अमेरिका से तनातनी के बीच ईयू से बढ़ रही भारत की निकटता, फ्रांस और जर्मनी के प्रमुखों का होगा दौरा
अमेरिका से व्यापारिक तनातनी के बीच भारत यूरोपीय संघ (ईयू) के साथ संबंध मजबूत कर रहा है। जनवरी-फरवरी 2026 में विदेश मंत्री जयशंकर की फ्रांस यात्रा के ब ...और पढ़ें

जयप्रकाश रंजन, नई दिल्ली। अमेरिका के साथ व्यापारिक संबंधों में आई तल्खी के बीच नई दिल्ली ने यूरोपीय संघ (ईयू) और उसके प्रमुख सदस्य देशों के साथ संबंधों को नई गति देने का फैसला किया है। जनवरी-फरवरी 2026 का कैलेंडर इस रणनीतिक बदलाव की गवाही दे रहा है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर इस समय फ्रांस की आधिकारिक यात्रा पर हैं।
10 जनवरी तक चलने वाली उनकी यात्रा के ठीक बाद जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज भारत आ रहे हैं। इसके ठीक बाद यूरोपीय संघ के दिग्गज नेता 26 जरवरी, 2026 को भारत के गणतंत्र दिवस समारोह पर राजकीय मेहमान होंगे। इसके दो हफ्ते बाद ही फ्रांस के राष्ट्रपति इमानुएल मैक्रा भी मुंबई व नई दिल्ली की यात्रा पर आएंगे। इन तीनों अवसरों पर भारत का यूरोपीय संघ के देशों के साथ कारोबारी संबंधों के साथ ही सुरक्षा, रक्षा व ऊर्जा के क्षेत्र में नई संभावनाओं पर बात होगी।
कूटनीतिक जानकार इसे हाल के वर्षों में भारत की तरफ से दुनिया की कई शक्तियों के साथ अलग-अलग ताल-मेल बनाने की कोशिश को और गति देने के तौर पर देख रहे हैं। जानकारों के मुताबिक जनवरी के तीसरे सप्ताह में जर्मनी के नए चांसलर फ्रेडरिक मर्ज भारत आने वाले हैं। यह उनकी सत्ता संभालने के बाद एशिया की किसी देश की पहली द्विपक्षीय यात्रा होगी। रक्षा सहयोग, पनडुब्बी सौदे, व्यापार और इंडो-पैसिफिक रणनीति जैसे मुद्दे इस यात्रा की मुख्य एजेंडा होंगे।
जर्मनी के साथ भारत के संबंध पहले से मजबूत हैं, लेकिन नये चांसलर की यह यात्रा दोनों देशों के बीच रक्षा और औद्योगिक साझेदारी को नया आयाम देगी। इसके बाद सबसे बड़ा राजनयिक आयोजन 26 जनवरी को होगा, जब गणतंत्र दिवस परेड के मुख्य अतिथि के रूप में यूरोपीय संघ के शीर्ष नेता, यूरोपीय आयोग की अध्यक्षा उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा भारत दौरे पर होंगे।
यह पहली बार होगा जब ईयू के दोनों शीर्ष नेता एक साथ भारत के गणतंत्र दिवस में शिरकत करेंगे। इस दौरान भारत-ईयू समिट भी आयोजित होगा, जिसमें लंबे समय से लंबित मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर निर्णायक प्रगति की उम्मीद है। यूरोपीय संघ के साथ एफटीए पर बातचीत अंतिम चरण में है। भारत के वाणिज्य व उद्योग मंत्री पीयूष गोयल जल्द ही इस वार्ता के लिए ब्रूसेल्स जा रहे हैं। ये लगातार हो रही उच्चस्तरीय यात्राएं कोई संयोग नहीं हैं।
अमेरिका के साथ व्यापार समझौते को लेकर बातचीत कब पूरी होगी, इसको लेकर पूरी तरह से अनिश्चितता बनी हुई है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अनर्गल बयानबाजी और रूस के साथ संबंधों को लेकर भारत के खिलाफ उनके सख्त तेवर को देख भारत को वैकल्पिक साझेदारों की तलाश है। यूरोपीय संघ भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है और एफटीए पूरा होने से भारतीय निर्यातकों को बड़ा बाजार मिलने की संभावना है। इससे भारत के लिए अमेरिकी बाजार की भरपाई करने में मदद मिलेगी। साथ ही, रक्षा, तकनीक, क्लाइमेट चेंज और इंडो-पैसिफिक में सहयोग भी बढ़ेगा।

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