेल प्रबंधक तरुण प्रकाश ने बताया कि मंडल के तीन युवा इंजीनियरों ने इलेक्ट्रिक इंजन को कंट्रोल करने के लिए स्काडा सिस्टम तैयार कर ट्रायल शुरू कर दिया है। ट्रायल पूरी तरह सफल होने के बाद इसे परीक्षण के लिए भेजा जाएगा। वहां से हरी झंडी मिलने पर यह भारतीय रेलवे में सभी स्थानों पर प्रयोग होगा।

    मुरादाबाद मंडल के रेलवे इंजीनियर द्वारा तैयार किया गया स्काडा (काले रंग में)। मंडल में इसे अभी ट्रायल के तौर पर प्रयोग किया जा रहा है। सौ. रेलवे