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    भारत में ऑटो कंपोनेंट्स की लागत चीन से इतनी अधिक, वैश्विक निर्यात का बन सकता है बड़ा खिलाड़ी

    Updated: Sat, 12 Apr 2025 07:26 PM (IST)

    नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार भारत में ऑटो कंपोनेंट्स की निर्माण लागत चीन से 10% अधिक है। लागत कम कर भारत वैश्विक निर्यात में हिस्सेदारी 3% से 8% तक बढ़ा सकता है जिससे 20-25 लाख रोजगार पैदा होंगे। सरकार से वित्तीय और गैर-वित्तीय मदद क्लस्टर विकास और नई तकनीक अपनाने की सिफारिश की गई है। अगले पांच साल में निर्यात 20 अरब से 60 अरब डॉलर तक पहुंच सकता।

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    ऑटो कंपोनेंट्स के वैश्विक बाजार में भारत की हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए नीति आयोग की रणनीति। (फाइल फोटो)

    जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। नीति आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक चीन के मुकाबले भारत में ऑटो कंपोनेंट्स की निर्माण लागत 10 प्रतिशत अधिक है और इस लागत को कम करके ही भारत वैश्विक सप्लाई चेन में अपनी हिस्सेदारी बढ़ा सकता है।

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    नीति आयोग का मानना है कि सरकार की तरफ से वित्तीय और गैर वित्तीय मदद से ऑटो कंपोनेंट्स के 20 अरब डॉलर के निर्यात को अगले पांच साल में 60 अरब डॉलर तक ले जाया जा सकता है। इससे ऑटो कंपोनेंट्स के वैश्विक निर्यात में भारत की हिस्सेदारी तीन प्रतिशत से बढ़कर आठ प्रतिशत हो जाएगी और प्रत्यक्ष तौर पर 20-25 लाख रोजगार भी निकलेंगे।

    ऑटो कंपोनेंट्स सेक्टर में भारत बन सकता है वैश्विक लीडर

    आयोग का मानना है कि ऑटो कंपोनेंट्स के सेक्टर में भारत में वैश्विक लीडर बनने की क्षमता है लेकिन यह केंद्र व राज्य सरकार की मदद से ही संभव हो सकेगा। नीति आयोग के मुताबिक आयात शुल्क और ढुलाई खर्च चीन के मुकाबले अधिक होने से भारतीय निर्माताओं को अधिक कीमत में कच्चे माल की खरीदारी करनी पड़ती है। चीन में उद्यमियों को 3.45 प्रतिशत की ब्याज दर से कारोबार करने के लिए लोन मिल जाता है जबकि भारत में यह दर 9.37 प्रतिशत से अधिक है।

    भारत में चीन की तुलना में टैक्स दर और ड्रेपिसिएशन दर भी अधिक है। हालांकि चीन की तुलना में भारत में श्रमिकों की मजदूरी लगभग 3.1 प्रतिशत कम है। कुल मिलाकर भारत में ऑटो कंपोनेंट्स की लागत 10 प्रतिशत अधिक बैठती है। आयोग ने वैश्विक बाजार में भारत की प्रतिस्पर्धा क्षमता बढ़ाने के लिए वित्तीय सहायता के तहत मैन्यूफैक्चरिंग क्षमता के विस्तार के लिए संचालन व्यय मदद, कौशल विकास सहायता और बड़े पैमाने पर अनुसंधान व विकास एवं ब्रांडिंग के लिए वित्तीय मदद की सिफारिश की है।

    आयोग ने कंपोनेंट्स निर्माण के लिए क्लस्टर विकसित करने के लिए भी कहा है। गैर वित्तीय सिफारिश के तहत आयोग ने नई तकनीक को अपनाने, अंतररराष्ट्रीय स्तर पर करार करने और कारोबारी सहूलियत देने पर फोकस किया है।

    आयोग के आंकड़ों के मुताबिक दुनिया भर में ऑटो कंपोनेंट्स की खपत 2000 अरब डॉलर की है और इनमें से 700 अरब डॉलर का निर्यात बाजार है। भारत घरेलू स्तर पर 70 अरब डॉलर के ऑटो कंपोनेंट्स की खपत करता है और 20 अरब डॉलर का निर्यात करता है। वर्ष 2030 तक ऑटो कंपोनेंट्स की घरेलू खपत 70 अरब डॉलर से बढ़कर 120 अरब डॉलर तक हो सकती है।

    चीन से मुकाबला के लिए अन्य सेक्टर में भी निर्माण लागत को कम करने की जरूरत

    जानकारों के मुताबिक वैश्विक बाजार में चीन से मुकाबला करने के लिए भारत को अन्य सेक्टर में भी अपनी निर्माण लागत में कमी लाने की जरूरत है। चीन पर 145 प्रतिशत शुल्क के कारण अमेरिका के बाजार में भारत को लाभ मिल सकता है, लेकिन दुनिया के अन्य बाजार में चीन भारत को कड़ी प्रतिस्पर्धा देगा।

    अन्य बाजार में अपने निर्यात को बढ़ाकर चीन अमेरिका में होने वाले नुकसान की भरपाई करने की कोशिश करेगा। इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में भी चीन व वियतनाम की तुलना में भारत में निर्माण लागत 10 प्रतिशत से अधिक है। काफी बड़े पैमाने पर उत्पादन करने की वजह से लेदर, गारमेंट्स जैसे सेक्टर में भी चीन में लागत कम आती है।

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