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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jun 29, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

ISS में कैसा है शुभांशु शुक्ला का स्वास्थ्य? यूपोयिन फ्लाइट सर्जन बोलीं- फैमिली डॉक्टर रख रहे नजर; जानिए वजह

Published: Sun, 29 Jun 2025 06:24 PM (IST)

भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला वर्तमान में अंतर्राष्ट्रीय स्पेस स्टेशन में हैं जो अंतरिक्ष में जाने वाले दूसरे भारतीय हैं। ...और पढ़ें

शुभांशु शुक्ला आईएसएस जाने वाले देश के पहले एस्ट्रोनॉट हैं (फोटो: रॉयटर्स)
शुभांशु शुक्ला आईएसएस जाने वाले देश के पहले एस्ट्रोनॉट हैं (फोटो: रॉयटर्स)

HighLights

  1. हर अंतरिक्ष यात्री के पास होता है फैमिली डॉक्टर
  2. पुण्यश्लोक बिस्वाल हैं शुभांशु के फैमिली डॉक्टर
  3. स्पेस मेडिसिन स्पेशलिस्ट हैं पुण्यश्लोक बिस्वाल

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारत के अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला इस वक्त अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन में मौजूद हैं। वह अंतरिक्ष में जाने वाले भारत के दूसरे और आईएसएस जाने वाले देश के पहले एस्ट्रोनॉट हैं। शुभांशु शुक्ला इंडियन एयरफोर्स में ग्रुप कैप्टन हैं और उन्हें लड़ाकू विमान उड़ाने का शानदार अनुभव है।

समाचार चैनल एनटीडीवी के मुताबिक, यूरोपियन फ्लाइट सर्जन डॉ. ब्रिगिट गोडार्ड ने बताया कि शुभांशु शुक्ला स्पेस के लिए मेडिकली फिट हैं। उन्हें सिर में थोड़ा भारीपन और स्पेस सिकनेस महसूस हुई, लेकिन उनके 'फैमिली डॉक्टर' शुभांशु के स्वास्थ्य पर नजर बनाए हुए हैं।

क्या होता है फ्लाइट सर्जन?

डॉ. गोडार्ड ने बताया कि फ्लाइट सर्जन असल में कोई सर्जन नहीं होते। वे दरसअल अंतरिक्षा यात्रियों के लिए फिजिशियन के तौर पर काम करते हैं। इसमें मिशन के दौरान एस्ट्रोनॉट्स के स्वास्थ्य की निगरानी और मेडिकल संबंधी चिंताओं का समाधान करने के लिए टेलीमेडिसिन चेक-इन करते हैं।

डॉ. गोडार्ड के मुताबिक, हर एस्ट्रोनॉट के पास अपना फैमिली डॉक्टर होता है। भारतीय वायु सेना ने इंस्टीट्यूट ऑफ़ एयरोस्पेस मेडिसिन के स्पेस मेडिसिन स्पेशलिस्ट डॉ. पुण्यश्लोक बिस्वाल को शुभांशु शुक्ला का फैमिली डॉक्टर नियुक्त किया है। शुभांशु शुक्ला के फैमिली डॉक्टर कई साल से उनके स्वास्थ्य की जांच कर रहे हैं।

शुभांशु शुक्ला की ट्रेनिंग आएगी काम

  • ब्रिगिट गोडार्ड ने कहा कि अंतरिक्ष यात्रा चाहें कितनी भी कम समय की हो, लेकिन इससे मानव बायोलॉजी और फिजियोलॉजी पर फर्क पड़ता ही है। अंतरिक्ष यात्रियों में फ्लूड शिफ्ट, बोन डेंसिटी लॉस और स्पेस मोशन सिकनेस जैसी कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
  • गोडार्ड ने कहा कि शुभांशु शुक्ला के पास लड़ाकू विमान उड़ाने का लंबा अनुभव है और उनके फाइटर पायलट ट्रेनिंग और डेडिकेटेड मेडिकल देखरेख के कारण वह माइक्रोग्रैविटी के लिए पूरी तरह से फिट हैं।

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