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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 01, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

5 साल में भारत में साइबर फ्रॉड बढ़ा या घटा? मंत्री ने किया चौंकाने वाला खुलासा; देखे किस राज्य में कितने केस हुए रजिस्टर्ड

Published: Fri, 01 Aug 2025 04:47 PM (IST)

भारत में पिछले 5 सालों में साइबर फ्रॉड के मामलों में तेजी से वृद्धि हुई है। गृह मंत्रालय के अनुसार ...और पढ़ें

पिछले पांच साल में साइबर फ्रॉड के मामलों में करीब 900% की बढ़ोतरी हुई है।
पिछले पांच साल में साइबर फ्रॉड के मामलों में करीब 900% की बढ़ोतरी हुई है।

HighLights

  1. 2021 से 2025 तक कुल 66 लाख से अधिक साइबर अपराध रिपोर्ट हुए हैं।
  2. 2024 में पूरे देश में साइबर धोखाधड़ी के कारण 22,845.73 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारत में पिछले 5 साल में साइबर फ्रॉड के मामलों में तेजी से इजाफा हुआ है। गृह मंत्रालय के मुताबिक, 2021 से 30 जून 2025 तक कुल 66 लाख से अधिक साइबर अपराध रिपोर्ट हुए हैं।

गृह राज्य मंत्री बंडी संजय कुमार ने राज्यसभा में बताया है पिछले पांच साल में साइबर फ्रॉड के मामलों में करीब 900% की बढ़ोतरी हुई है।

साल 2024 में कितने पैसों का हुआ साइबर फ्रॉड?

गृह मंत्रालय के तहत I4C की ओर से संचालित राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) और नागरिक वित्तीय साइबर धोखाधड़ी रिपोर्टिंग और प्रबंधन प्रणाली (सीएफसीएफआरएमएस) के अनुसार, 2024 में पूरे देश में साइबर धोखाधड़ी के कारण नागरिकों को होने वाले नुकसान की कुल राशि 22,845.73 करोड़ रुपये थी। ये साल 2023 में सिर्फ 7,465.18 करोड़ रुपये थी।

सरकार के क्या की कार्रवाई?

साइबर अपराधियों के खिलाफ सरकार की ओर से की गई कार्रवाई का ब्योरा देते हुए गृह राज्य मंत्री संजय कुमार ने बताया कि पुलिस अधिकारियों की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, अब तक केंद्र सरकार की ओर से 9.42 लाख से अधिक सिम कार्ड और 2,63,348 IMEI ब्लॉक किए जा चुके हैं।

राज्य मंत्री ने कहा, "बैंकों/वित्तीय संस्थानों के सहयोग से I4C द्वारा 10 सितंबर, 2024 को साइबर अपराधियों की पहचान के लिए संदिग्ध रजिस्ट्री शुरू की गई थी। अब तक बैंकों से हासिल 11 लाख से अधिक संदिग्ध पहचानकर्ताओं के डेटा और 24 लाख लेयर 1 म्यूल खातों को संदिग्ध रजिस्ट्री की भागीदार संस्थाओं के साथ साझा किया गया है और इससे 4631 करोड़ रुपये से अधिक की बचत हुई है।"

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