ज्यादातर राज्यों में थमने लगी बिजली चोरी, पिछले दो सालों में नुकसान 22 प्रतिशत से घटकर 15.41 प्रतिशत पर आया
ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन (टीएंडडी) से होने वाली हानि को भारत के बिजली सेक्टर में सुधार की राह में सबसे बड़े अड़चन के तौर पर देखा जाता रहा है। हालांकि जो आंकड़े अब सामने आ रहे हैं उससे साफ है कि इस समस्या पर काबू पाने में सफलता मिलने लगी है। एक दशक पहले तक टीएंडडी से होने वाली हानि 35 प्रतिशत तक होती थी।

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन (टीएंडडी) से होने वाली हानि को भारत के बिजली सेक्टर में सुधार की राह में सबसे बड़े अड़चन के तौर पर देखा जाता रहा है। हालांकि जो आंकड़े अब सामने आ रहे हैं, उससे साफ है कि इस समस्या पर काबू पाने में सफलता मिलने लगी है।
एक दशक पहले तक टीएंडडी से होने वाली हानि (वह बिजली जिसकी कीमत बिजली वितरण कंपनियां नहीं वसूल पाती) 35 प्रतिशत तक होती थी, लेकिन ताजा आंकड़ों के मुताबिक यह घटकर 15 प्रतिशत हो गई है। पिछले दो वित्त वर्षों में यह 22 प्रतिशत से घटकर 15.41 प्रतिशत पर आ गया है। हालांकि वैश्विक स्तर के मुकाबले (सिर्फ आठ फीसद) अभी यह तकरीबन दोगुना है।
लोग बिजली का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन बिल नहीं देते
विकसित देशों में तो बिजली सेक्टर में टीएंडडी से होने वाली हानि सिर्फ चार से छह प्रतिशत के बीच है। बहुत संभव है कि अगले कुछ वर्षों में भारत में भी यह स्तर हासिल हो जाए। टीएंडडी हानि में एक बड़ा हिस्सा बिजली चोरी का होता है। कई इलाकों में लोग बिजली का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन उसका बिल नहीं देते। इस पर लगाम लगाने के लिए सरकार की मदद से वितरण कंपनियां लगातार कोशिश कर रही हैं।
आरबीआई ने वित्तीय स्थिति पर रिपोर्ट प्रकाशित की
टीएंडडी हानि में कमी बताती है कि यह कोशिश सफल होने लगी है। आरबीआई ने पिछले दिनों राज्यों की वित्तीय स्थिति पर सालाना रिपोर्ट प्रकाशित की थी, जिसमें राज्यों की बिजली सेक्टर की पूरी स्थिति का आकलन है। इसके साथ ही गुरुवार को उद्योग चैंबर फिक्की ने भी देश के बिजील सेक्टर में चल रहे बदलाव और इसकी चुनौतियों पर एक विस्तृत रिपोर्ट पेश की है जिसमें भी बिजली वितरण सेक्टर में होने वाली हानि का खासतौर पर जिक्र किया गया है।
बिहार, झारखंड और यूपी को ज्यादा मुस्तैदी दिखाने की जरूरत
आरबीआई की रिपोर्ट की बात करें तो इसमें 12 राज्यों की तरफ इशारा किया गया है जहां बिजली वितरण सेक्टर में होने वाली हानि (टीएंडडी) अभी भी राष्ट्रीय औसत से ज्यादा है। इसमें बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश प्रमुख राज्य हैं जहां की सरकारों को ज्यादा मुस्तैदी दिखाने की जरूरत है। हालांकि इन राज्यों में भी स्थिति पहले के मुकाबले सुधरी है।
हालांकि असल समस्या पूर्वोत्तर के राज्यों की तरफ से आ रही है। पूर्वोत्तर क्षेत्र के तकरीबन सभी राज्यों में टीएंडडी हानि राष्ट्रीय औसत से काफी ज्यादा है। बिहार, यूपी और झारखंड में इसके 30 प्रतिशत के करीब रहने की बात कही गई है।
बिजली वितरण कंपनियों की वित्तीय हालत सुधरी
हाल ही में संसद में बिजली मंत्री ने बताया था कि देश की बिजली वितरण कंपनियों पर जो बकाये की राशि कभी 1.35 लाख करोड़ रुपये हुआ करती थी वह घटकर सिर्फ 6,000 करोड़ रुपये रह गई है। इस वजह से ही ग्रामीण क्षेत्रों में अब औसतन रोजाना 20.6 घंटे और शहरी क्षेत्रों में 23.8 घंटे की बिजली आपूर्ति हो रही है।
बिजली कंपनियां चुनौतियों से जूझ रही हैं
हालांकि, आरबीआई की रिपोर्ट के मुताबिक देश की बिजली वितरण कंपनियां (डिस्काम) अभी भी कई तरह की चुनौतियों से जूझ रही हैं। इसमें बिजली शुल्क की कम दर, उच्च दर पर बिजली की खरीद करना, कुछ सेक्टरों से कम दर से बिजली शुल्क वसूलना जबकि कुछ सेक्टर से ज्यादा दर पर बिजली खरीदना और डिस्काम पर राज्य प्रशासन का नियंत्रण।
समाधान के लिए केंद्र सरकार के स्तर पर कोशिश जारी
वैसे इन सभी समस्याओं के समाधान के लिए केंद्र सरकार के स्तर पर निरंतर कोशिश जारी है। संभवत: यह कारण है कि भारत में भी टीएंडटी की हानि का स्तर कम होकर 15.41 प्रतिशत (वर्ष 2022-23 में, पावर फाइनेंस कारपोरेशन के मुताबिक) पर आ गया है।
विभिन्न देशों में बिजली वितरण में होने वाली हानिअमेरिका-06 प्रतिशत आस्ट्रेलिया-05 प्रतिशत जर्मनी-04 प्रतिशतरूस-10 प्रतिशत
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