विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 13, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

औरंगजेब को ‘कुशल प्रशासक’ कहने पर घिरीं सुखाड़िया विवि की कुलगुरु, ABVP ने किया हंगामा

Published: Sat, 13 Sep 2025 05:48 PM (IST)

उदयपुर के मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय की कुलगुरु प्रो. सुनीता मिश्रा के औरंगजेब को कुशल प्रशासक बताने वाले बयान पर विवाद ...और पढ़ें

उदयपुर प्रोफेसर के औरंगजेब पर बयान से मचा बवाल (फोटो सोर्स- जेएनएन)
उदयपुर प्रोफेसर के औरंगजेब पर बयान से मचा बवाल (फोटो सोर्स- जेएनएन)

HighLights

  1. एबीवीपी ने जताया कड़ा विरोध, अकादमिक और राजनीतिक हलकों में छिड़ी बहस
  2. शहर के शैक्षणिक और राजनीतिक हलकों में इसे लेकर बहस शुरू हो गई है।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। उदयपुर के मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय की कुलगुरु प्रो. सुनीता मिश्रा के हालिया बयान ने विवाद खड़ा कर दिया है। शुक्रवार को बप्पा रावल सभागार में आयोजित सेमिनार में मिश्रा ने कहा, “हम इतिहास में महाराणा प्रताप, पृथ्वीराज चौहान और अकबर जैसे शासकों को सुनते हैं। हम कई अच्छे राजाओं को याद रखते हैं, और कुछ औरंगजेब जैसे भी थे, जो एक कुशल प्रशासक था।”

एबीवीपी का विरोध

इस टिप्पणी पर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने कड़ा विरोध जताया। एबीवीपी उदयपुर महानगर मंत्री पुष्पेंद्र सिंह राठौड़ ने कहा कि विश्वविद्यालय के सर्वोच्च पद पर बैठे व्यक्ति को ऐतिहासिक तथ्यों पर टिप्पणी करते समय सावधानी बरतनी चाहिए। उन्होंने इस बयान को विद्यार्थियों और इतिहास प्रेमियों के लिए अनुचित बताया।

“विकसित भारत 2047” विषय पर सेमिनार

प्रो. मिश्रा यह बयान “भारतीय ज्ञान प्रणाली: विकसित भारत 2047 के लिए रोडमैप” विषय पर आयोजित सेमिनार में मुख्य अतिथि के रूप में दे रही थीं। कार्यक्रम गुरु नानक कन्या स्नातक महाविद्यालय और एसोसिएशन ऑफ कॉमर्स एंड मैनेजमेंट के संयुक्त तत्वावधान में हुआ। इसमें उन्होंने भारत की प्राचीन ज्ञान परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत पर भी जोर दिया और कहा कि भारतीय परंपराएं जीवन जीने का सही मार्ग दिखाती हैं।

विवाद का केंद्र बनी एक टिप्पणी

हालांकि उनका भाषण मुख्य रूप से सकारात्मक बिंदुओं पर केंद्रित था, लेकिन औरंगजेब को ‘कुशल प्रशासक’ कहने वाली टिप्पणी चर्चा का केंद्र बन गई। शहर के शैक्षणिक और राजनीतिक हलकों में इसे लेकर बहस शुरू हो गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के बयान शैक्षणिक मंचों पर संवेदनशील होते हैं और अत्यधिक सावधानी की आवश्यकता होती है।

'किस सांप ने काटा था...', डॉक्टर के पूछते ही बुजुर्ग ने पटक दिया जिंदा सर्प; रातभर अस्पताल में डर का माहौल