अंबिकापुर, नई दुनिया। पर्यावरण के प्रति लोगों को जागरुक करने व देश को प्लास्टिक मुक्त बनाने ने किए छत्तीसगढ़ में एक अनूठा प्रयोग किया जा रहा है। राज्य के अंबिकापुर जिले में गार्बेज कैफे का शुभारंभ किया गया। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव ने फीता काटकर इसका उद्घाटन किया। अंतरराज्यीय बस स्टैंड में आरंभ कैफे बड़े शहरों में संचालित होने वाले कैफे से एकदम अलग और अनूठा है। यहां आधा किलो प्लास्टिक लाने पर नाश्ता और एक किलो प्लास्टिक लाने पर भरपेट भोजन मिलेगा।

हर वर्ग के लोगों के लिए है यह कैफे

कैफे केवल कचरा लाने वाले लोगों के लिए नहीं, बल्कि शहर के हर वर्ग के लिए है। यहां लजीज व्यंजनों का आनंद लिया जा सकता है। स्वच्छता के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने वाले अंबिकापुर में संभवत: यह अपने जैसा देश का पहला कैफे है। इसके जरिये बड़े शहरों और महानगरों को संदेश देने का प्रयास किया है कि स्वच्छता के क्षेत्र में जनमानस को जोड़कर बेहतर काम किया जा सकता है।

मेयर की सोच धरातल पर उतरी

पेशे से चिकित्सक व शहर के मेयर डॉ. अजय तिर्की की अनूठी सोच व कल्पना से खुले कैफे का नामकरण 'मोर द वेस्ट, बेटर द टेस्ट' रखा गया है। उनका मानना है कि कैफे के संचालन से स्वच्छता अभियान में लोगों की सहभागिता बढ़ेगी। कैफे आरंभ के पहले ही भारत सरकार के अलावा साफ-सफाई के लिए चर्चित विश्व के अनेक देशों ने ट्वीट कर तारीफ की।

सकारात्मक सोच का परिणाम

छत्तीसगढ़ के मंत्री टीएस सिंहदेव ने कहा कि स्वच्छता के क्षेत्र में अंबिकापुर ने बेहतर मुकाम हासिल किया है। डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण की व्यवस्था लागू कर लोगों की सोच में बदलाव आया है। देश का पहला गार्बेज कैफे भी शहर से शुरू हुआ है। इससे शहर को न सिर्फ अलग पहचान मिलेगी, बल्कि यहां आने वाले हर व्यक्ति को स्वच्छता की सीख मिलेगी।

गार्बेज कैफे संचालन के पीछे क्या है उद्देश्य 

अंबिकापुर के मेयर डॉ. अजय तिर्की ने कहा कि गार्बेज कैफे संचालन के पीछे उद्देश्य यह है कि लोगों तक स्वच्छता का संदेश जाए। कैफे में स्वच्छता से संबंधित स्लोगन लिखे गए हैं। व्यंजनों का आनंद लेते हुए इन स्लोगनों को पढ़कर लोग स्वच्छता को लेकर ज्यादा जागरूक होंगे।

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