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    घर बैठे डाउनलोड कर सकेंगे जमीन के दस्तावेज, गिरवी रखी हुई जमीन की भी मिलेगी जानकारी; पूरी डिटेल

    Updated: Fri, 02 Jan 2026 09:45 PM (IST)

    देश के 19 राज्यों में अब लोग घर बैठे जमीन के दस्तावेज डिजिटली डाउनलोड कर सकेंगे, जो कानूनी रूप से मान्य होंगे। 406 जिलों में बैंक ऑनलाइन गिरवी जमीन की ...और पढ़ें

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    19 राज्यों में जमीन के दस्तावेज अब डिजिटल डाउनलोड करें

    स्मार्ट व्यू- पूरी खबर, कम शब्दों में

    डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। देश के 19 राज्यों के लोग अब घर बैठे ही जमीन के दस्तावेज (लैंड रिकार्ड) डिजिटली डाउनलोड कर सकेंगे। आनलाइन डाउनलोड किए गए ये दस्तावेज कानूनी रूप से पूरी तरह से मान्य होंगे।

    इसके साथ ही 406 जिलों में बैंक अब आनलाइन ही जमीन गिरवी रखने (मार्गेज) की जांच कर सकते हैं। इससे लोगों को लोन जल्दी मिलने में मदद मिल रही है।

    सरकार के अनुसार भूमि संसाधन विभाग ने जमीन के रिकार्ड के डिजिटलीकरण काम लगभग पूरा कर लिया है। जमीन से जुड़े काम अब आनलाइन होने लगे हैं।

    ग्रामीण विकास मंत्रालय ने कहा, देश के 97.27 प्रतिशत गांवों में जमीन के अधिकार से जुड़े रिकार्ड या राइट्स आफ रिकार्ड (आरओआर) कंप्यूटर पर दर्ज किए जा चुके हैं। लगभग 97.14 प्रतिशत जमीन के नक्शे का डिजिटलीकरण भी हो गया है।

     

    जमीन के दस्तावेज अब डिजिटल डाउनलोड करें

    84.89 प्रतिशत गांवों में जमीन के लिखित आरओआर को नक्शों से जोड़ दिया गया है। शहरों में जमीन की व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए (एनएकेएसएचए) यानी नेशनल जियोस्पेशियल नालेज बेस्ड लैंड सर्वे आफ अर्बन हेबिटेशनlaptop योजना शुरू की गई है।

    इस योजना के तहत देश के 157 शहरी स्थानीय निकायों (यूएलबी) में काम किया जा रहा है। इनमें से 116 यूएलबी में हवाई सर्वे पूरा हो चुका है, जिसमें हाई-रिजाल्यूशन तस्वीरों के साथ 5,915 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को कवर किया गया। 72 शहरों में जमीनी स्तर पर जांच शुरू हो चुकी है और 21 शहरों में यह काम पूरी तरह खत्म हो गया है।

    बैंक 406 जिलों में ऑनलाइन गिरवी जमीन जांच सकेंगे

    केंद्र सरकार ने 2025-26 की योजना के तहत 24 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को 1,050 करोड़ रुपए की सहायता मंजूर की है ताकि वे जमीन के डिजिटल रिकार्ड का काम पूरा कर सकें। सरकार ने जमीन के लिए एक खास पहचान संख्या भी शुरू की है, जिसे यूएलपीआइएन कहा जाता है। यह 14 अंकों का नंबर होता है और इसे जमीन का आधार कार्ड कहा जा रहा है।

    मंत्रालय के अनुसार, नेशनल जेनेरिक डाक्यूमेंट रजिस्ट्रेशन सिस्टम (एनजीडीआरएस) ने जमीन की खरीद-बिक्री आसान हो गई है और इज आफ डूईंग बिजनेस या व्यापार सुगमता को बढ़ावा मिला है।

    पंजाब, महाराष्ट्र और हिमाचल प्रदेश समेत 17 राज्यों/संघ शासित प्रदेशों में इसे क्रियान्वित किया गया है। करीब 88 प्रतिशत सब रजिस्ट्रार आफिस (एसआरओ) अब राजस्व कार्यालयों के साथ जुड़ चुके हैं, जिससे रजिस्ट्रेशन के तुरंत बाद जमीन का रिकार्ड अपने आप अपडेट हो जाता है।

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    (न्यूज एजेंसी आईएएनएस के इनपुट के साथ)