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    तेल कीमतों में बड़ी गिरावट संभव, वेनेजुएला पर हमले के बाद ट्रंप ने तैयार किया है ये प्लान

    Updated: Mon, 05 Jan 2026 11:51 PM (IST)

    वेनेजुएला के तेल फील्डों से तेल बिक्री के अमेरिकी संकेतों से कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट आ सकती है। एसबीआई की रिपोर्ट के अनुसार, जून 2026 तक क ...और पढ़ें

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    जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। वेनेजुएला पर हमला करने के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ संकेत दिया है कि जल्द ही वेनेजुएला के तेल फील्डों से निकाले गये तेल अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेचे जाएंगे। इससे अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल बाजार में और नरमी आने की संभावना है।

    इस बारे में सोमवार को जारी एसबीआई की शोध रिपोर्ट कहती है कि जून 2026 तक कच्चे तेल की कीमतों घट कर 50 डॉलर प्रति बैरल तक आ सकती हैं, इसका भारत की मुद्रास्फीति, रुपये की मजबूती और आर्थिक विकास पर सकारात्मक प्रभाव होगा।

    उधर, तेल उत्पादक देशों के संगठन (ओपेक) की तरफ से भी संकेत आया है कि वह तेल उत्पादन घटाने नहीं जा रहे। हालांकि इस पूरे माहौल में भारत में पेट्रोल व डीजल की खुदरा कीमतों में कोई कटौती होगी या नहीं, यह अस्पष्ट है।

    रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि ओपेक के उत्पादन बढ़ाने के फैसले के कारण तेल की कीमतें पहले से ही दबाव में हैं। उत्पादन में कटौती की रणनीति उलटने के बावजूद कीमतों में गिरावट जारी रहेंगी। वर्तमान में ब्रेंट कच्चे तेल की कीमत 61.17 डॉलर प्रति बैरल के आसपास है, जो पिछले महीने से 2.12 फीसद और सालाना आधार पर 19.83 फीसद नीचे है।

    असलियत में देखा जाए तो जून-जुलाई, 2022 के बाद से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों ने कभी 90 डॉलर को पार नहीं किया है। खाड़ी के क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ने, सीरिया पर हमला होने या अभी वेनेजुएला पर अमेरिकी हमला होने से भी कच्चे तेल की कीमतों पर कोई उल्टा असर होता नहीं दिख रहा। वजह यह है कि वैश्विक आपूर्ति प्रचुर मात्रा में है और वेनेजुएला के फील्डों से बड़ी मात्रा में तेल वैश्विक बाजार में आने की संभावना है।

    वर्ष 2019 से वेनेजुएला पर कई तरह का प्रतिबंध जारी है।यहां बता दें कि अमेरिकी प्रतिबंध लगने से पहले भारत वेनेजुएला के कच्चे तेल का एक बड़ा खरीददार देश रहा है। कभी भारत की कुल जरूरत का 10 फीसद तेल वहां से आता रहा है। वहां हैवी क्रूड होता है जिसे भारत की पुरानी रिफाइनरियां खूब पसंद करती हैं। यह सिलसिला फिर शुरू होने की संभावना है।

    एसबीआइ की रिपोर्ट ने अमेरिका की इनर्जी विभाग के आकलन का हवाला दिया है कि कैसे उसने कच्चे तेल की कीमतों के 55 डॉलर प्रति बैरल (वर्ष 2026 की पहली तिमाही) रहने का अनुमान लगाया है।