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'लव-जिहाद रोकने का प्रयास अपने घर से शुरू करें', एक कार्यक्रम में बोले मोहन भागवत

Published: Sun, 04 Jan 2026 02:00 AM (IST)

मोहन भागवत ने कहा कि लव-जिहाद की रोकथाम के प्रयास सबसे पहले हमें अपने घरों और परिवारों से शुरू करने ...और पढ़ें

'लव-जिहाद रोकने का प्रयास अपने घर से शुरू करें', एक कार्यक्रम में बोले मोहन भागवत (फाइल फोटो)

'लव-जिहाद रोकने का प्रयास अपने घर से शुरू करें', एक कार्यक्रम में बोले मोहन भागवत (फाइल फोटो)

HighLights

  1. संघ प्रमुख ने भोपाल में आयोजित सामाजिक सद्भाव और स्त्री शक्ति संवाद कार्यक्रम में किया आह्वान

  2. भागवत ने कहा संकट के समय ही नहीं, बल्कि हर समय सद्भावना बनाए रखना आवश्यक है

जेएनएन, भोपाल। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डा. मोहन भागवत ने कहा कि लव-जिहाद की रोकथाम के प्रयास सबसे पहले हमें अपने घरों और परिवारों से शुरू करने चाहिए। सबको यह गंभीरता से विचार करना होगा कि हमारे परिवार की बेटी किसी अपरिचित के बहकावे में कैसे आ गई। इसका एक बड़ा कारण आपसी संवाद की कमी है। इसके लिए तीन स्तरों पर प्रयास आवश्यक हैं।

पहला, परिवार के भीतर निरंतर संवाद। दूसरा, बच्चियों को सावधानी और आत्मरक्षा का संस्कार देना। तीसरा, इस प्रकार के अपराध करने वालों के विरुद्ध प्रभावी निस्तारण। समाज में कार्यरत संस्थाओं को ऐसी गतिविधियों की जानकारी रखनी चाहिए और समाज को सामूहिक प्रतिकार के लिए खड़ा होना होगा, तभी लव-जिहाद का समाधान निकलेगा।

यह बात डॉ. भागवत ने शनिवार शाम को भोपाल में आयोजित सामाजिक सद्भाव और स्त्री शक्ति संवाद कार्यक्रम में कही। उन्होंने कहा कि हमारा धर्म, संस्कृति और सामाजिक व्यवस्था महिलाओं के कारण ही सुरक्षित है। बोले- समाज में भ्रम फैलाकर जनजातीय और अन्य वर्गों को यह कहकर तोड़ने का प्रयास किया गया कि वे अलग हैं, जबकि सच्चाई यह है कि हजारों वर्षों से अखंड भारत में रहने वाले सभी लोगों का डीएनए एक है।

संकट के समय ही नहीं, बल्कि हर समय सद्भावना बनाए रखना आवश्यक है। मिलना, संवाद करना और एक-दूसरे के कार्यों को जानना ही सद्भावना की पहली शर्त है। किसी भी समाज के प्रेरक कार्यों को अपनाना चाहिए। समाजों के लोग इसी तरह की सामाजिक सद्भाव बैठकें जिला, तहसील, ब्लाक और गांव स्तर तक प्रतिवर्ष करें। यह संघ नहीं समाज का काम है।

हिंदू हैं तभी जातियां भी हैं, इसलिए शरीर की तरह सुगठित रहें

डॉ. भागवत ने कहा कि हिंदू कोई संज्ञा नहीं, बल्कि एक स्वभाव है। जब तक आप ¨हदू हैं तभी तक जाति हैं, जिस दिन हिंदू नहीं रहेंगे तो जाति में भी नहीं रहेंगे। जैसे शरीर के सभी अंग मजबूत होकर अपना-अपना काम अच्छे से करते हैं, उसी तरह से समाज में हमें सुगठित रहना होगा। एक दूसरे का सहयोग कर कमजोर को ताकतवर बनाना होगा।

देश है तभी जातियां हैं। सामाजिक सद्भाव नया विषय नहीं, बल्कि समाज का स्वभाव है। कानून समाज को नियंत्रित कर सकता, पर समाज को चलाने और जोड़कर रखने का कार्य सद्भावना ही करती है। विविधता के बावजूद एकता ही हमारी पहचान है। बाहरी रूप से हम अलग दिख सकते हैं, लेकिन राष्ट्र, धर्म और संस्कृति के स्तर पर हम सभी एक हैं। इसी विविधता में एकता को स्वीकार करने वाला हिंदू समाज है।