भारत का वार प्लान तैयार, पीएम मोदी ने डोभाल के साथ फिर की बैठक; पल-पल का लिया अपडेट
भारत-पाकिस्तान तनाव के बीच पूर्व सैन्य प्रमुखों के साथ प्रधानमंत्री मोदी की मुलाकात को काफी अहम माना जा रहा है। इन सैन्य प्रमुखों को समय-समय पर पाकिस्तान के साथ उपजे ऐसे हालातों और उससे निपटने के लिए उठाए गए कदमों का अनुभव है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह एनएसए अजीत डोभाल सीडीएस और सभी सशस्त्र बलों के प्रमुखों के साथ बैठक की अध्यक्षता की।

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। पाकिस्तान के साथ चल रही तनातनी और युद्ध की आशंकाओं के बीच प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पूर्व सैन्य प्रमुखों से मुलाकात की। इनमें सेना, नौसेना, वायुसेना के पूर्व प्रमुख शामिल थे। बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने इन पूर्व सैन्य प्रमुखों से पहलगाम आतंकी हमले से उपजे ताजा हालात पर विस्तार से चर्चा की।
पूर्व सैन्य प्रमुखों के साथ प्रधानमंत्री मोदी की मुलाकात को काफी अहम माना जा रहा है। इन सैन्य प्रमुखों को समय-समय पर पाकिस्तान के साथ उपजे ऐसे हालातों और उससे निपटने के लिए उठाए गए कदमों का अनुभव है।
NSA डोभाल से मिले पीएम मोदी
वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, एनएसए अजीत डोभाल, सीडीएस और सभी सशस्त्र बलों के प्रमुखों के साथ बैठक की अध्यक्षता की।
PM Narendra Modi chairs a meeting with Defence Minister Rajnath Singh, NSA Ajit Doval, CDS and chiefs of all the Armed Forces https://t.co/EbKenXBAAp pic.twitter.com/PBHpsX8Enu
— ANI (@ANI) May 9, 2025
भारत से लड़ने के लिए आतंकवाद का सहारा ले रहा पाकिस्तान
1980 के दशक से पाकिस्तान लगातार भारत के साथ आतंकवाद के छद्म युद्ध का सहारा ले रहा है और ये सैन्य प्रमुख अपने करियर में पाकिस्तान पोषित सिख आतंकवाद से लेकर 1989 से कश्मीर में जारी इस्लामिक आतंकवाद का सामना कर चुके हैं, जिनमें 1999 के कारगिल युद्ध, 2001 का संसद पर आतंकी हमला, 2008 का मुंबई आतंकी हमला, 2016 का उरी आतंकी हमला और 2019 का पुलवामा आतंकी हमला शामिल है।
भारत ने पिछले 45 सालों में सिर्फ उरी और पुलवामा आतंकी हमले का सर्जिकल व एयर स्ट्राइक से जवाब दिया है।बताया जाता है कि पूर्व सैन्य प्रमुखों ने विस्तार से अनुभवों को प्रधानमंत्री के साथ साझा किया। उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ सरकार की जीरो टालरेंस की नीति की प्रशंसा की।
यही नहीं, पहली बार पाकिस्तान के भीतर जैश ए मोहम्मद, लश्करे तैयबा और पीओके में हिजबुल मुजाहिदीन के मुख्यालयों पर हमले को सही कदम बताया। इन पूर्व प्रमुखों ने सरकार के ¨सधु जल समझौते से बाहर निकलने के फैसले की भी तारीफ की और पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद को पूरी तरह से खत्म करने के लिए और भी कड़े कदमों की जरूरत बताई।
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