कड़ाही में बचे कुकिंग ऑयल से बनेगा हवाई जहाज का फ्यूल, घरों-रेस्टोरेंट से होगा कलेक्शन
एचपीसीएल की विशाखापत्तनम रिफाइनरी ने इस्तेमाल किए गए कुकिंग ऑयल (UCO) से सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल (SAF) बनाने के लिए एक डेमॉन्स्ट्रेशन प्लांट का उद्घाटन ...और पढ़ें

देश की एक प्रख्यात सरकारी तेल कंपनी ने काम शुरू कर दिया है (प्रतीकात्मक तस्वीर)
जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। आपको यह बताया जाए कि होटलों या घरों में इस्तेमाल किये गये कुकिंग ऑयल का इस्तेमाल करके हवाई जहाज उड़ाया जा सकता है तो आपको विश्वास नहीं होगा। लेकिन इस बारे में देश की एक प्रख्यात सरकारी तेल कंपनी ने काम शुरू कर दिया है।
स्वयं पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने इसकी जानकारी दी है। उन्होंने बताया है कि हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) की विशाखापत्तनम रिफाइनरी ने सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल (एसएएफ) उत्पादन के लिए डेमॉन्स्ट्रेशन प्लांट का उद्घाटन किया है।
कुकिंग ऑयल से बनेगा ईंधन
इस प्लांट में घरों, होटलों और रेस्तरां से एकत्रित इस्तेमाल किए हुए कुकिंग ऑयल (यूज्ड कुकिंग ऑयल-यूको) को मौजूदा रिफाइनरी की फुल कन्वर्जन हाइड्रोक्रैकर यूनिट में को-प्रोसेसिंग करके हवाई जहाजों में इस्तेमाल होने वाला ईंधन बनाया जाएगा।
सरकार की तरफ से इस पहल को उड्डयन क्षेत्र से होने वाले कार्बन उत्सर्जन को कम करने और वेस्ट टू वेल्थ (कचरे से धन बनाना) की दिशा में महत्वपूर्ण बताया गया है। वैसे पूरी दुनिया में हवाई जहाजों में इस्तेमाल होने वाले ईंधन एटीएफ को ज्यादा से ज्यादा पर्यावरण अनुकूल बनाने की कोशिश जारी है।
80 फीसद तक कम कार्बन उत्सर्जन
- एसएफ को पारंपरिक जेट फ्यूल की तुलना में 80 फीसद तक कम कार्बन उत्सर्जन करता है और मौजूदा हवाई जहाजों में बिना किसी बदलाव के इस्तेमाल किया जा सकता है। एचपीसीएल के रोडमैप के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय सर्टिफिकेशन मिलने के बाद जनवरी 2027 से विशाखापत्तनम रिफाइनरी सालाना लगभग 10,000 टन एसएएफ का उत्पादन शुरू हो जाएगा। यह भारत के एसएएफ ब्लेंडिंग लक्ष्यों को पूरा करने में अहम भूमिका निभाएगा।
- इस लक्ष्य के मुताबिक सरकार ने वर्ष 2030 तक एटीएफ में पांच फीसद एसएफ का मिश्रण करने वाली है। पुरी ने कहा है कि, 'फ्राइंग पैन में इस्तेमाल हुआ कुकिंग ऑयल से हवाई जहाज उड़ेंगे। हम 2027 तक सभी अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के ईंधन में एक फीसद एसएएफ इस्तेमाल करने के लक्ष्य को पूरा करने और एविएशन फ्यूल में कार्बन उत्सर्जन कम करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।'
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