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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Feb 26, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

हर 1000 में से सिर्फ 300 Android फोन सेफ, ऐसे ही कई खुलासों से चौंका रही DSCI की रिपोर्ट

Published: Wed, 26 Feb 2025 08:13 PM (IST)Updated: Wed, 26 Feb 2025 08:35 PM (IST)

भारत में होने वाले 23 प्रतिशत साइबर अपराध में इंडोनेशिया के एनान ब्लैक फ्लैग नामक गैंग का हाथ है। ये ...और पढ़ें

डाटा सिक्युरिटी काउंसिल ऑफ इंडिया की रिपोर्ट में कई खुलासे (प्रतीकात्मक तस्वीर)
डाटा सिक्युरिटी काउंसिल ऑफ इंडिया की रिपोर्ट में कई खुलासे (प्रतीकात्मक तस्वीर)

HighLights

  1. इंडोनेशियाई करते हैं भारत में 23 फीसदी साइबर क्राइम
  2. पाकिस्तान का हैकर ग्रुप इनसेन भी भारत में सक्रिय
  3. 15 प्रतिशत साइबर अपराध बांग्लादेश से किए गए

राजीव कुमार, नई दिल्ली। एंड्रॉयड आधारित मोबाइल फोन या अन्य उपकरण (डिवाइस) चला रहे हैं, तो साइबर अपराध से बचने के लिए अधिक सतर्क रहने की जरूरत है। हर मिनट 700 से अधिक साइबर अपराध हो रहे है और इनमें से 42 प्रतिशत अपराध एंड्रॉयड आधारित उपकरणों के माध्यम से किए गए।

अपराधी किस्म के साॉफ्टवेयर या मालवेयर आसानी से एंड्रॉयड उपकरणों में सेंध लगा पा रहे हैं। 32 प्रतिशत साइबर अपराध अवांछित किस्म के एप के माध्यम से किए जा रहे हैं, तो 26 प्रतिशत अपराध फर्जी विज्ञापन जिसे साइबर जगत में एडवेयर कहा जाता है, के माध्यम से किया जा रहे है।

रिपोर्ट में चौंकाने वाले आंकड़े

ये सारे खुलासे डाटा सिक्युरिटी काउंसिल ऑफ इंडिया के हालिया रिपोर्ट में किए गए है। यह रिपोर्ट साइबर अपराध पर अक्टूबर 2023 से सितंबर 2024 तक जुटाए गए आंकड़ों के आधार पर तैयार की गई है। इस अवधि में रैनसमवेयर से जुड़े लगभग 10 लाख मामले सामने आए।

रैनसमवेयर के तहत अपराधी डाटा और कंप्यूटर को हैक कर लेता है और उसे फिर से बहाल करने के लिए पैसे की मांग करता है। भारत में होने वाले 23 प्रतिशत साइबर अपराध में इंडोनेशिया के एनान ब्लैक फ्लैग नामक गैंग का हाथ है।

इन तरीकों से लगा रहे सेंध

  • पाकिस्तान से संचालित होने वाले साइबर अपराध गैंग टीम इनसेन भी भारत में सक्रिय है। 15 प्रतिशत साइबर अपराध बांग्लादेश से किए गए। रिपोर्ट के मुताबिक डॉक्यूमेंट फाइल, जावा स्क्रिप्ट फाइल, एचटीएमएल फाइल, कंप्रेस्ड फाइल, विंडो शॉर्टकट फाइल के माध्यम से बड़ी संख्या में साइबर अपराधी सिस्टम में सेंध लगाने में कामयाब हुए।
  • गेमिंग, डेटिंग और गैम्बलिंग एप के माध्यम से भी बड़ी संख्या में लोगों को निशाना बनाया गया। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) एप चैटजीपीटी व इस प्रकार के अन्य एआई एप के इस्तेमाल के दौरान भी सावधान रहने की जरूरत है, क्योंकि कई बार फोन के एप में नकली चैटजीपीटी दिखने लगता है और उस पर क्लिक करते ही उपभोक्ता के कई महत्वपूर्ण डाटा अपराधी के पास पहुंचने की आशंका रहती है।
  • व्हाट्सएप भी साइबर अपराध का प्रमुख हथियार बनता जा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक सबसे अधिक मालवेयर हेल्थकेयर इंडस्ट्री से जुड़े उपकरणों में पाए गए। साइबर अपराध का शिकार होने वाला दूसरा बड़ा सेक्टर बैंकिंग व वित्तीय संस्थान है। उसके बाद हॉस्पिटलिटी, शिक्षा, एमएसएमई व मैन्यूफैक्चरिंग का नंबर आता है।

एआई का इस्तेमाल कर रहे अपराधी

आने वाले समय में साइबर अपराधी अपने तरीके में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को शामिल कर रहे हैं और वे अब पूरी सप्लाई चेन, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पर एक साथ हमला कर सकते हैं। इस प्रकार की चुनौतियों के तेजी से बढ़ने की आशंका जताई गई है। साइबर अपराध टियर-2 व टियर-3 में अपना पैर पसार रहे हैं, लेकिन अभी वे बड़े शहरों को मुख्य रूप से अपना निशाना बना रह हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक सबसे अधिक मालवेयर 14.58 प्रतिशत गुजरात के सूरत में पाए गए। उसके बाद बंगलुरू में 11.93 प्रतिशत, जयपुर में 11.72 प्रतिशत, हैदराबाद में 11.56 प्रतिशत, चेन्नई में 10.25 प्रतिशत, दिल्ली में 9.37 प्रतिशत, कोलकाता में 9.28 प्रतिशत, अहमदाबाद में 8.19 प्रतिशत, मुंबई में 6.79 प्रतिशत तो पुणे में 6.36 प्रतिशत मालवेयर पाए गए।

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