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    रैमजेट तकनीक वाले गोलों से आतंकी ठिकाने तबाह करेगी सेना, IIT मद्रास ने सेना के साथ विकसित की तकनीक

    Updated: Sun, 04 Jan 2026 02:00 AM (IST)

    भारतीय सेना जल्द ही रैमजेट इंजन वाले 155 एमएम तोप के गोलो को अपने हथियारों के जखीरे में शामिल करने जा रही है। ऐसा करने वाली वह विश्व की पहली सेना होगी ...और पढ़ें

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    रैमजेट तकनीक वाले गोलों से आतंकी ठिकाने तबाह करेगी सेना (फोटो- एक्स)

    आइएएनएस, नई दिल्ली। भारतीय सेना जल्द ही रैमजेट इंजन वाले 155 एमएम तोप के गोलो को अपने हथियारों के जखीरे में शामिल करने जा रही है। ऐसा करने वाली वह विश्व की पहली सेना होगी। रैमजेट इंजन वाले गोलों से तोपखानों की मारक क्षमता 30 से 50 प्रतिशत तक बढ़ जाएगी बल्कि इससे गोले दुश्मन के ठिकानों पर और ज्यादा तबाही मचाने में सक्षम होंगे।

    यह स्वदेशी तकनीक आइआइटी मद्रास और भारतीय सेना ने मिल कर विकसित की है। हाल में राजस्थान के पोखरण रेंज में इन गोलों के सफल ट्रायल हुए हैं। सभी तरह की तोपों से दागे जा सकेंगे गोले एक बार पूरी तरह विकसित हो जाने पर यह तकनीक भारतीय सेना के तोपखाने में शामिल सभी तरह की तोपों में इस्तेमाल की जा सकेगी।

    भारत के तोपखाने में वर्तमान में एम777 अल्ट्रा-लाइट हॉवित्जर, एटीएजीएस, धनुष, के9 वज्र आदि तोपें शामिल हैं। रैमजेट इंजन वाले गोलों के लिए नया कैलिबर या प्लेटफार्म बनाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

    ऐसे बढ़ेगी गोले की मारक क्षमता रैमजेट इंजन हवा से ऑक्सीजन लेकर लगातार थ्रष्ट पैदा करता है। इससे तोप से दागे जाने से लेकर लक्ष्य तक पहुंचने के बीच लगातार गति बनाए रखता है।

    वर्तमान में तोप के गोलों की रेंज आम तौर पर 30 से 40 किलोमीटर तक होती है। यह तकनीक गोलों की रेंज को 50 प्रतिशत तक बढ़ा देगी। भविष्य में आने वाले रैमजेट इंजन वाले गोलों की रेंज 100 किलोमीटर से अधिक हो सकती है।

    महंगी मिसाइलों का काम करेंगे गोले

    रैमजेट इंजन वाले गोलों की मदद से सेना दुश्मन के इलाके में और अंदर तक तोप से तबाही मचा सकेगी। वर्तमान में 100 किलोमीटर या इससे अधिक दूर लक्ष्य को तबाह करने के लिए महंगी मिसाइलों का इस्तेमाल करना पड़ता है लेकिन भविष्य में तोप के गोले ही इतनी दूरी तक तबाही मचाने में सक्षम होंगे।

    यह तकनीक दुश्मन के क्षेत्र में काफी अंदर बने कमांड सेंटर्स, लाजिटिक्स हब, एयरफील्ड पर सटीक हमला करने में सक्षम बनाएगी। इससे भारतीय सेना की तोपखाने को आधुनिक बनाने के अभियान को मजबूती मिलेगी और आयात पर निर्भरता कम होगी।