नई दिल्ली [सीमा झा]। सेल्फी की दीवानगी अब नई बात नहीं रही। इसके लिए देश और दुनिया के लोग अजीबोगरीब तरीका तक अपनाते हैं। सेल्फी के दीवाने किसी मातम या अस्पताल में होने पर भी सेल्फी लेने से नहीं चूकते। अमिताभ बच्चन ने तो ऐसी अजीब सी दीवानगी पर दुख जताया है और यह भी कहा है कि कहां खो रही है हमारी संवेदनशीलता। पर दीवानगी हद से बढ जाए तो ऐसा ही होता है।

सेल्फी के इस पागलपन का ही असर है कि अब बाजार ने इसे भुनाना शुरू कर दिया है। अब तो रेस्तरां हो या शॉपिंग मॉल, वहां भी फोटो लेने के लिए एक सुंदर सा कोना जरूर बना होता है। इतना ही नहीं, सेल्फीत की दीवानगी देखते हुए प्रयागराज कुंभ तक में 'सेल्फील प्वांलइट' बनाया गया है। सेल्फी की उस दीवानगी को अब क्या कहेंगे जो इस कदर बीमार कर दे कि खुद से प्यार न रहे, औरों जैसा बनना चाहें।

सोशल मीडिया पर सेल्फी पोस्ट करने का चलन ऐसा रूप ले लेगा, ये किसी ने सोचा नहीं होगा। एक हालिया अध्ययन के मुताबिक, सेल्फी लेने का ऐसा विनाशकारी प्रभाव सामने आया है कि लोग अपने रंग-रूप और चेहरे में भी बदलाव करने की राह पर चल पड़े हैं। वे कॉस्मेटिक सर्जरी कराकर और सुंदर दिखना चाहते हैं। कोई प्रियंका चोपड़ा की तरह नाक चाहता है तो किसी को चाहिए एंजेलिना जॉली जैसे होंठ। सबकी अपनी अपनी पसंद है और इस पसंद को सच में बदलने की होड लग गई है।

यह खुशी नहीं, एंजाइटी है
सेल्फी को लेकर किया जाने वाला यह अध्ययन देश के जाने माने एस्थेटिक क्लिनिक्स की ओर से किया गया है। इस अध्ययन में देश के प्रमुख चार महानगरों को शामिल किया गया। दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और हैदराबाद के प्रतिभागियों पर किए गए इस अध्ययन में पाया गया है कि वे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सेल्फी पोस्ट तो करते हैं, लेकिन इसके बाद उन्हें खुशी नहीं होती। पोस्ट करने के बाद वे अपने आत्मविश्वास में कमी पाते हैं और एंजाइटी भी महसूस करते हैं। यही नहीं, इस अध्ययन में शामिल 61 प्रतिशत पुरुषों और 67 प्रतिशत महिलाओं में अपने शरीर के प्रति हीनता देखी गई। बात यहीं नहीं रुकी। वे अपने शरीर को लेकर इतने बेचैन दिखे कि उन्होंने अपने चेहरे को किसी सेलिब्रेटी या खास पर्सनैलिटी की तरह बनाने की ख्वाहिश जताई।

टेक्नोलॉजी टूल है, जिंदगी नहीं
प्रसिद्ध कॉस्मेटिक सर्जन और एस्थेटिक क्लिनिक्स के निदेशक डॉक्टर देबराज शोम कहते हैं, 'टेक्नोलॉजी को टूल की तरह इस्तेमाल करने वाले अब कम बचे हैं। युवाओं में तो यह और गंभीर मसला बन चुका है। उनमें सेल्फी का क्रेज ऐसा है कि वे खुद से प्यार करना भूल रहे हैं।' डॉक्टर शोम के अनुसार, लोगों की जिंदगी और मन में टेक्नोलॉजी ने किस कदर घर कर लिया है और उन्हें नुकसान पहुंचा रहा है, सेल्फी का चलन उसकी बानगी है।

अधिक नुकसान किनको है?
कॉस्मेटिक डर्मेटोलॉजिस्ट डॉक्टर रिंकी कपूर के मुताबिक, सेल्फी लेने की इच्छा इतनी प्रबल होती है कि लोग जान गंवा देते हैं पर यह एक दुर्घटना होती है। खुद को लेकर अत्यधिक सचेत होकर वे लेाग कॉस्मेटिक सर्जरी कराने की सोचते हैं, जिनमें आत्मविश्वास की कमी होती है। ऐसे लोग अपनी शर्म और सामाजिक एंजाइटी को कम करने के लिए ऐसा करते हैं।

गंभीर मुहिम की जरूरत
अध्ययन के मुताबिक, औसतन 16-25 वर्ष के बीच के युवक-युवतियां प्रति सप्ताह 5 घंटे तक सेल्फी लेते हैं और उन्हें सोशल मीडिया प्रोफाइल पर अपलोड करते हैं। यह उन्हें खुशी देता होगा, लेकिन यह खुशी उन्हें मानसिक रूप से ही नहीं बल्कि शारीरिक रूप से भी गंभीर रूप से बीमार बना रहा है। डॉक्टर शोम कहते हैं अब तक की इस स्थिति को देखते हुए एक गंभीर मुहिम की जरूरत है, जिससे कि लोगों को समय रहते सचेत किया जा सके।

Posted By: Amit Singh