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    भारत बन रहा जहरीली गैस सल्फर डाइऑक्साइड का शीर्ष उत्सर्जक

    By Srishti VermaEdited By:
    Updated: Sat, 11 Nov 2017 11:42 AM (IST)

    भारत इस जहरीली गैस के उत्सर्जन के मामले में शीर्ष देश बन रहा है। सल्फर डाइऑक्साइड मुख्यत: बिजली उत्पादन के लिए कोयले को जलाने पर उत्पन्न होती है।

    भारत बन रहा जहरीली गैस सल्फर डाइऑक्साइड का शीर्ष उत्सर्जक

    नई दिल्ली (जेएनएन)। दिल्ली-एनसीआर में स्मॉग से जूझ रहे देश के लिए एक और बुरी रिपोर्ट आई है। अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ मैरीलैंड के शोधकर्ताओं के मुताबिक 2007 से लेकर अब तक भारत में जहरीली गैस सल्फर डाइऑक्साइड का उत्सर्जन 50 फीसद बढ़ा है। जबकि 2006 में इसका शीर्ष उत्सर्जक रहे चीन में इस अवधि में इसे 75 फीसद तक घटाया गया है। भारत इस जहरीली गैस के उत्सर्जन के मामले में शीर्ष देश बन रहा है। सल्फर डाइऑक्साइड मुख्यत: बिजली उत्पादन के लिए कोयले को जलाने पर उत्पन्न होती है। इससे एसिड रेन और धुंध समेत स्वास्थ्य संबंधी कई समस्याएं भी होती हैं।

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    दो तरह से हुई गणना- शोधकर्ताओं ने भारत और चीन के ऊपर हो रहे उत्सर्जन की गणना दो तरीकों से की गई है। पहले तरीके में उन्होंने दोनों देशों में फैक्टरी, ऊर्जा संयंत्रों, वाहनों समेत सल्फर डाइऑक्साइड के अन्य स्रोतों से हुए उत्सर्जन का डाटा जुटाया। दूसरे तरीके में उन्होंने अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के ऑरा उपग्रह में लगे ओजोन मॉनीर्टंरग इंस्ट्रूमेंट (ओएमआइ) से आंकड़े एकत्र किए। यह उपकरण वातावरण में मौजूद सल्फर डाइऑक्साइड समेत अन्य प्रदूषक तत्वों का पहचानने और उनकी गणना करने में सक्षम है।

    50 फीसद का इजाफा- भारत द्वारा पिछले एक दशक में सल्फर डाइऑक्साइड के उत्सर्जन में 50 फीसद का इजाफा हुआ। देश में 2012 में कोयला आधारित सबसे बड़े ऊर्जा संयंत्र की शुरुआत की गई लेकिन चीन की तरह उत्सर्जन रोकने के लिए कोई कदम नहीं उठाए गए।

    बिजली मांग बढ़ने पर बिगड़ेंगे हालात- शोधकर्ताओं के मुताबिक भारत में सल्फर डाइऑक्साइड के उत्सर्जन के मौजूदा स्तर से धुंध या स्वास्थ्य संबंधी अधिक समस्या नहीं होगी, जैसा कि चीन में हो रहा है। क्योंकि सल्फर उत्सर्जन वाले स्थान देश की घनी आबादी से दूर हैं। लेकिन जैसे-जैसे देश में बिजली की मांग बढ़ेगी वैसे-वैसे इस उत्सर्जन का प्रभाव बढ़ जाएगा। क्योंकि इसमें कोयले के अधिक इस्तेमाल की आशंका है।

    बड़ी समस्याएं बरकरार- चीन ने भले ही सल्फर डाइऑक्साइड का उत्सर्जन अत्यधिक कम कर दिया है लेकिन वहां की हवा अभी भी जहरीली बनी हुई है। इससे स्वास्थ्य समस्याएं भी बढ़ रही हैं। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि धुंध उत्पन्न करने में सल्फर डाइऑक्साइड की हिस्सेदारी महज दस से 20 फीसद ही होती है। बाकी हिस्सेदारी अन्य प्रदूषक तत्वों और गैसों की होती है। बीजिंग में धुंध की समस्या के पीछे शहर के पास स्थित कोयला आधारित फैक्टरी और ऊर्जा संयंत्र हैं।

    चीन में घटा उत्सर्जन- चीन में कोयले का इस्तेमाल 50 फीसद और बिजली उत्पादन सौ फीसद बढ़ा है। इसके बावजूद चीन ने विभिन्न तरीकों से उत्सर्जन को 75 फीसद तक घटाया है। चीन ने वर्ष 2000 के बाद से ही उत्सर्जन कम करने का लक्ष्य तय करने और उत्सर्जन की सीमा घटाने के लिए कारगर नीतियों को अमल में लाना शुरू किया था। शोधकर्ताओं के मुताबिक उसके ये प्रयास सफल रहे।

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